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अजय मारू के सिटी मॉल का विवाद : डीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा- जमीन वापसी के लिए भूस्वामी कर सकता है आवेदन

डीसी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा- जिस जमीन पर बना है सिटी मॉल, उसका अंचल में भी 1956 का जमींदारी रिटर्न उपलब्ध नहीं

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Ranchi : भाजपा नेता अजय मारू के सिटी मॉल के आदिवासी जमीन पर बने होने का मामला पेचीदा होता जा रहा है. एक ओर विधानसभा की समिति मामले की सुनवाई कर रही है, वहीं झारखंड हाई कोर्ट ने मामले पर स्टे लगाते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 नवंबर की तारीख तय की है. दूसरी ओर, मौजा रांची, थाना संख्या 205, खाता संख्या 33, प्लॉट संख्या 591, रकबा 34 कट्ठा आदिवासी जमीन पर बने मॉल पर रांची के उपायुक्त ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को रिपोर्ट भेजी है. विभाग की ओर से  आठ बिंदुओं पर जवाब तलब किया गया था, जिसके जवाब में रांची के उपायुक्त के पत्र में लिखा गया है कि अगर भूस्वामी ने पूर्व में एसएआर कोर्ट में आवेदन नहीं किया हो, तो सीएनटी एक्ट 1908 की धारा 71 के तहत भूमि वापसी हेतु विशेष नियमन पदाधिकारी, रांची के समक्ष आवेदन दे सकते हैं. साथ ही, आदिवासी भूमि की लगान रसीद के आधार पर जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है.

क्या है मामला

हरमू मुक्तिधाम के पास सिटी मॉल बनाया गया है. यह मॉल थाना नंबर 205, खाता नंबर 33, प्लॉट नंबर 591, रकबा 34 कट्ठा जमीन पर बना है. दावा है कि यह आदिवासी जमीन है. इस जमीन का निबंधन भाजपा के पूर्व सांसद अजय मारू एवं राकेश दोषी द्वारा 31 मार्च 2008 को कमीशन के आधार पर कराया गया था. इस जमीन का जमींदार द्वारा दाखिल रिटर्न न तो रांची अंचल में उपल्बध है और न ही कांके अंचल में मौजूद है. ऐसे में सीएनटी एक्ट के दायरे में आनेवाली इस जमीन की खरीद-बिक्री में कई पेंच समाने आते जा रहे हैं. उक्त भूमि पर बने सिटी मॉल की दुकानों एवं प्रॉपर्टी की बिक्री और निबंधन पर रोक लगा दी गयी थी. 26 सितंबर 2018 को उक्त भूमि से संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेज संख्या 18710, का 14 निबंधित दस्तावेज को जिला अवर निबंधक, रांची द्वारा निरस्त करने की अनुशंसा प्रभारी उपसमाहर्ता, विधि शाखा, रांची से की गयी थी.

उपायुक्त के पत्र में क्या है खास

रांची के उपायुक्त ने झारखंड सरकार के राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को जो पत्र भेजा है, उसमें कुछ खास बिंदुओं पर बात की गयी है-

  • अंचल में भी 1956 का जमींदारी रिटर्न उपलब्ध नहीं है

थाना संख्या 205, खाता संख्या 33, प्लॉट संख्या 591 के बाबत जमींदार द्वारा दाखिल रिटर्न की मूल प्रति बुझारत खतियान पंजी 1 की मूल प्रति एवं 1956 से अब तक पंजी 2 की मूल प्रति समिति के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया. इसके जवाब में अंचल अधिकारी शहर रांची द्वारा इस संबंध में प्रतिवेदन किया गया है कि शहर अंचल रांची की स्थापना दिनांक 24 फरवरी 1971 को हुई थी. उस आधार पर उपलब्ध शीटों की छायाप्रति, जो वर्ष 1985-86 की है, इस कार्यालय के पत्रांक 786 दो दिनांक 9-8-2018 द्वारा उपलब्ध करायी गयी थी. शहर अंचल बनने के पूर्व कांके अंचल से कार्य संपादित होता था. इस संबंध में कांके अंचल से पत्राचार किया गया है. पत्राचार के उपरांत अंचल अधिकारी कांके द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि उनके अंचल में भी 1956 का जमींदारी रिटर्न उपलब्ध नहीं है.

  • प्लॉट पर बने मॉल की दुकानों का निबंधन रोक दिया गया है

समिति की जांच पूर्ण होने एवं स्थल निरीक्षण एवं उपरोक्त भूमि की मापी होने तक उक्त प्लॉट संख्या 591 पर बने मॉल की दुकानों की बिक्री एवं निबंधन पर अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगाने को कहा गया. इसके जवाब में जिला अवर निबंधक रांची के पत्रांक 943 दिनांक 7 सितंबर 2018 द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि उप सचिव झारखंड विधानसभा रांची का पत्रांक 1566 विधानसभा संख्या दिनांक 20 अगस्त 2018 की कंडिका 4 में दिये गये निर्देश के आधार पर खाता संख्या 33, प्लॉट संख्या 591 व अन्य प्लॉट पर मापी होने तक उक्त प्लॉट पर बने मॉल की दुकानों का निबंधन पूर्ण रूप से रोक दिया गया है एवं दिये गये निर्देश का अनुपालन कार्यालय द्वारा कठोरतापूर्वक किया जा रहा है. दिनांक 27 अगस्त 2018 को निबंधन हेतु उपस्थापित दस्तावेज को समिति के पत्रांक 1566 दिनांक 20 अगस्त 2018 के माध्यम से दिये गये आदेश के निमित्त अस्वीकृत किया गया है.

  • आवेदक के आवेदन देने पर नियम अनुकूल कार्रवाई की जायेगी

मौजा रांची, थाना संख्या 205 खाता संख्या 33 प्लॉट संख्या 59 एक आदिवासी आवेदक की भूमि है. उक्त भूमि पर जितनी भी सेल डीड और लीज डीड निबंधित की गयी हैं, उनको एक माह के भीतर निरस्त कर समिति को शपथपत्र के साथ प्रतिवेदन समर्पित करने को कहा गया. इस संबंध में कंडिका एक में मंतव्य दिया गया है. डीड निरस्त करने के पूर्व अभिलेख खोलकर नोटिस निर्गत करने के उपरांत प्रभावित पक्षों को सुनकर कार्रवाई करने का प्रावधान है, तदनुसार आवेदक द्वारा आवेदन देने पर नियम अनुकूल कार्रवाई की जायेगी.

  • एक ही नंबर से दो डीड निबंधन करने का कोई प्रावधान उपलब्ध नहीं है

निबंधन अधिनियम 1960 के उस प्रावधान की कॉपी प्रस्तुत करने को कहा गया, जिसमें अवर निबंधक को एक वर्ष में एक ही नंबर से दो डीड निबंधन करने का अधिकार प्राप्त है. जिला अवर निबंधक रांची द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि ऐसा कोई प्रावधान उपलब्ध नहीं है.

  • डीड संख्या 65 दिनांक 31 मार्च 2008 ऑफिशियल डीड नहीं है

डीड संख्या 65 जिल्द संख्या 4 पृष्ठ संख्या 589-611 वर्ष 2018 ऑफिशियल डीड नहीं है. आपके संज्ञान में आने पर आपने क्रेता एवं पहचानकर्ता के विरुद्ध क्या कार्रवाई की, इस संबंध में जवाब देते हुए जिला अवर निबंधक रांची द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि दिनांक 9 जुलाई 2018 को आहूत समिति की बैठक में इस आशय की स्वीकारोक्ति नहीं दी गयी थी. डीड संख्या 65 दिनांक 31 मार्च 2008 ऑफिशल डीड नहीं है, बल्कि निबंधन कमीशन के आधार पर किया गया है एवं उसका इंडेक्स डिजिटाइजेशन तत्कालीन जिला अवर निबंधक द्वारा कराया गया है, जो कार्यालय में डिजिटल रूप से संधारित है.

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