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एजी रिपोर्ट में हुआ खुलासा- कानून तोड़कर बना पीटीपीएस-एनटीपीसी ज्वॉइंट वेंचर, झारखंड को लगा 187 करोड़ रुपये का झटका

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Ranchi : पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (पीटीपीएस) को एनटीपीसी को दिये जाने को लेकर एजी ने कई सवाल उठाये हैं. एजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर से कहा है कि इस ज्वॉइंट वेंचर में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 का उल्लंघन हुआ है. इस तरह से नियमों का उल्लंघन होने से झारखंड सरकार को करीब 187 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. बताते दें कि पीटीपीएस की हालत में सुधार लाने के लिए झारखंड सरकार, जेबीवीएनएल और एनटीपीसी के बीच ज्वॉइंट वेंचर हुआ था. इस वेंचर का मकसद झारखंड में बीजली उत्पादन को बढ़ावा देना था, लेकिन ज्वॉइंट वेंचर किये जाने के बाद अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस मामले में एजी ने सरकार से कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं.

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एजी ने उठाये ये सवाल

  • एजी ने झारखंड सरकार और ऊर्जा विभाग से पूछा है कि आखिर वह कौन-सा रास्ता था, जिसको अख्तियार कर सरकार ने पीटीपीएस की वैल्यू आंकी. एजी का कहना है कि एनटीपीसी ने मार्च 2017 तक पीटीपीएस की जो वैल्यू आंकी थी, उसका भुगतान नहीं किया गया. आखिर भुगतान क्यों नहीं किया? एजी ने कहा है कि पीटीपीएस 1896 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें एक डैम भी शामिल है. जमीन के साथ मालिकाना हक एक के ही नाम पर है. जमीन और डैम को लेकर कहीं से कोई विवाद नहीं है. ऐसे में किस आधार पर फेयर वैल्यू का आंकलन किया गया?
  • ज्वॉइंट वेंचर के लिए विभाग की तरफ से 25 अप्रैल 2010 को ग्लोबल बिडिंग निकाली गयी थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया. आखिर बिडिंग क्यों रद्द की गयी? इसके पीछे क्या वजह है? बाद में विभाग की तरफ से नॉमिनेशन के आधर पर एनटीपीसी का चयन किया. एनटीपीसी का चयन करने के पीछे क्या आधार है?
  • ज्वॉइंट वेंचर से पहले पीटीपीएस पर करीब 581 करोड़ की देनदारी थी. ज्वॉइंट वेंचर तैयार करने के लिए जो मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन तैयार किया गया, उसमें कहीं भी पीटीपीएस की देनदारी का जिक्र नहीं है. कहीं कोई चर्चा ही नहीं है कि 581 करोड़ की देनदारी पीटीपीएस कहां से देगी.
  • झारखंड सरकार और एनटीपीसी के बीच जो इक्विटी शेयर का बंटवारा हुआ है, वह 74:26 का है. इसमें एनटीपीसी के शेयर 74 फीसदी हैं और झारखंड सरकार के 26 फीसदी. एजी का कहना है कि इक्विटी शेयर अगर 70:30 का भी होता, तो पीटीपीएस के पास सात करोड़ की देनदारी बच जाती है.
  • ज्वॉइंट वेंचर में एनटीपीसी को झारखंड सरकार को 360 करोड़ रुपये का भुगतान करना था. यह भुगतान ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने तक हुआ है या नहीं? साथ ही, एजी ने सरकार से सवाल किया कि एनटीपीसी पीटीपीएस ज्वॉइंट वेंचर में जो भी भुगतान करेगी, उसके लिए अलग से अकाउंट बनाना था. क्या वह अकाउंट खुला?
  • ज्वॉइंट वेंचर के करार में ऊर्जा विभाग को JUUNL को उत्पादन ठीक करने के लिए कुछ राशि देनी थी. एजी ने सरकार से सवाल किया है कि क्या यह राशि JUUNL को दी गयी.
  • एजी का कहना है कि ज्वॉइंट वेंचर के वक्त में पीटीपीएस की 10 यूनिट बंद हैं. उत्पादन शुरू होने के बाद बिजली का टैरिफ बढ़ सकता है. इस टैरिफ का लोड सीधा उपभोक्ता पर आयेगा. इसका क्या उपाय किया गया है?
  • फेज वन के बारे में ज्वॉइंट वेंचर एसोसिएशन (जेवीए) में कहा जा रहा है, लेकिन फेज टू के बारे में जेवीए में कहीं जिक्र नहीं है. आखिर फेज टू के विस्तार के लिए पूंजी का हिसाब-किताब क्या है?
  • अगर किसी कारण से फेज वन फेल कर जाता है, तो ऐसे में ज्वॉइंट वेंचर कंपनी क्या करेगी, इस पर जेवीए में कहीं कोई जिक्र आखिर क्यों नहीं है?

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