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शराब को लेकर पूरे झारखंड में मारामारी, ब्लैक में बिक रही शराब, दुकान न खुलने से हो रही परेशानी, विभाग लाचार

Ranchi: पूरे झारखंड के मयखानों में इन दिनों शराब परोसी कम जा रही है और ब्लैक ज्यादा हो रही है. दो अप्रैल की शाम को जिस तरीके से बार में शराब खरीदने वालों की भीड़ लगी थी, शायद ही कभी लगी हो. इधर बार मालिक मनमाने रेट पर शराब बेच रहे हैं. रोज शराब का सेवन करनेवाले मजबूरी में मनमाने दाम पर शराब खरीद रहे हैं. सबसे मजे की बात यह है कि बैठने की जगह बार मालिक खत्म करवा कर लंबी कतार लगवा कर शराब बेच रहे हैं और कहा जा रहा है कि शराब लेकर बाहर जाएं. मेन रोड रांची के एक बार में शाम के सात बजे तीन कतारें लगी हुई थीं और हर कतार में करीब 30 लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे. भीड़ इतनी ज्यादा हो रही है कि रेट पर ग्राहक किसी तरह का सवाल ही नहीं कर पा रहे हैं. जिन्हें खरीदना है वो ज्यादा दाम देकर शराब खरीद रहे हैं. ऐसी स्थिति सिर्फ रांची की ही नहीं बल्कि पूरे राज्य की है. कतार में खड़े लोगों पर पंकज उदास का वो गाना तीन दिनों से खूब जंच रहा है ‘कि महंगी हुई है शराब, थोड़ी-थोड़ी पिया करो.’

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एक अप्रैल से प्राइवेट प्लेयर्स को बेचनी थी शराब, लेकिन दुकानें ही नहीं खुलीं

पांच मार्च को लॉटरी के जरिए प्राइवेट प्लेयर्स का चयन झारखंड में शराब बेचने के लिए किया गया. राज्य भर में उत्पाद विभाग की तरफ से 799 ग्रुप बनाए गए हैं. इन 799 ग्रुपों में देसी 565 विदेशी 718 और कम्पोजिट 381 दुकानें हैं. एक अप्रैल से दुकानें खुल जानी थीं. आचार संहिता लगने की वजह से विभाग ने चुनाव आयोग से नयी प्रक्रिया बहाल करने के लिए अनुमति मांगी. चुनाव आयोग से अनुमति तो मिली, लेकिन 31 मार्च को. ऐसे में दुकान खोलने की तैयारी करने के लिए प्राइवेट प्लेयर्स को सिर्फ एक दिन का समय मिला. तीन अप्रैल की देर शाम तक भी दुकानें नहीं खुल पायी थीं. शराब खरीदने वालों के बीच यह चर्चा खास थी कि पता नहीं शराब की दुकानें कब खुलेंगी. ऐसे में लगातार कन्फ्यूजन कायम है कि पता नहीं नॉर्मल तरीके से शराब कब से बिकनी शुरू होगी.

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लाखों में खेल रहे हैं अवैध तरीके से शराब बेचनेवाले

झारखंड में कुछ बार में शराब मनमाने दाम पर बेची जा रही है. बाकी झारखंड में अवैध शराब बेचने वालों के लिए चांदी है. उनकी खपत में करीब दस गुना का इजाफा हुआ है साथ ही मनमाने रेट पर वो शराब बेच रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक इन तीन दिनों में बार मालिकों को करीब 20 लाख से ज्यादा रुपए का फायदा हुआ है. मुनाफे का ग्राफ इतना ज्यादा है कि अवैध तरीके से शराब बेचने वालों की कमाई का अनुमान तक नहीं लगाया जा पा रहा है. चोरी छिपे महुआ और दूसरी तरह की शराब भी मार्केट में फुल डिमांड में है. गौर करनेवाली बात है कि विभाग चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा है.

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