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रैंकिंग में हेराफेरी के आरोपों के बाद एआईटीए ने अपडेट में देरी की बात स्वीकारी

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New Delhi:  अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) ने विशेष खिलाड़ी को फायदा पहुंचाने के लिए रैंकिंग में हेराफेरी के आरोप के बाद रैंकिंग प्रणाली के अपडेट में विलंब की बात स्वीकार की. एआईटीए ने हालांकि किसी खिलाड़ी को फायदा पहुंचने के आरोप को खारिज कर दिया.

अंडर-14 आयु वर्ग की एक खिलाड़ी के पिता ने एआईटीए से शिकायत की कि किसी खास खिलाड़ी को फायदा पहुंचाने के लिए उसके खिलाफ पेनल्टी अंक नहीं लगाया गया जिससे उनकी बेटी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने से चूक गयी.

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उन्होंने आरोप लगया कि एआईटीए ने 19 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह के लिए जारी की गयी रैंकिग में असामान्य तरीके से अगले सप्ताह के अंक भी जोड़ दिये.

हैदराबाद के श्रीनिवासन ने एआईटीए पर आरोप लगाया, ‘‘ एआईटीए ने एक सप्ताह आगे के अंक जोड़ कर खिलाड़ियों की नयी रैंकिंग जारी कर दी. जो अंक दो सितंबर को दिये जाने थे (19 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह के लिए) उसमें नियमों की अनदेखी करके 26 अगस्त को ही अंक जारी कर दिये गये. अगर यह नियमों के मुताबिक होता तो मेरी बेटी 26 अगस्त को पहले पायदान पर होती.’’

आईटीएफ के नियमों के मुताबिक रैंकिंग अंक 52 सप्ताह के प्रदर्शन के आधार पर जोड़े जाते है जिसमें अंकों को टूर्नामेंट खत्म होने दो सप्ताह बाद जोड़ा जाता है.

श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘ इस वजह से मेरी बेटी को थाईलैंड में प्रशिक्षण का मौका नहीं मिला क्योंकि उन्होंने इसके लिए शीर्ष रैंकिंग की खिलाड़ी को चुना. मेरा विरोध एक सप्ताह के विदेश में प्रशिक्षण के लिए नहीं है बल्कि जिस तरह से इसे किया गया उससे है. उन्होंने पहले पेनल्टी अंक क्यों नहीं काटे (जिस तरह अंक जोड़े)? ’’

एआईटीए के महासचिव हिरणमय चटर्जी ने माना कि रैंकिंग प्रणाली को अपडेट करने में देरी हुई. उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘मैंने मामले की जांच के आदेश दिये हैं और मुझे यह पता चला है कि पेनल्टी अंक काटने में देरी हुई है लेकिन इस में बड़ी गलती नहीं हुई है. अभिभावक शिकायत करते रहते हैं. उस समय हमारे अधिकारी छुट्टी पर थे, इसलिए ऐसा नहीं किया जा सका. हम जल्द ही रैंकिंग प्रणाली को डिजिटल करने जा रहे हैं.’’

उन्होंने 19 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह के अंकों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘ इसके लिए कोई तय नियम नहीं है. एआईटीए में कई बार जब एक से ज्यादा टूर्नामेंट चल रहे होते हैं तो कई बार हम रैंकिंग जल्दी जारी कर देते हैं. किसी को फायदा पहुंचाने का आरोप बेबुनियाद है.’’

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