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पारा शिक्षकों के समर्थन में उतरी आजसू, सुदेश बोले- पारा टीचर लाठी नहीं, सम्मान के हकदार

राज्य की शिक्षा व्यवस्था 70 हजार पारा शिक्षकों पर ही है टिकी, दिहाड़ी मजदूर की तरह हैं पारा शिक्षक

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Ranchi: सत्ता दल के सहयोगी आजसू ने खुलकर पारा शिक्षकों के आंदोलन का समर्थन किया है. इटखोरी में पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो से मुलाकात की. सुदेश महतो ने खुले मंच से कहा कि पारा टीचर लाठी नहीं सम्मान के हकदार हैं. राज्य की शिक्षा व्यवस्था इन्हीं 70 हजार झारखंड के युवाओं पर टिकी है. सालों से ये लोग दिहाड़ी मजदूर के पैसे पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. यह तो मानव संसाधन और ज्ञान का बेजा इस्तेमाल करने जैसा है.

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सरकार अभिभावक की निभाये भूमिका

आजसू सुप्रीमो ने कहा कि सरकार टकराव के रास्ते पर चलने के बजाय अभिभावक की भूमिका निभाये. महज भवन बना देने से स्कूल नहीं चल सकते. वैसे भी राज्य में शिक्षकों की भारी कमी है. तब सरकार जेल भेजने और बर्खास्त करने की कार्रवाई कर क्या बतलाना चाहती है. विरोध प्रदर्शन की परिस्थतियां कैसे बनी इसके लिए भी सरकार को सोचना चाहिए. अफसर जो रिपोर्ट दे रहे हैं या हालात बता रहे हैं क्या इसके लिए एकतरफा पारा टीचर ही जिम्मेदार हैं.

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शासन-प्रशासन के केंद्र में जन भागीदारी दिखे

सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि जनता के बीच खड़ा होना और सवालों पर लड़ना ही राजनीति की दारोमदारी होगी. वे इसी मकसद से राजनीति में नेतृत्व करते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी का यही मूल मंत्र है. इटखोरी में आयोजित पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन सह मिलन समारोह में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ चुके मनोज चंद्रा अपने समर्थकों के साथ आजसू पार्टी का दामन थामा. सुदेश ने कहा कि मनोज चंद्रा ने पिता के संघर्ष और जनता के सवालों पर टिके रहने के जज्बा को देखा है. उनमें क्षमता और उर्जा है. युवाओं का साथ है,  इसलिए आजसू पार्टी के साथ सिमरिया में वे नई लकीर खीचेंगे. चतरा और सिमरिया को राजनीति और विकास के नक्शे पर दूसरे नजरिया से देखा जाता है, तो इन ख्यालों को आजसू पार्टी बदल कर रख देगी.

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जनभागीदारी बिना सपने नहीं होंगे साकार

शासन- प्रशासन के केंद्र में जन भागीदारी पहली प्राथमिकता इसकी राज्य की पहली जरूरत है. इसकी अनदेखी किए बिना झारखंड के सपनों को साकार नहीं किया जा सकता. वे गांव, ग्रामसभा और पिछली कतार में शामिल लोगों को सत्ता के भागीदार बनाने के पक्षधर हैं और इसके लिए ही उन्होंने स्वराज स्वाभिमान याचिका लेकर पांच हजार गांव जा रहे हैं. किसी भी नेतृत्व की सफलता ब्लॉक स्तर पर चलने वाले प्रशासनिक ढांचा के मजबूत होने से सामने आती है, लेकिन झारखंड में तो सत्ता के समानांतर बीडीओ दारोगा राज स्थापित होता जा रहा है. गांव के लोग वही दशकों पुरानें सवालों में उलझ कर रहे जा रहे हैं. मौके पर देवशरण भगत, रौशनलाल चौधरी, सुबोध प्रसाद, यूसी मेहता, डोमन सिंह मुंडा, विकास राणा, पारसनाथ सिंह, राजसिंह चौहान सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे.

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