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अग्रवाल ब्रदर्स हत्याकांड : लोकेश चौधरी और एमके सिंह के घर पुलिस ने चिपकाया इश्तेहार

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Ranchi : अग्रवाल ब्रदर्स हत्याकांड के मुख्य आरोपी और फरार चल रहे लोकेश चौधरी और एमके सिंह के ऊपर रांची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उनके घर के बाहर इश्तेहार चिपकाया है. लोकेश चौधरी और एमके सिंह के जल्द सरेंडर या गिरफ्तार नहींं होने पर लोकेश चौधरी और एमके सिंह के घर रांची पुलिस कुर्की जब्ती करने की कार्रवाई करेगी. अग्रवाल ब्रदर्स हत्याकांड के 19 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक लोकेश चौधरी और एमके सिंह फरार चल रहे हैं.

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पुलिस के गिरफ्त से दूर है लोकेश चौधरी और एमके सिंह

अग्रवाल ब्रदर्स हत्याकांड के 19 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के गिरफ्त से दूर है. हत्याकांड का मुख्य आरोपी  लोकेश चौधरी और एमके सिंह के बॉडीगार्ड से अरगोड़ा पुलिस 5 दिनों से रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है. बता दें कि 19 मार्च को धर्मेंद्र तिवारी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था और इससे पहले 15 मार्च को सुनील कुमार को बोकारो से पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था. वहीं 20 मार्च को चालक शंकर को पुलिस ने जेल भेजा था. इस मामले में अब तक तीन लोग जेल जा चुके हैं. लोकेश और आइबी ऑफिसर बन रुपए उड़ाने की कोशिश करने वाला एमके सिंह फिलहाल फरार है.

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अग्रवाल ब्रदर्स हत्याकांड की पूरी स्थिति नहीं हो पायी है स्पष्ट

6 मार्च की शाम अशोक नगर रोड नंबर 1 में एक निजी चैनल के कार्यालय में अग्रवाल ब्रदर्स की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी . लेकिन हत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. एमके सिंह और लोकेश चौधरी के गिरफ्तारी के बाद ही हत्याकांड की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी. पुलिस के द्वारा रिमांड में लिए गये सुनील कुमार और धर्मेंद्र तिवारी को आमने-सामने बैठाकर भी अलग-अलग पूछताछ की है.

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25 लाख रुपए को हड़पने के चलते की गयी थी हत्या

गिरफ्तार हुए लोकेश चौधरी का निजी बॉडीगार्ड सुनील कुमार ने पुलिस को उसने बताया था कि व्यवसायी हेमंत अग्रवाल और महेंद्र अग्रवाल की हत्या 25 लाख रुपये हड़पने के लिए की थी. इसके लिए अपने दोस्त और बॉडीगार्ड से आइबी की फर्जी रेड कराई थी. एमके सिंह और धर्मेंद्र तिवारी ने अग्रवाल बंधुओं पर गोली चलायी थी. निजी न्यूज चैनल कार्यालय में दोनों भाईयों की हत्या के बाद लोकेश, एमके सिंह और उनके दोनों अंगरक्षक सीसीटीवी फुटेज की डीवीआर लेकर भाग फरार हो गये थे. अपने टी-शर्ट पर लगे खून को छुपाने के लिए डीवीआर के साथ जला डाला था, ताकि साक्ष्य नष्ट हो जाये.

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