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एजेएल जमीन आवंटन मामला : पूर्व कांग्रेसी सीएम भूपेंद्र हुड्डा के आवास पर सीबीआई छापा

Chandigarh : हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की परेशानी बढ़ गयी है. खबरों के अनुसार आज शुक्रवार सुबह भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक स्थित आवास पर सीबीआई ने छापा मारा. सूत्रों के अनुसार समाचार लिखे जाने तक कार्रवाई जारी थी. भूपेंद्र हुड्डा भी घर के अंदर ही मौजूद थे. जानकारी के अनुसार सीबीआई अधिकारी किसी को भी घर के अंदर या वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.  सीबीआई की टीमें दिल्ली-एनसीआर में एक साथ 30 से अधिक जगहों पर छापे मारे हैं. बताया गया है कि सीबीआई ने यह छापा 2005 में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को गलत तरीके से जमीन आवंटित करने के मामले में मारा है.  टाइम्‍स नाउ के अनुसार सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ एक नया मामला भी दर्ज कर लिया है.  जान लें कि सीबीआई ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और एजेएल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है.

बता दें कि हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने बहुचर्चित एजेएल मामले में सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी.  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा पर एजेएल को उसके अखबार नैशनल हेरल्ड के लिए पंचकूला में नियमों के खिलाफ जमीन अलॉट करने का आरोप है.  मौजूदा भाजपा सरकार ने साल 2016 में यह मामला सीबीआई के हवाले कर दिया था.

 भूपेंद्र हुड्डा पर आरोप है कि पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को जमीन सौंप दी

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भूपेंद्र हुड्डा पर आरोप है कि 28 अगस्त 2005 को अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को पंचकूला में जमीन का आवंटन बहाल किया. पूर्व में यह जमीन एजेएल को 30 अगस्त 1982 में आवंटित की गयी थी.  शर्त के अनुसार कंपनी को छह महीने में जमीन पर कंस्ट्रक्‍शन करना था, लेकिन ऐसा नहीं किये जाने पर 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने जमीन रिज्यूम कर ली.  साथ ही 10 फीसदी राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी. इसका एजेएल ने विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की, लेकिन यहां एजेएल को राहत नहीं मिली.

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भूपेंद्र हुड्डा पर आरोप है कि उनके मुख्यमंत्रित्वकाल में एजेएल को साल 2005 में बड़ी राहत उस समय मिल गयी, जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन होने के नाते उऩ्होंने नएजेएल को यह जमीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया.  हालांकि हुड्डा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक का तर्क था कि पुरानी कीमत पर जमीन को आवंटित करना संभव नहीं है. लेकिन इसे दरकिनार कर 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की जमीन 1982 की दर पर ही एजेएल को सौंप दी गयी.

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