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ALERT : नीति आयोग ने चेताया, नया डेल्टा वेरिएंट ज्यादा खतरनाक, कोविशिल्ड ज्यादा प्रभावी

पब्लिक हेल्थ स्कॉटलैंड और ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने की रिसर्च

New Delhi : कोरोना वायरस से सुरक्षा दिलाने के लिए कई कंपनियां प्रभावी वैक्सीन निर्माण की दिशा में काम कर रही हैं. कोरोना के सामने आ रहे तमाम वेरिएंट्स पर यह वैक्सीन कितनी प्रभावी हैं, इस बारे में लगातार शोध जारी है.

इस बीच एक अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप के खिलाफ प्रभावी होने का दावा किया है.

वहीं इस मामले में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने भी कहा है कि कोरोना वायरस का नया वेरिएंट 2020 के मुकाबले ज़्यादा चालाक हो गया है। अब हमें ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है.

हमें ज्यादा सोशल डिस्टेसिंग का पालन करना होगा। मास्क लगातार पहने रखना होगा। इसके बिना परिस्थिति फिर खराब हो सकती है.

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वैज्ञानिकों के मुताबिक सबसे पहले ब्रिटेन में सामने आये अल्फा वेरियंट की तुलना में वायरस का डेल्टा वेरियंट के कारण गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक है, हालांकि जिन लोगों ने फाइजर और एस्ट्राजेनेका के टीके लिए हैं.

उन्हें इससे काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है. गौरतलब है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके का भारत में सीरम इंस्टीयूट के साथ मिलकर कोविशील्ड नाम से उत्पादन हो रहा है.

आइए जानते हैं कि अध्ययन में वैज्ञानिकों ने किन और महत्वपूर्ण विषयों के बारे में सूचित किया है, जिसे आपके लिए जानना आवश्यक है.

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वैक्सीन के प्रभावों को जानने के लिए हुआ अध्ययन

पब्लिक हेल्थ स्कॉटलैंड और ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कोरोना के डेल्टा वेरिएंट्स के खिलाफ फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से ज्यादा असरदार पाया है.

इसी साल एक अप्रैल से छह जून तक के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि की है. अध्ययन के दौरान कोरोना से संक्रमित 19,543 लोगों को शामिल किया गया, इनमें से 377 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से 7,723 में कम्यूनिटी केस जबकि अस्पताल में भर्ती 134 लोगों में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप का पता चला.

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फाइजर 79 %, वहीं एस्ट्राजेनेका 73% तक देता है सुरक्षा

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि दोनों डोज के बाद फाइजर वैक्सीन कोरोना के अल्फा वेरिएंट्स के खिलाफ 92 प्रतिशत और डेल्टा वेरिएंट्स के खिलाफ 79 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है.

वहीं एस्ट्राजेनेका के टीके डेल्टा वेरिएंट्स के खिलाफ 60 प्रतिशत और अल्फा वेरिएंट्स के खिलाफ 73 प्रतिशत तक सुरक्षा दे सकते हैं.

इसके साथ वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि टीकों के एक डोज की तुलना, दोनों डोज डेल्टा वेरिएंट्स के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हैं.

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और फाइजर-बायोएनटेक, कोविड के दोनों वैक्सीन संक्रमण से सुरक्षित रखने और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करने में प्रभावी पाए गए हैं.

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