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#Article 370 हटने के बाद पहली बार 11-12 अक्टूबर को भारत आ रहे चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग

कश्मीर मसले पर दौरे से पहले चीन के बदले सुर

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Beijing: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारत आ रहे हैं. 11-12 अक्टूबर को वो भारत दौरे पर रहेंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता करेंगे.

इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे. दोनों नेता क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार विमर्श करेंगे.

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11-12 अक्टूबर को अनौपचारिक शिखर वार्ता

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बुधवार को घोषणा की कि शी और मोदी के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता चेन्नई के समीप प्राचीन तटीय शहर मामल्लापुरम में 11 और 12 अक्टूबर को होगी.

इसके बाद शी 13 अक्टूबर को नेपाल की राजकीय यात्रा पर जाएंगे. नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगामी अनौपचारिक शिखर सम्मेलन एक ऐसा अवसर होगा, जब दोनों नेता द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के अत्यंक आवश्यक मुद्दों पर अपनी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे.

मोदी और शी के बीच पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता चीन के वुहान में अप्रैल 2018 में हुई थी. उसके कुछ महीने पहले ही डोकलाम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 73 दिनों तक गतिरोध रहा था.

दौरे से पहले बदले चीन के सुर

शी के भारत दौरे की घोषणा ऐसे वक्त की गई है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा चीन के दौरे पर हैं. खान मंगलवार को चीन पहुंचे हैं.

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उन्होंने प्रधानमंत्री ली केकियांग से मुलाकात की. बुधवार को राष्ट्रपति शी से उनके मुलाकात करने की उम्मीद है.

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इधर भारत दौरे से पहले कश्मीर मसले पर चीन के सुर बदले नजर आये. संयुक्त राष्ट्र में दिये अपने बयान से इतर चीन ने इसे भारत-पाकिस्तान का मसला बताया है.

चीन ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि कश्मीर के मुद्दे का समाधान भारत और पाकिस्तान को आपसी बातचीत से निकालना होगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग की टिप्पणी कश्मीर को लेकर चीन के हाल के रुख में आए उल्लेखनीय बदलाव को दिखाती है.

कश्मीर के दर्जे को लेकर भारत के फैसले के बारे में चीन ने छह अगस्त को अपनी पहली प्रतिक्रिया दी थी जिसमें चीन के विदेश मंत्रालय ने दो अलग बयान जारी किए थे.

एक बयान में चीन ने लद्दाख को पृथक केंद्र शासित प्रदेश बनाने के भारत के कदम का विरोध किया था और कहा था कि इस इलाके में बीजिंग अपना क्षेत्राधिकार जताता है.

दूसरे बयान में कहा था, ‘‘हम भारत और पाकिस्तान दोनों से कहते हैं कि वह बातचीत और सलाह मश्विरे के जरिए अपने विवाद शांतिपूर्ण ढंग से हल करें और क्षेत्र में शांति और स्थिरता को कायम रखें.’’

इस मायने में भारत-चीन संबंधों के जानकार चीन के राष्ट्रपति के भारत दौरे से पहले कश्मीर को लेकर चीन के रुख में आए बदलाव को उल्लेखनीय मान रहे हैं.

गौरतलब है कि भारत द्वारा पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा खत्म कर देने के बाद से नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच तनाव बढ़ गया है.

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