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दो सालों बाद चतरा में मंत्री सत्यानंद भोक्ता की विरासत संभालेगी ‘बहू’ रेशमी!

Ranchi : 2024 में झारखंड विधानसभा के चुनाव होंगे. इसके लिए चतरा विधानसभा सीट पर जोर आजमाइश शुरू है. मंत्री सत्यानंद भोक्ता अभी यहां के विधायक हैं. पर अगली दफा चुनाव में वे वहां से ताल ठोक पाने की गारंटी तय कर पाने की स्थिति में नहीं लगते. कारण कि एससी के लिए आरक्षित रही सीट अब भी उसी वर्ग के लिए सुरक्षित रहेगी पर भोक्ता समाज अब एससी से एसटी वर्ग में चला गया है. ऐसे में अब सत्यानंद भोक्ता अपनी भावी बहु रेशमी को इस सीट पर उतार सकते हैं. रेशमी प्रशासनिक पदाधिकारी प्रकाश बैठा की बेटी हैं. इसके अलावा वह एससी वर्ग से ही आती हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि सत्यानंद भोक्ता की चतरा में राजनीतिक विरासत संभालने का मौका रेशमी को मिल सकता है. शादी का समय निर्धारित करने को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से भेंट करने की तैयारी है.

राजनीतिक ताकत को बचाने की कवायद

गौरतलब है कि सत्यानंद भोक्ता के तीसरे बेटे मुकेश भोक्ता की सगाई शुक्रवार को रेशमी से हुई. सारे रस्म रांची के होटल रेडिशन ब्लू में पूरे किये गए. सगाई के बाद से चतरा जिले में यह चर्चा का विषय बना हुआ है. कहा जा रहा है कि इस बहाने से चतरा सीट पर भोक्ता समाज की पकड़ बनाए रखने में मदद मिलेगी. पिछले दिनों एससी-एसटी विधेयक में हुए संशोधन के बाद चतरा विधानसभा क्षेत्र से भोक्ता समाज के लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो गए हैं. भोक्ता समाज एससी (शेड्यूल कास्ट) से एसटी (शेड्यूल ट्राइब) में तब्दील हो चुका है और चतरा विधानसभा क्षेत्र एससी (शेड्यूल कास्ट) के लिए सुरक्षित है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि अब रेशमी को चुनाव लडाने के बहाने भोक्ता परिवार चतरा में राजनीतिक पकड़ बरकरार रख सकेगा. सूत्रों से मिली जानकारी और संकेतों के मुताबिक सत्यानंद भोक्ता के बेटे की रेशमी से सगाई होने का मसला यहीं तक नहीं रहने वाला. होने वाली बहु रेशमी के लिए 2024 के विधानसभा का चुनाव का रास्ता भी तैयार किया जा रहा है. चर्चा इस बात की भी है कि सत्यानंद भोक्ता ने इन सभी संभावनाओं के मद्देनजर ही इस सगाई को स्वीकृति दी थी. मंत्री के करीबियों के मुताबिक एससी एसटी संशोधन विधेयक लागू हो जाने के बाद से भोक्ता परिवार चिंतित था. इसके निदान के लिए ही एससी वर्ग की एक लड़की को बहु बनाने की दिशा में पहल हुई है.

Sanjeevani

80 के दशक से दबदबा

गौरतलब है कि चतरा विस क्षेत्र पर 1985 से भोक्ता समाज की मजबूत पकड़ रही है. इस समाज के लोग इस क्षेत्र से लगातार जीतते रहे हैं. 1985 में इस क्षेत्र से सबसे पहले महेंद्र सिंह भोक्ता ने सफलता हासिल कर इस समाज के राजनीतिक भविष्य के लिए एक नई राह खोल दी थी. महेंद्र सिंह भोक्ता बाद में (1990 में) भी इस क्षेत्र से विजयी हुए. बाद में इस क्षेत्र से जनार्दन पासवान भी दो बार चुनाव जीते. कालांतर में सत्यानंद भोक्ता ने यहां से जीत हासिल की. मंत्री भी हेमंत सरकार में बने हैं. मंत्री और जिला परिषद अध्यक्ष से लेकर वार्ड सदस्य के पदों पर भी इस क्षेत्र के भोक्ता समाज के लोगों की अच्छी उपस्थिति रही है. इसकी वजह इस क्षेत्र में भोक्ता समाज की बहुलता रही है. लेकिन संशोधन के बाद इस क्षेत्र से भोक्ता वर्ग के लोग चुनाव लड़ने से बेदखल हो चुके हैं लेकिन अब यह माना जा रहा है कि मंत्री सत्यानंद भोक्ता परिवार इस क्षेत्र पर से अपनी दावेदारी छोड़ना नहीं चाहता है. ऐसे में रेशमी को परिवार से जोड़ा जा रहा है.

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