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पिछले दो वित्तीय वर्ष से आजसू ने नहीं की है ऑडिट रिपोर्ट फाइल

निर्वाचन आयोग में प्रति वर्ष की जाती है ऑडिट रिपोर्ट फाइल

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Chhaya

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Ranchi:  राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टी ऑल झारखंड स्टुडेंट युनियन (आजसू) पार्टी ने पिछले दो सालों से ऑडिट रिपोर्ट भारतीय निर्वाचन आयोग को फाइल नहीं की है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) को भारतीय निर्वाचन आयोग से प्राप्त सूचना में इसका खुलासा हुआ है. आरटीआई से प्राप्त सूचना में यह भी बताया गया है कि सिर्फ पिछले दो साल नहीं इसके पहले भी समय-समय पर पार्टी ने ऑडिट रिपोर्ट फाइल नहीं की है. अन्य राजनीतिक दलों की बात की जाये तो झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंड विकास मोर्चा ने प्रति वर्ष विधिवत ऑडिट रिपोर्ट फाइल की है.

निर्वाचन आयोग की बेवसाइट में भी नहीं है सूचना

भारतीय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी साल 2016-17 और 2017-18 में आजसू की ओर से ऑडिट  रिपोर्ट फाइल करने की कोई सूचना नहीं है. जबकि राज्य की अन्य क्षेत्रिय पार्टियों से संबधित दस्तावेज वेबसाइट पर उपलब्ध है. पार्टी राज्य में भाजपा के साथ सरकार बनाने वाली पार्टी है. जो पिछले चार साल से सत्ता में साझेदार है.

इसके पूर्व की रिपोर्ट

इसके पूर्व में पार्टी की ओर से जो ऑडिट रिपोर्ट आयोग को दी गयी है,  उसमें आय और व्यय का हिसाब बराबर है. मसलन 2015-16 की रिपोर्ट में कुल आय 14.35 लाख और व्यय 14.35 लाख दिखाया गया है. इसी तरह साल 2014-15 में पार्टी का कुल आय 1,71,96,541 और व्यय 2,22,45,430 है. भारतीय निर्वाचन आयोग वेबसाइट और एडीआर के रिपोर्ट में साल 2013-14, 1012-13, 2011-12 की कोई सूचना उपलब्ध नहीं है.

पार्टियों को हर साल ऑडिटिंग करानी है

नियम के मुताबिक हर राजनीतिक पार्टियों को भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने साल भर की आय व्यय का ब्यौरा देना चाहिए. ऑडिटिंग न सिर्फ नियम के तहत, बल्कि जनहित और पारदर्शिता के लिए भी जरूरी है. इसके साथ ही पार्टी से संबधित अन्य जानकारियां भी निर्वाचन आयोग को दी जानी चाहिए. जिसमें संगठनात्मक चुनाव, सदस्यों की सूची, सदस्यों की अर्हता संबधी सभी जानकारी आयोग को दी जानी चाहिए.

पार्टी है अपडेट, आयोग के वेबसाइट में कमी: प्रवक्ता

आजसू पार्टी के प्रवक्ता देवशरण भगत से जब इस संबध में बात की गयी तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता. पार्टी अपनी तरफ से हर तरह से अपडेट है. हर साल पार्टी अपनी ऑडिट रिपोर्ट आयोग को देती है. लगता है आयोग की वेबसाइट में कमी है या वेबसाइट अपडेट नहीं है.

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