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महाराष्ट्र के बाद झारखंड में भी ममता बनर्जी के तीसरे मोर्चे की राजनीति पर लगा ग्रहण

Gyan Ranjan

Ranchi : देश की राजनीति में भाजपा के विकल्प के रूप में तीसरे मोर्चे के गठन की चाहत लेकर बंगाल से दिल्ली होते हुए महाराष्ट्र पहुंचीं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को कांग्रेस समर्थित राज्यों में झटका लगा है. पहले महाराष्ट्र में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रही शिव सेना ने ममता के सपने पर पानी फेर दिया है और अब झारखंड में पांव पसारने से पहले ही कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रही झामुमो ने ब्रेक लगा दिया है. माइनस कांग्रेस की राजनीति के सहारे भाजपा का विकल्प बनने की ममता बनर्जी की चाहत पर पूर्णिमा होने से पहले ही ग्रहण लगता दिख रहा है.

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भाजपा के खिलाफ विकल्प बनने की चाहत में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के निशाने पर उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस ही आ गयी है.

ममता बनर्जी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए गठबंधन पर ही सवाल खड़ा कर दिया है, लेकिन कांग्रेस के सहयोग से अपने-अपने प्रदेश में सरकार चला रहे क्षेत्रीय दलों ने ममता की चाहत पर पानी फेर दिया है.

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महाराष्ट्र में शिवसेना का रुख जहां ममता बनर्जी की राय से अलग है, वहीं झारखंड में शासन कर रहे झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस को लेकर उठाये गये सवाल पर कहा है कि तृणमूल स्वयं 2009 से यूपीए का अंग नहीं हैं. ऐसे में ममता बनर्जी के वक्तव्य का कोई औचित्य नहीं है.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि ममता बनर्जी को यूपीए को लेकर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है. कहा कि 12 साल पहले से ही ममता बनर्जी की राह अलग है.

उन्होंने कहा कि यूपीए में कांग्रेस मजबूत धड़ा है इसलिए कांग्रेस को अलग कर भाजपा के खिलाफ विकल्प की बात करना भी बेमानी होगी.

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बंगाल चुनाव में टीएमसी की मदद कर चुका है झामुमो

हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा के तृणमूल कांग्रेस संग बेहतर राजनीतिक ताल्लुकात रहे हैं. बंगाल विधानसभा के चुनाव में झारखंड से सटे जिलों से झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जब प्रत्याशियों को उतारने की पहल की तो ममता बनर्जी ने मदद मांगी.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने बंगाल में लगभग एक दर्जन सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रखी थी, लेकिन उन्होंने न सिर्फ निर्णय को टाल दिया, बल्कि आदिवासी बहुल इलाकों में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार अभियान चलाया.

इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा और तृणमूल कांग्रेस को लाभ पहुंचा. हालांकि इस विषय पर झामुमो की तरफ से यह कहा जाता रहा है कि बंगाल में भाजपा को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया गया था.

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पूर्व में ममता कर चुकी हैं झारखंड में अपनी पार्टी के विस्तार की कवायद

ममता बनर्जी झारखंड में तृणमूल कांग्रेस के विस्तार की कवायद पूर्व में कर चुकी हैं. उन्होंने हाशिये पर चल रहे कुछ राजनीतिक नेताओं के माध्यम से इसकी शुरूआत की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली.

मुखर आदिवासी नेता बंधु तिर्की ने भी तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था, रांची से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन वे साथ नहीं चल पाये.

बंधु तिर्की फिलहाल रांची से सटे मांडर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं और कांग्रेस ने उन्हें झारखंड प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप रखी है.

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