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महाराष्ट्र के बाद अब इस राज्य में ऑपरेशन लोटस की है तैयारी

Uday Chandra

New Delhi : महाराष्ट्र के बाद अब बीजेपी तेलंगाना में कमल खिलाने की तैयारी में है. इसके लिए ऑपरेशन कमल पर काम शुरू हो चुका है. खबर है कि टीआरएस और कांग्रेस के 14 विधायकों को बीजेपी ने अपने पाले में साध लिया है. इनमें टीआरएस विधायक कोमाती रेड्डी का नाम बीजेपी मुख्यालय के गलियारों में प्रमुखता से उछल रहा है.
इसके साथ ही एक और तेलंगाना के कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले में आदिवासियों के भूमि मुद्दों को हल करने के लिए लड़ रहे टीआरएस के एक और विधायक की भी बीजेपी से बातचीत हो चुकी है. वरंगल शहर के टीआरएस विधायक भी बीजेपी के संपर्क में बताये जा रहे हैं. वहीं एक एससी आरक्षित सीट से एक विधायक की भी बीजेपी के संपर्क में होने की चर्चा है. महबूबनगर जिले से एक लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव जीतने वाले टीआरएस के एक और विधायक भी बीजेपी के संपर्क में हैं.

उल्लेखनीय है कि, तेलंगाना में कुल 119 विधानसभा सीटें हैं जिनमें 18 एससी-आरक्षित और नौ एसटी-आरक्षित हैं. महबूबनगर जिले से एक लाख से अधिक मतों के अंतर से चुनाव जीतने वाले टीआरएस के एक और विधायक भी बीजेपी के रडार पर हैं.

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दरअसल, बीजेपी ऐसे विधायकों को साधने में लगी है जिनकी छवि साफ सुथरी है. बीजेपी अगर इन विधायकों को तोड़ने में सफल रही तो ये आसपास के दो से तीन निर्वाचन क्षेत्रों के कई स्थानीय नेताओं को भी अपने साथ जोड़ सकेंगे.

सूची में अगले राज्य के एससी-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से एक और विधायक हैं. एटाला राजेंद्र के करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाने वाला यह विधायक एटाला के टीआरएस से बाहर आने के बाद से ही बीजेपी के संपर्क में है.

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उत्तरी तेलंगाना इस विधायक के बारे में कहा जाता है कि वे टीआरएस से बहुत खुश नहीं हैं और पार्टी छोड़ने का विचार कर रहे हैं. इनके अलावा बीजेपी कांग्रेस के कुछ नेताओं को भी पटाने में जुटी है. इनमें से एक को पार्टी ने हाल ही कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है.

तेलंगाना में 2023 विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी को लग रहा है कि समय रहते माहौल का फायदा उठा लिया जाये.

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