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श्रम कानून के बाद अब किसानों को बर्बाद कर रही केंद्र सरकार,  महामारी के दौरान BJP कर रही मनमानी : वाम संगठन

श्रम कानून और कृषि विधेयक के विरोध में वाम श्रमिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन

Ranchi :  केंद्र सरकार जबरन कानूनों में बदलाव कर रही है. पहले श्रम कानून और अब किसानों को बर्बाद करने के लिए कानून लेकर आयी है. ऐसा कर केंद्र सरकार किसानों और मजदूरों को गुलाम बनाने की नीति बना रही है. ये बातें एटक के महासचिव पीके गांगूली ने कहीं. कानूनों में हो रहे बदलाव के विरोध में बुधवार को राज्य भर के वाम ट्रेड यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन किया. राज्य में देशव्यापी विरोध के समर्थन में प्रदर्शन किया गया.

ट्रेड यूनियनों और श्रमिक फेडरशनों की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रदर्शन आयोजित किया गया. गांगूली ने कहा कि किसानों को बर्बाद करने वाला कानून केंद्र सरकार ने जबरन पारित कराया. पहले से ही देश में बेरोजगारी, जबरन रिटायरमेंट, आर्थिक मंदी जैसी समस्याएं हैं. इसके बाद केंद्र सरकार कानूनों में बदलाव कर रही है. कोरोना आपदा के दौरान भाजपा सरकार ने मनमानी की है.

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आमजन की छोड़ कॉरपोरेट की सोच रही सरकार

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एक्टू के महासचिव शुभेंदू सेन ने कहा कि देश में बेरोजगारी, आर्थिक मंदी जैसी कई समस्याएं हैं. कोरोना काल ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को उजागर किया. इसके बाद भी केंद्र सरकार सरकारी तंत्र को मजबूत करने के बजाय कॉरपोरेट कंपनियों को बढ़ावा दे रही है. जिससे देश की आर्थिक स्थिति और भी बदतर हो जायेगी. कोरोना संकट से देश अभी उभरा नहीं है. इसके बाद भी सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है.

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राज्य के अलग अलग हिस्सों में किया गया विरोध

गांगूली ने बताया कि कानूनों में बदलाव का विरोध राज्य के अलग अलग हिस्सों में किया गया. इसमें धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, गिरीडीह, हजारीबाग, रामगढ, लोहरदगा, पलामू, पाकुड़, साहेबगंज, गोड्डा, सिमडेगा, गुमला और सरायकेला खरसावां जिले के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों और कर्मचारियों ने भी विरोध प्रदर्शन किया.

साथ ही बैंक, बीमा सेक्टर, रेलवे, पेट्रोलियम, दूरसंचार, फार्मा, ट्रांसपोर्ट, निर्माण, बीड़ी और पत्थर उधोग के कामगारों, परियोजना कर्मियों, मिड डे मील वर्कर, आंगनवाड़ी व सहिया समेत अन्य लोग भी इस विरोध में शामिल हुए.

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