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तीन बार जांच के बाद भी नहीं निकला हल, अब भी बिना मानदेय काम कर रहे 452 पारा शिक्षक

Ranchi : पलामू जिला के दो प्रखंड के 452 पारा शिक्षक विभागीय पेंच के शिकार हुए हैं. बीते 15 माह से इन पारा शिक्षकों को मानदेय नहीं मिल रहा है. पारा शिक्षकों को मानदेय नहीं मिलने का मामला पलामू जिला के छतरपुर और नोउडीहा प्रखंड का है. दरअसल नियुक्ति गलत बताकर 2019 में ही स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने उन्हें सेवा मुक्त करने का निर्देश जारी किया था.

पारा शिक्षकों को कार्यमुक्त करने का मामला झारखंड विधानसभा में भी उठा था. जिसके बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए पांच विधायकों की कमेटी गठित की थी. विधायकों ने अपनी रिपोर्ट में फिर से एक बार जांच कराने और मानदेय का भुगतान करने की अनुशंसा पिछले वर्ष ही कर दी थी.

इसके बावजूद इन पारा शिक्षकों को अब तक न तो मानदेय का भुगतान हो सका है और ना ही जांच की कोई प्रक्रिया ही फिर से शुरू हो सकी है. व्यवस्था से तंग आकर अब 452 पारा शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 15 अगस्त को आत्मदाह करने की बात कही है.

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पारा शिक्षकों की नियुक्ति की तीन बार हो चुकी है जांच

ऐसा नहीं है कि पारा शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी का मामला केवल पलामू जिला में ही है. राज्य के पारा शिक्षकों की नियुक्ति में गड़बड़ी की कई जिलों से शिकायतें मिलती रही हैं. इसी आधार पर पलामू के नौडीहा और छतरपुर प्रखंड के पारा शिक्षकों की नियुक्ति की जांच की गयी थी. पलामू जिला के नियुक्ति मामले की जांच तीन बार की गयी है.

पहली जांच रिपोर्ट में जहां पारा शिक्षकों की नियुक्ति को सही नहीं पाया गया, वहीं दूसरी जांच रिपोर्ट में ऐसे पारा शिक्षकों की नियुक्ति अवैध ही पायी गयी थी. इसके बाद पिछले वर्ष उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में इसकी फिर से जांच की गयी, जिसमें उन्होंने जिन शिक्षकों के नियुक्ति के दस्तावेज प्रखंड या शिक्षक के पास नहीं मिले.

इस वजह से उन्हें अवैध घोषित किया था. साथ ही ऐसे शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की थी. विभाग ने कार्रवाई के लिए निर्देश भी जारी कर दिया था. लेकिन झारखंड विधानसभा के फैसले के बाद इसपर रोक लगा दी गयी. अन्य जिलों में पारा शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी कागजातों की जांच के मामले पर भी रोक लगा दी गयी थी. विधानसभा की 5 विधायकों की कमेटी ने पूरे मामले की फिर से एक बार तफ्तीश करने और उसके आधार पर अंतिम निर्णय लेने का सुझाव दिया था, जो अब तक नहीं हो सका है.

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कोरोना संक्रमण में भी कर रहे काम

बिना मानदेय के पारा शिक्षक काफी मुसीबत का सामना कर रहे हैं. जबकि कोरोना संक्रमण काल में भी पारा शिक्षकों से काम लिया जा रहा है. पारा शिक्षक संघ का कहना है कि सरकार अभिलंब ऐसे पारा शिक्षकों को बकाया मानदेय का भुगतान करें.

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