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लोस चुनावः एनडीए के नाम पर आजसू का प्रेशर पॉलीटिक्स शुरू, चाहिये 14 में से 3 सीट, आसार ना के बराबर

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: लोकसभा चुनाव से पहले हर पार्टी अपनी भूमिका दर्ज करा रही है. महागठबंधन में कांग्रेस और गोड्डा को लेकर जिच शायद थम गया है. राजनीतिक किचकिच महागठबंधन से शिफ्ट होकर एनडीए के पाले में आ गिरी है. झारखंड में एनडीए के स्वरूप की बात करें तो निश्चित रूप से सिर्फ दो ही पार्टी दिखती है. पहली बीजेपी और दूसरी आजसू. लोकसभा चुनाव को लेकर अब आजसू ने धीरे-धीरे अपना पत्ता खोलना शुरू कर दिया है. आजसू का बीजेपी पर दबाव है कि वो उसे कम से कम तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारने की सहमति दे. लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुआ कहा जा सकता है कि आजसू को शायद ही बीजेपी फोल्डर की कोई भी सीट बीजेपी दे. वैसे भी बीते 18 सालों में देखा गया है कि आजसू लोकसभा चुनाव में रिजल्ट नहीं दे पायी है. लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव से पहले सीटों की दावेदारी कर अपने वजूद का एहसासल कराना आजसू नहीं भूल रही है.

रांची, हजारीबाग और गिरिडीह पर है दावा

कहने को भले ही आजसू और बीजेपी एनडीए का हिस्सा हैं. लेकिन बीते विधानसभा के उपचुनाव में देखा गया है कि दोनों पार्टियों ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया. गोमिया से दोनों पार्टी आमने-सामने थे, तो सिल्ली में बीजेपी ने सरेंडर कर दिया था. कुछ ऐसा ही 2019 के लोकसभा चुनाव में होता दिख रहा है. क्योंकि आजसू जिन सीटों की बात कर रहा है, उन सीटों पर पहले से बीजेपी के उम्मीदवार काफी अंतर से जीत चुके हैं. 2014 में गिरिडीह में आजसू चीफ सुदेश महतो के ससुर यूसी मेहता रवींद्र पांडे से बुरी तरह हारे थे, वो चार नंबर पर थे और बीजेपी से हार का अंतर 3,36,382 था. रांची में खुद सुदेश महतो को बीजेपी के रामटहल चौधरी ने पटखनी दी थी, वो तीन नंबर पर थे और हार का अंतर 3,06,169 था. वहीं हजारीबाग से लोकनाथ महतो तीसरे नंबर पर थे और हार का अंतर 2,50,745 था. क्लीन स्वीप के लक्ष्य के साथ इस बार बीजेपी झारखंड में चुनाव लड़ने जा रही है. ऐसे में वो कभी भी अपनी सीटों के साथ इस तरह का जुआ नहीं खेलेगी, चाहे आजसू उम्मीदवार बदल देने की ही बात क्यों ना करे.

आजसू के प्रेशर का आधार क्या है

हाल में जब झारखंड में आगामी लोकसभा चुनाव और विधानसभा को लेकर नेता दिल्ली दौड़ लगा रहे थे, तो आजसू चीफ सुदेश महतो ने भी एक दांव खेला. उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं से मुलाकात की. उस वक्त आसार यह बन रहे थे कि अगर महागठबंधन का स्वरूप नहीं बन पाता है, तो आजसू जेवीएम के साथ जा सकती थी. लेकिन आजसू के लिए खेल अभी तक बिगड़ा हुआ है. दूसरी तरफ आजसू को छिटकता देख बीजेपी थोड़ी नरम पड़ी. झारखंड में बीजेपी के बड़े नेता दोनों पार्टी के आपसी संबंध का दुहाई देने लगे. राजनीतिक बयानों में साफ कहा जा रहा है कि बीजेपी और आजसू एक दूसरे के साथ हैं. लेकिन यह बात लोकसभा चुनाव में साबित होते नहीं दिख रही.

दोनों पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेगीः दीपक प्रकाश (प्रदेश महामंत्री, बीजेपी)

आजसू बीजेपी का नेचूरल एलाई है. वो एनडीए के साथ था, है और रहेगा. ऐसा मेरा विश्वास है. पार्टी की मान्यता है कि दोनों पार्टी मिल कर इस राज्य के निर्माण में भूमिका रही है. इस राज्य के विकास पर भी हम दोनों की जिम्मेदारी ज्यादा है. लोकसभा में दोनों पार्टी चुनाव मिलकर लड़ेंगी. सीट पर श्री प्रकाश ने कहा कि चुनाव के दौरान हर राजनीतिक दल अपना वजूद, सिद्धांत और जनाधार को बचा कर रखना चाहता है. लेकिन कहीं ना कहीं मामला झारखंड के विकास से भी जुड़ा है.

किन सीटों पर आजसू चुनाव लड़ेगा संसदीय बोर्ड करेगा फैसलाः देवशरण भगत (प्रवक्ता, आजसू)

एक दो दिनों में सारी रणनीतियों का खुलासा हो जाएगा. एनडीए के साथ चुनाव लड़ना है या फिर अकेले अभी कुछ नहीं कह सकता. लेकिन पार्टी इन तीन सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने की तौयारी कर रही है. आजसू का कहना है कि जहां हमारे उम्मीदवार ज्यादा मजबूत हैं, वो सीट हमें मिले. उम्मीदवारों का नाम और रणनीति संसदीय बोर्ड में तय होगा. फिलहाल यही कहा जा सकता है कि प्रर्टी की तरफ से तीन सीटों पर चुनाव लड़ने की रायशुमारी हुई है.

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