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कृषि पशुधन विपणन विधेयक: व्यापारियों का आंकलन, दो से ढाई फीसदी बढ़ेगी महंगाई

  • 16 मई से आवक बंद होने से खाद्यान्न की आपूर्ति और कीमतों में पड़ेगा असर
  • आवक बंद होने से एक सप्ताह में स्टॉक खाद्यान्न समाप्त होने की संभावना

Chhaya

Ranchi: झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन विधेयक 2022 विधानसभा में पारित किया गया. विधेयक पारित होने के बाद से राज्य के व्यापारियों में आक्रोश है. व्यापारियों का मत है कि राज्य में विधेयक लागू होने से मंहगाई में इजाफा होगा. जो लगभग दो से ढाई फीसदी होगी. ऐसे में सरकार को इस विधेयक को वापस लेना चाहिये. हालांकि सरकार को इस विधेयक के बाद मिलने वाले राजस्व में वृद्धि होगी. लेकिन आम जनता महंगाई की मार झेलेगी. वहीं किसानों को इस विधेयक का कोई लाभ नहीं मिलेगा. पारित विधेयक में कृषि उपज पर दो फीसदी बाजार शुल्क लगाए जाने का प्रावधान है. व्यापारियों का कहना है कि झारखंड में अधिकांश खाद्यान्न दूसरे राज्यों से आते है. ऐसे में बाजार शुल्क लगाने से कीमतों में भारी अंतर आयेगा. इसको लेकर चैंबर 16 मई से खाद्यान्न आवक बंद करने का निर्णय लिया गया है.

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आवक बंद होने से पड़ेगा असर

16 मई से राज्य के व्यापारी खाद्यान्न आवक बंद करेंगे. राज्य में इसका असर पड़ेगा. पूर्व चैंबर अध्यक्ष सह खाद्यान्न व्यापारी प्रवीण जैन छाबड़ा ने बताया कि शुरूआत में आयात या आवक बंद करने का निर्णय लिया गया है. तबतक जितने स्टॉक है व्यापारियों के पास उसे बेचा जायेगा. ताकि सरकार को ये पता चलें कि दो फीसदी शुल्क लगाना उचित नहीं है, क्योंकि राज्य में गेहूं, दलहन, तिलहन, मसाले, चीनी तक दूसरे राज्यों से आते है. स्टॉक जब खत्म होने लगेगा तब लोगों को परेशानी होगी, कीमतों में उछाल की भी संभावना है. छाबड़ा के अनुसार आवक बंद कब तक रहेगा इसके लिये समय तय नहीं है. समय-समय पर व्यापारियों की बैठक मामले में हो रही है. जैसी स्थिति होगी निर्णय लिया जायेगा.

एक सप्ताह में स्टॉक खत्म हो सकता है

चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा ने बताया कि जो भी कृषि उपज बाजार में बेचा जायेगा, फिर चाहे वो दूसरे राज्यों से लिया गया हो उस पर ये शुल्क लगाया जायेगा. स्पष्ट है महंगाई बढ़ेगी. 16 मई से आवक बंद किया जायेगा. एक सप्ताह में व्यापारियों के पास जो स्टॉक है वो भी खत्म हो सकता है. ऐसे में खाद्यान्न आपूर्ति सरकार कैसे करेगी, इस पर सरकार को सोचना चाहिये.

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किसानों का होगा पलायन

खाद्यान्न व्यापारी अर्जुन जालान ने जानकारी दी कि इस विधेयक के प्रभावी होने से दो फीसदी बाजार शुल्क किसान, उपभोक्ता व्यवसाय और कृषि उपज से संबंधित उद्योग के मार्ग को बाधित करेगा. राज्य मुख्य रूप से एक उपभोक्ता राज्य है जहां अधिकतर कृषि उत्पादित वस्तुएं अन्य राज्यों से आयातित होती हैं, जबकि उत्पादक राज्य छत्तीसगढ़ में इस शुल्क को समाप्त कर दिया गया है. कृषि उपज पर 2 प्रतिशत बाजार शुल्क लगाये जाने से फिर से कृषि व्यापार दूसरे राज्यों में पलायन करेगा. जिससे यहां के व्यवसाय व उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से कृषक व मजदूर प्रभावित होंगे.

नहीं लिया कोई विचार

सरकार से विधयेक वापस लेने के लिए फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉर्मस की ओर से लगातार इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है. मार्च से ही विरोध जारी है. फिलहाल सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है. खाद्यान्न व्यापारी का कहना है कि इस विधेयक को लागू करने के पहले सरकार ने किसानों और व्यापारियों से कोई विचार विर्मश नहीं किया. जब कि विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस संगठन मंत्री, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, कृषि मंत्री समेत कई स्तरों पर मुलाकात की गयी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकाला.

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