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उत्तराखंड के बाद यूपी में भी कांवड़ यात्रा पर रोक, झारखंड में भी उम्मीद कम

RANCHI: उत्तर प्रदेश में इस साल भी कांवड़ यात्रा का आयोजन नहीं किया जाएगा. यात्रा को लेकर कांवड़ संघों की तैयारियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी और डीजीपी मुकुल गोयल को कांवड़ संघों से बातचीत करने का निर्देश दिया था. सरकार की कोशिशों से कांवड़ संघ मान गए. शनिवार को देर शाम राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार की अपील पर कांवड़ संघों ने यात्रा रद्द करने का फैसला किया. इस फैसले से यात्रा को लेकर जारी गतिरोध दूर हो गया है.

उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने मंगलवार को ही कांवड़ यात्रा रद्द कर दी थी. इसके साथ ही 24 जुलाई से कांवड़ियों के लिए राज्य की सीमा बंद करने का फैसला भी किया गया है. उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने यह बताया. उत्तराखंड सरकार ने राज्यों को हरिद्वार से टैंकरों के जरिए गंगा जल ले जाने की मंजूरी दी है.

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देवघर में श्रावणी मेला की उम्मीद

 

अब कांवड़ यात्रा से जुड़े राज्यों में से उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में यह यात्रा रद्द रहेगी. वहीं झारखंड में कोरोना संक्रमण के कारण  देवघर में एक महीने तक चलने वाला श्रावणी मेला और इससे जुड़ी कांवड़ यात्रा होने की उम्मीद कम ही है. इसे पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है. इसी साल 25 जुलाई से श्रावण मास शुरू हो रहा है लेकिन अभी तक देवघर जिला प्रशासन की ओर से मेले को लेकर कोई तैयारी नहीं हुई है. यह इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार देवघर के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में कांवड़ियों का मेला और जमावड़ा नहीं होने देगी, जिसे 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. कोरोना संक्रमण के कारण व धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदियों के चलते इस साल लगातार दूसरी बार भक्त बाबा वैद्यनाथ के दर्शन से दूर रहेंगे.

 

हालांकि झारखंड सरकार ने ऐतिहासिक श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर कोई औपचारिक आदेश नहीं दिया है. लेकिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं पिछली बार की तरह इस बार भी देवघर में श्रावणी मेले का आयोजन नहीं होगा. कांवड यात्रा के आयोजन नहीं होने से भोले बाबा के भक्तों में निराशा दिख रही है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ यात्रा मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए यूपी सरकार और केंद्र से जवाब मांगा था. इस बीच योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि यूपी में कांवड़ यात्रा पर पूरी तरह रोक नहीं है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे में कहा था कि यूपी में कांवड़ यात्रा सांकेतिक रूप से चलाई जाएगी. इसके साथ ही सख्‍ती से कोरोना प्रोटोकाल लागू कराया जाएगा. सरकार इसके लिए गाइडलाइन जारी कर सकती है. वहीं, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार को कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उचित निर्णय लेना चाहिए. इस सम्‍बन्‍ध में केंद्र सरकार द्वारा पहले ही एडवाइजरी जारी की जा सकती है.

कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच यूपी में कांवड़ यात्रा की इजाजत का सुप्रीम कोर्ट ने स्‍वत: संज्ञान लिया था. कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को लोगों को भ्रमित करने वाला बताया था. कोर्ट ने कहा था कि उत्‍तराखंड ने कोरोना की आशंका के मद्देनज़र कांवड़ यात्रा को रद्द करने का फैसला लिया है लेकिन उत्‍तर प्रदेश ने ऐसा नहीं किया.

 

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