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झारखंड फार्मेसी कौंसिल की नीतियों के विरोध में 28 सितंबर को बंद रहेंगी दवा दुकानें

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Ranchi : झारखंड फार्मेसी कौंसिल की नीतियों के विरोध में शुक्रवार को केमिस्ट शॉप संचालकों ने अपनी दुकानों को बंद रखने का निर्णय लिया है. रांची डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीकृष्णा प्रधान ने बताया कि अनुभवी फार्मासिस्ट का निबंधन/नवीकरण नहीं होने से दवा व्यापारियों में नाराजगी है  और इसी वजह से सभी केमिस्ट विक्रेताओं ने मिलकर यह निर्णय लिया है. उन्होंने बताया कि निबंधन नहीं होने के कारण दवा दुकानों की अनुज्ञप्ति का नवीकरण भी नहीं हो पा रहा है. इससे कई दुकानें बंद होने के कगार पर हैं.

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झारखंड फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने किया बंद के फैसले का विरोध

दूसरी और झारखंड फार्मासिस्ट एसोसिएशन एवं झारखंड के तमाम योग्यताप्राप्त निबंधित फार्मासिस्टों ने इस बंद का विरोध किया है. झारखंड फार्मासिस्ट एसोसिएशन के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि दवा दुकानदारों और व्यापारियों को आम जनता की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें तो बस मुनाफा कमाने की पड़ी हुई है. उन्हें एक रोगी के प्रति क्या कर्तव्य है, इससे कोई मतलब नहीं है. जो दवा व्यवसाय को अपनी जीविका का साधन बनाये हुए हैं और जो फार्मेसी की योग्यता नहीं रखते हैं, उन्हें अब तक अपने बाल-बच्चों को कम से कम डिप्लोमास्तरीय फार्मेसी की पढ़ाई करवाकर फार्मेसी कौंसिल से निबंधित कराकर अपने दवा व्यवसाय को जीवित रखने का काम कर लेना चाहिए था, न कि अपनी गलत मांग सरकार से मनवाने की नाकाम कोशिश करनी चाहिए थी. उपेंद्र सिंह ने कहा कि आम जनता के हित में जितनी भी योग्यताप्राप्त निबंधित फार्मासिस्ट की दवा दुकानें हैं, वे सभी हमेशा की तरह 28 सितंबर को भी खुलेंगी.

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बंद करनेवाली दुकानों को हमेशा के लिए किया जाये बंद

झारखंड फार्मासिस्ट एसोसिएशन के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि वैसी दवा दुकानें, जो 28 सितंबर को बंद रहेंगी, उन्हें हमेशा के लिए बंद कर दिया जाये. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इन दुकानदारों पर कार्रवाई करते हुए उनका निबंधन भी रद्द कर देना चाहिए, ताकि फार्मेसी एक्ट का पालन हो सके. उन्होंने कहा कि योग्यताप्राप्त निबंधित फार्मासिस्ट को सभी जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि के आस-पास तथा सभी चौक-चौराहों पर नगर निगम की दुकान या सरकारी जमीन पर दुकान बनाकर आवंटित कर देनी चाहिए, ताकि इस तरह की समस्या से सरकार को आगे जूझना नहीं पड़े. उन्होंने कहा कि आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, सभी सरकारी अस्पतालों में आम जनता को दवा के साथ इलाज की सुविधा 28 सितंबर को भी मिलती रहेगी.

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