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अजय मारू का मॉल और वनवासी कल्याण केंद्र भुइहरी जमीन पर बने हैं : देव कुमार धान

Ranchi : आदिवासी सरना महासभा का शुक्रवार को एक दिवसीय धरना राजभवन के समक्ष दिया गया. इसे संबोधित करते हुए देव कुमार धान ने कहा कि सरकार आदिवासियों की धार्मिक एवं सामाजिक जमीन को लूटने का काम कर रही है. आदिवासियों की जमीन पर न ही राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार का अधिकार होना चाहिये, आदिवासियों की जमीन सिर्फ आदिवासियों की है. इस पर किसी का मालिकाना हक नहीं हो सकता. आदिवासियों से जमीन हड़पने का अर्थ है उनकी संस्कृति और सभ्यता पर प्रहार करना. ऐसे भूखंडों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि पूरी रांची भुइहरी जमीन पर बसी है. हरमू हाउसिंग कॉलोनी, वनवासी कल्याण केंद्र, अजय मारू के मॉल समेत कई अन्य उदाहरण हैं इसके.

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मसना और अखड़ा को हड़पा जा रहा है

धान ने इस दौरान कहा कि राज्य के अलग-अलग भागों में आदिवासियों के सरना मसना समेत अन्य स्थानों जैसे भुइहरी, भुइहरी महतोई, मुंडाई, भुइहरी पनभोरा, भुइहरी डाली कतारी, देशाउली, भुइहरी भूतखेता, पुजार खेत, भंडारी खेत, पड़हा जमीन, धांगर खेत, जतरा टांड़, चंडी अखड़ा इन सार्वजनिक स्थानों को हड़पा जा रहा है, जिससे आदिवासी संस्कृति और सभ्यता पर असर पड़ेगा.

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सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पी जा रही आदिवासी जमीन

धान ने कहा कि भूमि माफिया अपने बल पर आदिवासियों की जमीन नहीं हड़प रहे, बल्कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा किया जा रहा है. सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशील होना चाहिए. भू-माफियाओं द्वारा सार्वजनिक भूखंडों को व्यक्गित जमीन बनाकर बेचा जा रहा है, जिससे आदिवासी मान्यताओं को ठेस पहुंच रही है.

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लोहरा जमीन को लोहार जमीन बनाकर बेचा जा रहा है

इस दौरान मुद्दा उठाते हुए धान ने कहा कि आदिवासियों की जमीन लूटने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही. लोहरा जनजाति की खतियानी जमीन को लोहार जमीन बनाकर लूटा जा रहा है. जानकारी होते हुए भी सरकार की ओर से इसे रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है.

ये रहे उपस्थित

मौके पर सधनु भगत, अजीत उरांव, गैना कच्छप, नीमा उरांव, मगही उरांव, वीणा कुजूर, मुन्नी पाहन, विनोद भगत, रायमुनी उरांव, चमरू उरांव, नारायण उरांव समेत अन्य उपस्थित थे.

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