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70 लाख की वसूली बाद भी विफल दिख रहे निगम के सभी अभियान ! VIP सड़क पर पड़ा है बिल्डिंग मैटेरियल

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Ranchi: स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 के परिणाम जारी हुए अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए है, कि रांची नगर निगम को 2019 के सर्वेक्षण के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसमें शहर में गंदगी फैलाने, बिल्डिंग मैटेरियल को सड़क पर रखने, घरों और दुकानों के बाहर डस्टबिन नहीं रखने, ओडीएफ, प्लास्टिक बैग का धड़ल्ले से प्रचलन होना है.

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सर्वेक्षण में अच्छी रैंक पाने के लिए निगम ने उपरोक्त सभी पहलूओं को ध्यान में रख कई अभियानों को शुरू किया था. इन अभियानों के तहत निगम अबतक करीब 70.38 लाख (अगस्त 2018 तक) की जुर्माना राशि वसूल कर चुका है. लेकिन स्थिति यह है कि निगम के इन अभियानों का आम जन पर कोई प्रभाव होता नहीं दिख रहा है. मालूम हो कि स्वच्छता सर्वेक्षण में राजधानी रांची को जहां 21वां स्थान मिला था. वहीं पूरे देश के राज्यों की राजधानी की स्वच्छता रैंकिंग में सिटीजन फीडबैक के मामले में रांची को सम्मानित किया गया था.

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अभियान बेअसर !

अगर वर्तमान में शहर की स्थिति को देखा जाए, तो आज भी शहर में कई इलाके ऐसे हैं, जहां बिल्डिंग रॉ-मैटेरियल सड़कों पर पड़ा हुआ है. कई सब्जी मार्केंट में लोग धड़ल्ले से प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं. सड़कों पर लगाए जाने वाले दुकानों और घरों के बाहर अबतक डस्टबिन नहीं रखा गया है. शहर के विभिन्न जगहों पर कूड़ा पड़ा है.

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किन-किन मामलों में निगम वसूल चूका है जुर्माना

मामला                           जुर्माने की राशि
बिल्डिंग मैटेरियल              2.73 लाख
डस्टबिन नॉट फाउंड         3.19 लाख
एनक्रोचमेंट                      1.90 लाख
ई-रिक्शा रूट                   16.67 लाख
इनलिगल होर्डिंग, पोस्टर, बैनर 10.47 लाख
लिटर्इंग                            7.76 लाख
नो पार्किंग                         2.28 लाख
ओडीएफ                          78,500 रूपये
ओपेन यूरिनेशन                  32,800 रूपये
प्लास्टिक कैरी बैग               7.70 लाख
अन्य                                16.54 लाख

हरमू रोड पर पड़ा बिल्डिंग मैटेरियल

बात अगर केवल वीआईपी रोड माने जाने वाले हरमू रोड की करें, तो कई जगह निर्माण कार्य में लगने वाले बिल्डिंग रॉ-मैटेरियल सड़क पर पड़े हुए हैं. प्रतिदिन इस रोड से निगम के कई अधिकारियों का आना-जाना होता रहता है, लेकिन किसी भी अधिकारियों को इसकी तनिक भी परवाह नहीं है.

प्लास्टिक का धड़ल्ले से हो रहा उपयोग

इसी तरह निगम के अधिकारियों ने पिछले कई दिनों से प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है. इसके बावजूद शहर में कई सब्जी मार्केट ऐसे हैं, जहां आज भी विक्रेता और क्रेता प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं. ऐसी स्थिति मेन रोड स्थित डेली मार्केट में सुबह के वक्त देखने को मिल जाती है.

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बड़े दुकानदार हैं पहुंच से दूर

अभियान में शामिल रह चुके निगम सूत्रों का कहना है कि प्लास्टिक को लेकर शहर के विभिन्न इलाकों में निगम अभियान चलाया जा चुका है. लगभग 7.70 लाख की वसूली भी की गयी. लेकिन इसका फायदा होता नहीं दिख रहा है. इसके पीछे का कारण यह है कि निगम ने अभियान छोटे-छोटे दुकानदारों तक ही चलाया है. जबकि प्लास्टिक बनाने वाले बड़े दुकानदार निगम की पहुंच से बाहर हैं.

निगम क्षेत्र में नहीं रखते लोग डस्टबिन

शहर को साफ रखने के लिए और कूड़े को अलग करने के लिए रांची शहर में नीले और हरे रंग के डस्टबिन रखने के निर्देश दिये गये थे. इसपर निगम ने जुर्माना लगाने की बात कही थी. ऐसा नहीं करने पर निगम अगस्त 2018 तक करीब 3 लाख तक का जुर्माना वसूला चुका है. लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि आज भी शहर के कई इलाके के घरों या दुकानों के बाहर ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकी है.

सफाई व्यवस्था पर प्रतिदिन होती है चर्चा

सबसे विचित्र स्थिति तो सड़क पर पड़े कूड़े की है. आज निगम के कई पार्षद शहर में फैली गंदगी के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं. उनका प्रदर्शन सफाई व्यवस्था संभाल रही, रांची एमएसडब्ल्यू कंपनी के खिलाफ है. इन पार्षदों को कहना है कि कंपनी सफाई कार्य में पूरी तरह से असफल है. लेकिन कुछ अधिकारियों के मिलीभगत के कारण कंपनी के कार्यों का विस्तार किया जा रहा है.

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