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फसल कटाई के बाद अब रोजगार का संकट, ग्रामीण क्षेत्रों में तेज होगा मानव तस्करी का धंधा

मानव तस्कर मंडरा रहे गांवों में, असुरक्षित पलायन का खतरा बढ़ा

Ranchi : राज्य के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर स्थानों पर धान की फसल कट चुकी है. पिछले कुछ समय से खेती में लगे ग्रामीणों के पास अब गांव में ज्यादा कुछ करने को नहीं है. ऐसे में इन इलाकों में लोगों के पास रोजगार का संकट हो गया है. ऐसे में बहुत से लोग रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने लगे हैं. वहीं इन इलाकों में मानव तस्करी का धंधा करनेवाले लोगों के एजेंट भी सक्रिय हो गये हैं.

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बहुत कम इलाकों में होती है एक से अधिक फसल

झारखंड में बहुत कम इलाके ही ऐसे हैं जहां एक से ज्यादा फसलें उपजायी जाती हैं. वहीं सब्जी की खेती भी बहुत कम लोग ही करते हैं. इस वजह से खेती पर आश्रित ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का संकट हो गया है. बड़ी आबादी अब आनेवाले कुछ महीने के लिए आजीविका के दूसरे साधनों मजदूरी या शहरों में दूसरे छोटे मोटे कामों के लिए पलायन करते हैं.

ईट भट्ठों में काम करने जाते हैं लोग

बहुत सारे लोग बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के ईट भट्ठों में काम करने जाते हैं. उन्हीं के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की किशोरियां युवतियां भी घरेलू काम और ऐसे ही दूसरे कामों के लिए बाहर निकलना चाहती हैं. यह ऐसा समय है जब इस परिस्थिति का फायदा उठाकर दलाल किस्म के लोग ग्रामीण इलाकों में मंडरा रहे हैं. यहां मानव तस्करी का खतरा भी बढ़ रहा है.

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अभी हाल में पचास से अधिक बच्चों को छुड़ाया गया है

मानव तस्करी के क्षेत्र में काम करनेवासी संस्था बाल कल्याण संघ के सचिव संजय मिश्रा बताते हैं कि यह सही है कि नवंबर-दिसंबर में ग्रामीण इलाकों में पलायन बढ़ता है. कई जगह पर लोग परिवार के साथ काम करने के लिए निकल जाते हैं. अब तो दलाल बस और छोटे वाहनों से गांवों तक पहुंच रहे हैं. कई लोग खासकर किशोरियां और युवतियां उनके बहकावे में आ जाती हैं. सिमडेगा में तीन दिसंबर को पचास से अधिक बच्चियों को कोयंबटूर ले जाने का मामला इसी की बानगी है. इस मामले में कंपनी की एचआर हेड को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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नहीं होता है किसी तरह का रजिस्ट्रेशन

सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रयासों से यह व्यवस्था की गयी थी कि रोजगार के लिए बाहर जानेवाले लोगों का रजिस्ट्रेशन हो सके. इससे यह फायदा होता कि सेफ माइग्रेशन (सुरक्षित पलायन) को बढ़ावा मिलता. दूसरी ओर से एक आंकड़ा भी रहता कि किस गांव से कितने लोगों ने पलायन किया है. पर इस कार्य को कभी मूर्त्त रूप नहीं दिया जा सका. लोगों का रजिस्ट्रेशन पंचायत स्तर पर होना था वह भी कभी नहीं हो पाया.

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खूंटी में लोगों को जोड़ा जा रहा है सरकारी योजनाओं से

इन सबके बीच राहत भरी बात यह है कि खूंटी के मुरहू सहित कई क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से लोगों को मनरेगा, विधवा पेंशन सहित अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है. इस पहल का उद्देश्य है कि लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनको सशक्त बनाया जाये. इसी के साथ जागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे हैं. इससे लोगों के बीच जागरूकता बढ़ी है. हालांकि अभी भी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पलायन भी हो रहा है और ट्रैफिकिंग भी हो रहा है. जब तक गांवों या पंचायतों के स्तर पर रोजगार का सृजन नहीं होगा तब तक यह समस्याएं रहेंगी.

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