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सरकार की नीतियों के खिलाफ चेंबर की होर्डिंगबाजी के बाद अब सोशल मीडिया वार शुरू 

Ranchi: फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा कांके रोड पर सरकार की नीतियों के खिलाफ एक होर्डिंग लगाये जाने के बाद अब सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी बहस बाजी हो रही है. Jharkhand Civil Society फेसबुक पर इस लड़ाई को साफ तौर से देखा जा सकता है. Jharkhand Civil Society के पेज पर अपने आप को आरएसएस के मेम्बर कहनेवाले राहुल चौधरी ने सबसे पहले बहस छेड़ी. उन्होंने अपने Jharkhand Civil Society के वॉल पर लिखा कि“झारखंड चेम्बर के अध्यक्ष दीपक मारू इन दिनों झामुमो के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं. बेचारे चेम्बर और व्यापारियों का तो भला कर नहीं पाये अब झामुमो का भला करने चले हैं. चेम्बर का सालाना जलसा चुनाव आनेवाला है. 2500-3000 सदस्यों वाला भारत का सबसे बड़ा संगठन झारखंड चेम्बर को साल में एक बार सामूहिक दिखावा का मौक़ा मिलता है. अब तक के सबसे फ़्लॉप अध्यक्ष दीपक मारू का चुनाव के पहले फ़ज़ीहत होना तय माना जा रहा है. ये और कोई नहीं व्यापारी ही करेंगे क्योंकि सभी झामुमो के एजेंट नहीं हैं. साथ ही उनसे पूछेंगे आख़िर उन डींगों का क्या हुआ जो चुनाव लड़ते हुए हांका था.

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इस पोस्ट के बाद सबसे पहले आरपी शाही ने एक लंबा-चौड़ा जवाब दिया उन्होंने कहा कि “अगर झारखण्ड के यूथ फॉर चेंज के सचिव ऐसी टिपण्णी करते हैं तब तो झारखण्ड के बारे में क्या सोचा जाये. क्या आपको नहीं पता है कि आपके मित्रों के लिस्ट से ही कई लोग जो भाजपा में पद लिए हुए हैं वे चेंबर के चुनाव में अध्यक्ष और पदाधिकारी के प्रत्याशी भी हैं और वर्तमान अध्यक्ष ही उनका प्रचार भी कर रहे हैं. अब अगर भाजपा के पदाधिकारियों के लिए आपके कथनानुसार झामुको के समर्थक वर्तमान अध्यक्ष सत्ता पर बैठा रहे हैं, तो यह कुछ अजीब लग रहा है. चेंबर या किसी भी व्यापारिक संस्था से सरकार बात नहीं कर कोई बड़ा काम नहीं कर रही है, यह पतन की दिशा में एक कदम है. जिन लोगों ने स्वरोजगार किया, रोजगार सृजन किया, टैक्स देकर अर्थव्यवस्था मजबूत की उनको अगर सम्मान नहीं दे सकते तो उन पर छींटाकशी न करें. उसे टैक्स के पैसों पर यह स्वयं को मजदूर और सेवक बोलने वाले घमंड से चूर जनता दरबार लगा कर अपने को पुराने ज़माने का राजा समझ बैठते हैं. आपको व्यापारियों के टैक्स की चोरी दिख रही है, क्या बात है? लेकिन वह तो जिस काम के लिये टैक्स देता है उसे उन पैसों पर जो सुविधा मिलनी चाहिए वह कौन देगा? भगवान? राजधानी में पीने का पानी नहीं, ठीक से बिजली नहीं, नाली, सड़क, कूड़ा उठाव सभी काम कैसे हो रहा है? क्या आपको पता है कि व्यापारी और उद्यमी ही ऐसा वर्ग है जो सरकार से कुछ नहीं मांगता और पाता? यहां तक कि इज्जत भी नहीं. उन्हीं के टैक्स के पैसों पर पलने वाले अधिकारी, कर्मचारी, मंत्री, विधायक, सांसद उनको तंग करने व घूस लेने के लिए दबाव बनाये रहते हैं? आप व्यापारियों के टैक्स चोरी की बात करते हैं, अगर सरकारी तंत्र ईमानदार हो तो शायद ही कोई व्यापारी टैक्स चोरी करेगा? जो करते हैं वे अधिकतर घूस मांगने वालों के लिए करते होंगे. वैसे अगर आप देखें तो व्यापारियों की चोरी रोकने के लिए पूरी की पूरी फौज ही लगा रखी है जिसका वेतन भी उन्हीं के टैक्स से दिया जाता है. अगर आप व्यापारियों के चोरी की बात करते हैं तो पहले उन निकम्मों पर ध्यान दिजिए जो सातवें पे कमीशन का वेतन और सभी सुख सुविधा लेकर घूस के लिए दिन रात एक कर रहे हैं ? यथार्थ पर आईये, अगर आपको जनता के द्वारा बहुमत से चुने गये प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री पसंद हैं और उनकी अक्षमता पर कुछ नहीं कहना चाहते तो चेम्बर का अध्यक्ष भी सर्वसम्मति से चुन कर आता है, उन वोटों का सम्मान करें. और उम्मीद है आप अपने उन मित्रों से जो सत्ता दल में कुछ पदाधिकारी हैं उन्हें सलाह देंगे कि चेम्बर के चुनाव में न आयें और राजनीति के दलों को व्यापारिक संगठनों में न लायें. आशा है, मेरी सलाह को अन्यथा नहीं लेंगे.”

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इसके बाद कुछ और लोगों ने भी इस पोस्ट पर कमेंट किया. बता दें कि इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी व्हाट्सएप के कई ग्रुप में वायरल है.

राहुल चौधरी ने दोबारा से वॉल पर पोस्ट किया और लिखा कि “चेम्बर अध्यक्ष दीपक मारू जी कभी उन व्यापारियों के बारे में क्यों नहीं बोलते जो टैक्स की चोरी करते हैं. बिजली की चोरी से अपना प्लांट चलाते हैं. बैंक का लोन नहीं चुकाते हैं. अपने कर्मचारियों का हक़ मारते हैं और उनका शोषण करते हैं. प्रदूषण करनेवाले उद्योगों पर कारवाई की मांग क्यों नहीं करते. पहले ख़ुद तो सुधरिये तब दूसरों पर ऊंगली उठाइयेगा. ये बात सही है कि आपलोगों पर पहली बार क़ानून का डंडा चलना शुरू हुआ है. ऐसे में दर्द स्वाभाविक है …..” इस पोस्ट पर खबर लिखे जाने तक किसी तरह का कोई कमेंट नहीं आया था.

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