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नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज आंदोलन की 27वीं वर्षगांठ पर जुटे आंदोलनकारी

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Latehar: लातेहार जिला के नेतरहाट थाना क्षेत्र में स्थित तुटुआपानी मैदान में केंद्रीय जन संघर्ष समिति लातेहार एवं गुमला शाखा ने प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का विरोध करते हुए 27वीं वर्षगांठ मनायी. मौक पर लातेहार एवं गुमला जिला के तक़रीबन दो हज़ार आदिवासियों की मौजूदगी देखी गयी. सभी ने एक स्वर से जान देंगे ज़मीन नहीं देंगे का नारा लगाया.

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इस बार आदिवासियों की सरकार बनेगी: वासवी  

आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आदिवासी नेत्री वासवी किड़ो ने कहा कि यह चुनावी वर्ष है. हमें इस चुनावी वर्ष में मताधिकार का प्रयोग कर आदिवासी सरकार बनानी है. जो कि हमारे बी की हो, बाहरी नहीं. वर्तमान सरकार आदिवासियों की ज़मीन को बेच कर बनी है. वन अधिनियम को लेकर वन अधिकारी खुद कमाई कर रहे हैं. वन सम्पदा का दोहन हो रहा है.

आदिवासियो को वन अधिनियम का भय दिखा कर उन्हें जंगलो से भगाया जा रहा है. 2013 से पहले जो वन अधिनियम थे, उसे लागू होना चाहिए. इस दिशा में किया गया संशोधन रद्द किया जाना चाहिये. वन अधिनियम 2006 आदिवासियो के हित में बना है. जिसे वर्तमान सरकार संशोधित कर लागू कर रही है. यह गलत है.

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हमारा आन्दोलन गांधी और जतरा टाना भगत की राह पर चलने वाला है : जेरोम

सभा को सम्बोधित करते हुए जेरोम जेराल्ड कुजुर के कहा कि हमारा आन्दोलन महात्मा गांधी और जतरा टाना भगत की राह पर चलने वाला है. हम सत्याग्रह की राह पर ही चलेंगे. किसी भी कीमत पर अपने आन्दोलन की रूपरेखा नहीं बदलेंगे.

बिना ग्रामसभा की अनुमति लिये किसी की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया सकता : फादर जार्ज  

सभा को सम्बोधित करते हुए फादर जार्ज मोनीपोली ने कहा कि कोई ऐसे ही ज़मीन नहीं ले सकता है. ज़मीन लेने के पूर्व सामाजिक अंकेक्षण वन अंकेक्षण साथ ही साथ ग्रामसभा की कम से कम 80 फीसदी सहमति की जरूरत है. वन कानून में संशोधन कर सरकार आदिवासियों को परेशान कर रही है.

कभी लैंड बैंक के नाम पर, कभी फायरिंग रेंज के नाम पर, कभी टाइगर और हांथी जोन के नाम पर आदिवासियों की जमीन ली जा रही है. इसे रोकना होगा. कार्यकर्म में अनिल मनोहर, जेपी मिंज, सुनील केरकेट्टा, पीटर बेंग, प्रमोद खलखो आदि लोग शामिल थे. युवा मंडली एवं अन्य गांवों से ग्रामीणों ने मंच से गीत-संगीत एवं नुक्कड़ नाटक साझा किया.

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