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न्यूज विंग की खबर के बाद टीडीएस घोटाले के मुख्य आरोपी उमेश कुमार को पद से हटाया, जीएम एचआर पर कार्मिक चुप

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: 25 जून को न्यूज विंग ने जेएसईबी में 15 करोड़ के टीडीएस घोटाले की खबर छपी थी. 19 जुलाई को मॉनसून सत्र के दौरान निरसा विधायक अरूप चटर्जी यह मुद्दा विधानसभा सत्र के दौरान उठाया. विधायक के सवाल के जवाब में विभाग ने लिखा कि 2009-10 में आठ कंपनियों ने बिल भुगतान लिया, लेकिन उसके एवज में टीडीएस नहीं भरा. इनकम टैक्स ने जब इस बाबत सवाल करना शुरू किया तो कर्ज के पैसे से इनकम टैक्स को विभाग ने टीडीएस दिया. इनकम टैक्स को तो अपना टीडीएस मिल गया. लेकिन विभाग को 15 करोड़ का घाटा हुआ. 2009-10 से अब-तक इस राशि पर ब्याज विभाग को मिलता वो घाटा अलग. इस मामले पर अब जा कर आठ साल के बाद कार्रवाई हुई है.

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वित्त नियंत्रतक उमेश कुमार को पद से हटाया

झारखंड राज्य बिजली बोर्ड में वर्ष 2009-10 में 15 करोड़ के टीडीएस घोटाले मामले में जेबीवीएनएल ने कार्रवाई की है. टीडीएस घोटाले के आरोपी माने जा रहे वित्त नियंत्रक उमेश कुमार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा लिया गया है. उमेश कुमार के सारे वित्तीय अधिकार और प्रोजेक्ट के काम वापस ले लिए गए हैं. बताते चलें कि उमेश कुमार टीडीएस घोटाले के वक्त डायरेक्टर फाइनेंस थे. उमेश कुमार शुरु से ही जेएसईबी में एक विवादित नाम रहे हैं. 30 जुलाई 2015 को उमेश कुमार के प्रमोशन पर भी एजी के ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए थे. 09 फरवरी 2017 को होल्डिंग कंपनी के सीएमडी आरके श्रीवास्तव ने पूरे मामले के जांच के आदेश दिए थे. 12 फरवरी 2015 से जेबीवीएनएल के एमडी के पद पर राहुल पुरवार हैं. लेकिन अब तक ना तो जांच हुई थी और ना कोई कार्रवाई. विभाग ने अब कार्रवाई करते हुए उमेश कुमार की जगह फाइनेंस कंट्रोलर की जवाबदेही डीजीएम प्रमोद कुमार को दे दी गई है. प्रमोद कुमार को जीएम प्रोजेक्ट एंड फाइनेंस का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. साथ ही वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं. वहीं उमेश कुमार को अब जीएम एकाउंट एंड रेवेन्यू का काम दिया गया है.

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लेकिन जीएम एचआर पर आरोप पत्र गठित होने के बावजूद कार्मिक चुप

2017 में सीएमडी आरके श्रीवास्तव ने पूरे मामले में जांच का आदेश निकाला. उन्होंने जेबीवीएनएल एमडी राहुल कुमार पुरवार और जीएम एचआर को 09 फरवरी 2017 को एक चिट्ठी लिखी. उन्होंने एमडी राहुल कुमार पुरवार को निर्देश दिया कि इस मामले की जांच आईजी विजिलेंस की टीम बनाकर की जाये. सीएमडी ने संचरण और वितरण, दोनों बोर्ड के निदेशक, जीएम एचआर को भी इस बारे में चिट्ठी जारी की थी, लेकिन किसी ने इस मामले की जांच करने के लिए अब तक किसी तरह की कोई कमिटी नहीं बनायी. वर्तमान ऊर्जा सचिव ने मामले में जेबीवीएनएल के एचआर राजीव रंजन कुमार के खिलाफ पपत्र ‘क’ यानि आरोप पत्र गठित किया. आरोप पत्र के गठन के बाद अब कार्मिक को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी है. लेकिन तीन महीने के बाद भी कार्मिक ने किसी तरह की कोई कार्रवाई राजीव रंजन कुमार के खिलाफ नहीं की है. कार्रवाई में हो रही देरी फिर से मामले पर कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है.

लोहरदगा में भी राजीव रंजन के खिलाफ हुआ था आरोप पत्र गठित

जीएम एचआर राजीव रंजन कुमार जेबीवीएनएल से पहले लोहरदग्गा में पदास्थापित थे. वहां भी एक मामले को लेकर उनके खिलाफ पपत्र गठित हुआ था. बावजूद इसके उनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई. विभागीय कार्रवाई करने के बजाय उन्हें जेबीवीएनएल में प्रमोशन दे दिया गया. प्रमोशन देने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गयी. अगर उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित होने के बाद समय पर कार्रवाई हो जाती तो उन्हें प्रमोशन नहीं मिलता. वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर से आरोप पत्र गठित होने के बाद फिर से कार्मिक की चुप्पी कई ओर इशारा कर रही है.

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