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EVM पर फिर उठे सवालः चार राज्यों में कई सीटों पर मतदान से अधिक गिने गये वोट

New Delhi:  लोकसभा चुनाव के नतीजों को पहले दिन से ही संशय के साथ देखा जा रहा था. ये नतीजे मतदान के अलावे मतदान की प्रक्रिया से भी सीधे रूप से जुड़े हुए हैं. अब इसे लेकर एक बड़ा पर्दाफाश किया गया है. इसमें दावा किया गया है कि देश के करीब चार राज्यों के मतदान और वहां की मतगणना के आकड़ों का अध्यनन किया गया. इसमें ये तथ्य निकलकर आया है कि कई सीटों पर कुल वोटिंग से ज्यादा वोटों की गिनती हुई है. जिसके उदाहरण प्रस्तुत किये गये हैं, उन सीटों में देश की तीन हाई प्रोफाइल सीटें भी शामिल हैं. इन सीटों में बिहार की पटना साहिब, जहानाबाद और बेगूसराय की संसदीय सीट है.

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ये फाइडिंग पिछले दिनों ‘न्यूज क्लिक’ ने अपनी वेबसाइट पर जारी की है. न्यूज क्लिक ने वोटों की गिनती से जुड़ी अपनी पड़ताल की है. इसमें ये तथ्य बाहर निकलकर आये हैं कि बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में कई सीटों पर कुल वोटिंग से से अधिक संख्या में हजारों वोटों की गिनती की गयी है.

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वेबसाइट ने आगे की रपट में लिखा है कि जिन संसदीय सीटों में मतों की गिनती की जांच हुई उनमें से आठ में कम से कम एक पर इस प्रकार की गड़बड़ी हारने वाले उम्मीदवार के वोटों के अंतर से भी कहीं है. यहां गौरतलब है कि यह तथ्य ऐसे समय पर सामने आये हैं, जब चुनावी माहौल और नतीजों वाले दिन से लेकर बाद तक ईवीएम पर सवाल उठाये जाते रहे हैं. कांग्रेस समेत विपक्ष के अन्य दलों ने बिहार, यूपी, हरियाणा समेत कई और राज्यों में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ होने का आरोप लगाया था.

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वेबसाइट ने संबंधित राज्यों की इन सीटों का बयोरा छापा है. इसके अनुसार, राज्यों की और चुनाव आयोग (ईसी) की वेबसाइटों और ईसी के वोटर टर्नआउट ऐप से जुटाए गये आंकड़े के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि 20 लाख 51 हजार 905 मतदाता वाले पटना साहिब क्षेत्र में 46.34 फीसदी मतदान हुआ. वहां नौ लाख 50 हजार 852 वोट डाले जाने थे, पर मतों की गिनती में नौ लाख 82 हजार 285 वोट रहे. यानी इस सीट पर 31 हजार 433 वोटों का फर्क था. बता दें कि बीजेपी उम्मीदवार ने यहां 2.84 लाख वोटों से जीत हासिल की है.

अगर बेगूसराय की बात करें तो यहां कुल 19 लाख 54 हजार 484 वोटर्स हैं. यहां 61.27 प्रतिशत वोटिंग हुई. वहां 11 लाख 97 हजार 512 मत पड़ने थे, पर वोटों की गिनती में आंकड़ा 12 लाख 25 हजार 594 था. यानी असल वोटिंग और गिने गए वोटों के बीच 28 हजार 82 वोटों का फर्क है. इस सीट से भी भाजपा के उम्मीदवार लगभग चार लाख मतों के अंतर से जीते हैं. इस अध्ययन में पूर्वी दिल्ली, मध्य प्रदेश की गुना व मुरैना, यूपी की बदायूं और फर्रूखाबाद संसदीय सीट को भी शामिल किया गया है. इसी प्रकार से असल में डलने वाले वोटों और उनकी गिनती के बीच फर्क पाया गया.

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इस मामले में तीन पूर्व ईसी के आयुक्तों से भी बात की गयी. इसपर इन अधिकारियों ने से हैरानी जतायी और कहा कि चुनाव आयोग को इस मसले पर सफाई देनी चाहिये या फिर वोटों के आंकड़ों में गड़बड़ी मुद्दे का समाधान करना चाहिये.

बता दें कि इससे पहले, पटनासाहिब से हारने वाले कांग्रेसी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने शक जताया था और कहा था कि ‘कोई बड़ा खेल तो जरूर हुआ है.’

इसी मामले पर कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के एक सदस्य, जिन्होंने बिहार में 40 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव का बारीकी से पालन किया, ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “ईवीएम पर गंभीर संदेह हैं. मतदान के रूप में भारी अंतर प्रतीत होता है. यह पूरे राज्य में हुआ है और मतपत्रों की गिनती हुई. कांग्रेस निश्चित रूप से अपनी जांच करेगी. , पार्टी का कानूनी प्रकोष्ठ इस मुद्दे को उठायेगा और सीडब्ल्यूसी की बैठक में यह मामला उठाया जाएगा.

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