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अग्निवेश हमला मामला : SDPI ने की झारखंड सरकार को बर्खास्त करने की मांग

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New Delhi : सोशल डेमाक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) कार्यकर्ताओं ने झारखंड में स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले के विरोध में आज प्रदर्शन किया. उन्होंने केंद्र से राज्य की भाजपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग भी की. सामाजिक कार्यकर्ता अग्निवेश (79) पर मंगलवार को झारखंड के पाकुड़ में एक भीड़ ने हमला किया था और उन्हें अपशब्द कहे थे. उन्होंने हमलावरों को भाजपा से संबद्ध युवा संगठन का बताया है.

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क्या कहना है एसडीपीआई का

एसडीपीआई के उपाध्यक्ष शरफुद्दीन अहमद ने कहा कि अग्निवेश पर हमला देश में दलितों और अल्पसंख्यकों पर भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों द्वारा बढ़ते अत्याचार के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने की कोशिश है. स्वामी अग्निवेश बंधुआ मजदूरी के खिलाफ काम करने को लेकर जाने जाते हैं. अहमद ने कहा कि स्वामी अग्निवेश असहमति की आवाज के प्रतीक हैं. उन पर भगवा संगठन द्वारा हमला घोर निंदनीय है. केंद्र को झारखंड की भाजपा सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए और अग्निवेश पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. एसडीपीआई सदस्यों ने इस घटना के विरोध में जंतर मंतर से संसद मार्ग की ओर मार्च किया जहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया.

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क्या था मामला

समाजसेवी स्वामी अग्निवेश के साथ भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने मारपीट किया था. वह मंगलवार को लिट्टीपाड़ा में 195वां दामिन महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंचे थे. इस दौरान भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने वापस जाओ के नारे लगाए. इस वजह से उन्हें महोत्सव में जाने से रोक दिया गया. जिसके बाद वह पाकुड़ के मुस्कान होटल वापस लौट आए. स्वामी अग्निवेश पर यह आरोप लगाया गया था कि वह ईसाई मिशनरी के इशारे पर आदिवासियों को भड़काने आए थे. इसी को लेकर कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की थी.

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कौन हैं स्वामी अग्निवेश ?

स्वामी अग्निवेश का छत्तीसगढ़ के शक्ति में हुआ था.  21 सितंबर, 1939 को उनका जन्म हुआ था. कोलकाता से उन्होंने लॉ और बिजनेश मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी. पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने आर्य समाज में संन्यास ग्रहण कर लिया था. जिसके बाद आर्य समाज का काम करते-करते 1968 में आर्य सभा के नाम से एक राजनीतिक पार्टी बनायी. वर्ष 1981 में उन्होंने दिल्ली में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना की. इसके बाद वह राजनीति में उतरे और हरियाणा के मंत्री बने. हांलाकि बाद में उन्होंने राजनीति पूरी तरह से छोड़ दिया.

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