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हाई कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस विभाग ने तय की कांडों की जांच और अनुसंधान की समय सीमा

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Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट ने राजनगर थाना के एक लंबित मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग को कड़ी फटकार लगायी है. अदालत ने राजनगर थाना कांड संख्या 33/2000 के अत्यधिक दिनों से लंबित रहने पर नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट की फटकार के बाद डीजीपी झारखंड की ओर से पुलिस विभाग के सभी वरीय महकमों के लिए आदेश जारी किया गया है. इस आदेश पत्र को झारखंड के पुलिस के सभी वरीय पदाधिकारियों को भेजा गया है.

आदेश में कहा गया है कि संबंधित कांड के लंबित रहने के कारणों की समीक्षा की गयी. इस समीक्षा में पाया गया कि पुलिस विभाग के द्वारा संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया. इसके साथ ही विलंब होने का मुख्य कारण नियमित तौर पर कारगर समीक्षा नहीं किया जाना और इस दौरान निर्देशों का पालन का अभाव है. पुलिस विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि भविष्य में इस तरह का मामला सामने न आये और बहुत दिनों से लंबित कांडों का चरणबद्ध तरीके से निष्पादन हो सके.

आदेश पत्र में कहा गया है कि अत्यधिक दिनों से लंबित कांडों की नियमित समीक्षा कर अनुसंधानकर्ता को कांडों का अनुसंधान पूर्ण करने के लिए स्पष्ट और कारगर लिखित निर्देश जारी किये जायें. इसके लिए विभिन्न स्तरों पर कांडों की नियमित समीक्षा निर्धारित समय सीमा में अवश्य की जाये. इसके लिए समीक्षा की एक निश्चित समय सीमा तय कर दी गयी है.

  • 10 साल से अधिक समय से लंबित कांड को पुलिस उपाधीक्षक के द्वारा प्रत्येक सप्ताह के बुधवार को समीक्षा की जाये. पुलिस अधीक्षक के द्वारा लबित कांडों की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह के शनिवार को किया जाये और पुलिस उपमहानिरीक्षक के द्वारा हर 10 दिनों पर लंबित कांड की समीक्षा की जाये.
  • 5 साल से अधिक समय से लंबित कांड की समीक्षा पुलिस उपाध्यक्ष के द्वारा प्रत्येक सप्ताह के मंगलवार को की जाये,पुलिस अधीक्षक के द्वारा प्रत्येक सप्ताह के शुक्रवार को की जाये और पुलिस उपमहानिरीक्षक के द्वारा लंबित कांडों की समीक्षा हर 15 दिनों पर किया जाये.
  • 3 साल से अधिक समय से लंबित कांड की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह के सोमवार को पुलिस उपाध्यक्ष के द्वारा की जाये, प्रत्येक सप्ताह के गुरुवार को पुलिस अधीक्षक के द्वारा लंबित कांडों की समीक्षा की जाये और पुलिस उपमहानिरीक्षक के द्वारा हर 15 दिनों पर लंबित कांड की समीक्षा की जाये.
  • 2 से 3 साल तक के लंबित कांड की समीक्षा पुलिस उपाध्यक्ष के द्वारा प्रत्येक सप्ताह, पुलिस अधीक्षक के द्वारा प्रत्येक 15 दिन में और पुलिस उपमहानिरीक्षक के द्वारा प्रत्येक माह किया जाये.

अनुसंधान पूर्ण करने की तय की गयी समय सीमा

  • 5 सालों से अधिक पुराने कांड को जनवरी 2019 तक अनुसंधान पूर्ण करने की समय सीमा तय की गयी है.
  • 3 से 5 साल के बीच लंबित कांड को जून 2019 तक अनुसंधान पूर्ण करने की समय सीमा तय की गयी है.
  • 2 से 3 साल के बीच लंबित कांड को सितंबर 2019 तक अनुसंधान पूर्ण करने की तिथि तय की गयी है.

पुलिस अधिकारियों को अपने अधीनस्थ थानों का निरीक्षण करने का आदेश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी पुलिस निरीक्षक तथा सभी पुलिस उपाधीक्षक पुलिस मैनुअल में वर्णित अंतराल पर अपने अधीनस्थ थानों का निरीक्षण अवश्य करेंगे. निरीक्षण के क्रम में पुलिस निरीक्षक तथा पुलिस उपाधीक्षक स्तर के पदाधिकारी 1 वर्ष से अधिक समय से लंबित कांडों के अनुसंधान की समीक्षा अवश्य करेंगे और इसकी समीक्षा टिप्पणी को भी अपने निरीक्षण टिप्पणी का भाग बनाएंगे. समीक्षा टिप्पणी से यह स्पष्ट होना चाहिए कि कांड किन कारणों से इतने दिनों से लंबित रहा. इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं? साथ ही इनके ससमय निष्पादन के लिए क्या कार्रवाई की जानी है. यह दिशा-निर्देश भी होना चाहिए.

दो सालों से लंबित कांड के अनुसंधान की समीक्षा की जाये

आदेश में कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक भी निरीक्षण के क्रम में 2 साल से अधिक समय से लंबित कांडों की अनुसंधान की समीक्षा अवश्य करें. इसमें लंबे समय तक कांडों का अनुसंधान लंबित रहने के लिए जिम्मेदारी तय की जाये. संबंधित कांड के निष्पादन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किये जायें.

पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा है कि पदाधिकारियों के वार्षिक गोपनीय चरित्र अभियुक्ति के आलेखन के समय उनके श्रेणी करण का एक मुख्य आधार उक्त बिंदुओं पर की गयी कार्रवाई होनी चाहिए. इसे ध्यान में रखते हुए हैं वा. गो.च.अभि./ए.पी.ए.आर. के आलेखन की कार्रवाई की जाये.

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