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AIFF ने संतोष ट्रॉफी और नेशनल वीमेंस चैंपियनशिप में खेलने पर झारखंड की फुटबॉल टीमों पर लगायी रोक

झारखंड फुटबॉल संघ ने इस मामले को न्यायालय में ले जाने की चेतावनी दी    

Ranchi :   अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) झारखंड फुटबॉल संघ और टीम से संतुष्ट नहीं है. यही कारण है कि उसने 22 नवंबर को झारखंड फुटबॉल संघ को पत्र जारी करते हुए संतोष ट्रॉफी एवं नेशनल विमेंस चैंपियनशिप में झारखंड की टीमों के खेलने पर रोक लगाए जाने की सूचना जारी की है. संघ के प्रमुख नजम अंसारी और सचिव गुलाम रब्बानी को लिखे पत्र में रोक लगाये जाने की बात कहे जाने से अब राज्य के सैकड़ों फुटबॉल खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है.

AIFF के मुताबिक झारखंड फुटबॉल संघ के ढुलमुल रवैये के कारण इन प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में झारखंड के खिलाड़ियों की सूची ससमय उपलब्ध नहीं कराई जा सकी. अब संघ ने इस मामले को न्यायालय में ले जाने की चेतावनी दी है.

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अध्यक्ष और सचिव के बीच तालमेल का अभाव

झारखंड फुटबॉल संघ के अध्यक्ष नजम अंसारी कुछ समय पहले ही फुटबॉल को प्रोत्साहित करने की दिशा में आगे बढ़ते दिखे. इसके बाद से ही उत्पन्न विवाद अब तक जारी है. विवाद की शुरुआत तब हुई जब खेल निदेशक ने झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष अंसारी को पत्र लिखा.

सीएम के निर्देश पर लिखे गये इस पत्र में झारखंड में मृतप्राय फुटबॉल को सक्रिय करने को कहा गया. अंसारी ने इसके बाद झारखंड के लगभग सभी जिलों में आयोजन समिति गठित की. लगभग 400 क्लबों का रजिस्ट्रेशन करवाया. अधिकांश जिलों में कई वर्षों के बाद जिला फुटबॉल लीग का आयोजन हुआ.

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इन बातों को लेकर हुआ विवाद

इन आयोजनों से नाराज संघ के सचिव गुलाम रब्बानी ने अध्यक्ष को और आयोजन समिति  गठित करने के आरोप में संयुक्त सचिव को भी उनके पद से हटाने का फरमान जारी किया. रब्बानी पर आरोप है कि उन्होंने अवैध तरीके से बाहरी खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें संतोष ट्रॉफी में भेजा. अध्यक्ष चाहते थे कि इन प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में स्थानीय खिलाड़ियों को मौका मिले.

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने अध्यक्ष एवं सचिव, दोनों को समझाने का प्रयास किया. अध्यक्ष 5 बाहरी खिलाड़ियों को टीम की मजबूती के लिए शामिल करने को तैयार हो गए. साथ ही प्रशिक्षक एवं अन्य पदों में झारखंड के लोगों को ही स्थान देने का इरादा जताया. सचिव के अड़ियल रवैए के कारण बात नहीं बनी. अंततः इसका खामियाजा झारखंड के खिलाड़ियों को भुगतना पड़ा.

गौरतलब है कि सचिव के द्वारा बोकारो में खिलाड़ियों का चयन शिविर आयोजित करने के कारण काफी हंगामा हुआ था. स्थानीय वरिष्ठ खिलाड़ी इस बात पर नाराज थे कि सचिव द्वारा पहले ही खिलाड़ियों की चयन सूची एआईएफएफ को भेज दी गयी है. इसके बाद ट्रायल लिया जाना वैध कैसे होगा. इधर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने भी झारखंड टीमों का दौरा रद्द होने पर अफसोस जताया है.

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नजम बोले, कोर्ट की शरण जरूरी

नजम अंसारी ने टीम को रोके जाने पर दुख प्रकट किया है. उनके मुताबिक उनका उद्देश्य झारखंड में फुटबॉल को पुनर्जीवित करना है. हार- जीत तो खेल का हिस्सा है परंतु झारखंड के खिलाड़ियों का भविष्य बने, यही उनकी चाहत है. वे सचिव से मिलकर झारखंड के खिलाड़ियों को इन प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भेजना चाहते थे जबकि सचिव ने अपने पद का दुरूपयोग कर कई असंवैधानिक कदम उठाए. अब वे न्याय के लिये कोर्ट की शरण में जायेंगे.

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Nayika

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