JharkhandRanchi

खनिज, व्यापार, सरकारी उपक्रम के बाद अब कृषि का निजीकरण कर रही केंद्र सरकार: आप

Ranchi: आम आदमी पार्टी की ओर से कृषि विधेयक का विरोध किया गया. इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध मार्च किया गया. रांची विश्वविद्यालय से फिरायालाल चौक तक एक रोड मार्च निकाला गया.

Jharkhand Rai

पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस दौरान कहा कि केन्द्र सरकार इस बिल के माध्यम से किसानों और उनके खेतों को पूंजीपतियों के हाथ में बेचना चाहती है. सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है. पूंजीपतियों को बढ़ावा देने के कारण कॉरपोरेट घरानों को उद्योग, व्यापार, खनिज से लेकर सरकारी उपक्रम बेच रही है. अब योजनाबद्ध तरीके से खेती और कृषि व्यापार पर भी कब्जा कर रही है. कारपोरेट्स को मालिकाना हक देने के लिए नीति और कानूनों में बदलाव की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है.

कार्यकर्ता अजय मेहता ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिये किसानों की संख्या आधी करना और धीरे-धीरे खेती में केवल 20 प्रतिशत किसान रखकर बाकी किसानों को खेती से बाहर करना केंद्र सरकार और नीति आयोग की घोषित नीति है.

इसे भी पढ़ें – 26 को आयोजित देश की पहली इंश्योरेंस अदालत में 9000 मामलों के निष्पादन की होगी कोशिश: जस्टिस एचसी मिश्रा

Samford

किसान कॉरपोरेट किसान बनेंगे या मजदूर बनेंगे

अजय ने कहा कि इस कानून के बाद 20 प्रतिशत किसान कॉरपोरेट किसान हो जायेंगे. वहीं बाकी किसान कॉरपोरेट्स के लिये मजदूरी करेंगे. फसलों का उत्पादन, भंडारण, प्रक्रिया उत्पाद, घरेलू बाजार और विश्व बाजार में खरीद, बिक्री,  आयात, निर्यात सभी काम यह बहुराष्ट्रीय कंपनियां करेगी.

भंडारण की वजह से काला बाजारी भी खूब चलेगी. किसानों के लिये तो फिलहाल की व्यवस्था भी लूट की व्यवस्था है. एक सर्वे के अनुसार आजादी के बाद से अब तक किसानों के आमदनी में सिर्फ 21 फीसदी का इजाफा हुआ. वहीं सरकारी कर्मचारियों के आमदनी में 180 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. जिसने किसानों को बदहाल करके रखा है.

कार्यकर्ताओं ने कहा कि कारॅपोरेट घरानों को लाभ देने के लिये केंद्र सरकार ने कई कानूनों में बदलाव किया. जिसमें जीवनावश्यक वस्तु अधिनियम, कृषि उपज वाणिज्य एवं बाजार अध्यादेश बनाये गये.

इसे भी पढ़ें – छठी जेपीएससी में सफल अभ्यर्थियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हाइकोर्ट ने दिया प्रतिवादी बनाने का निर्देश

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: