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जूली संग लिव इन के बाद लव गुरु मटुकनाथ करेंगे शादी, नयी प्रेमिका की तलाश

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Patna: लव गुरु के नाम से चर्चित मटुकनाथ चौधरी रिटायरमेंट के बाद अब शादी करने की सोच रहे हैं.  पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज में हिंदी विभाग के प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी बुधवार (31 अक्‍टूबर 2018) को रिटायर हो रहे हैं. इस रिटायरमेंट पर उन्‍होंने अपने फेसबुक पोस्‍ट पर अपनी इच्‍छा जाहिर की है.  उन्‍होंने अपने रिटायरमेंट के दिन को स्‍वाधीनता दिवस बताया है. 30 साल छोटी स्‍टूडेंट जूली के साथ लिव-इन में रहे प्रोफेसर मटुकनाथ अब एक कन्‍या तलाश रहे हैं, ताकि शादी की जा सके. वह 2006 में अपनी स्‍टूडेंट जूली के साथ लिव-इन में रहने के चलते सुर्खियों में आये थे. उन्‍होंने अपनी पत्‍नी तक को छोड़ दिया था, लेकिन अब जूली उनके साथ नहीं है.

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मैं किसी स्‍त्री को ना नहीं कह सकता

पत्नी को छोड़ने के सवाल पर मटुकनाथ कहना है कि ‘मैंने उसके साथ कोई ज्‍यादती नहीं की. मैंने सिर्फ प्रेम किया है. मटुकनाथ कहते हैं-मेरे जीवन में प्रेमिकायें अनंत हैं. मैं किसी स्त्री को इंकार नहीं कर सकता कि वह मेरी प्रेमिका न बने. यह मेरे लिए संभव नहीं है.

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फेसबुक पर लिखा- चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी

मैं 65 वर्ष का लरिका हूं. मेरी जवानी ने अभी अंगड़ाई ली है. मेरे अंग-अंग से यौवन की उमंग छलक रही है. जब मैं मस्त होकर तेज चलता हूं तो लोग नजर लगाते हैं. दौड़ता हूं तो दांतों तले उंगली दबाते हैं—
अब हम कैसे चलीं डगरिया
लोगवा नजर लगावेला.
मेरी खुशनसीबी कि इस चढ़ती जवानी में रिटायर हो रहा हूं. लोग पूछते हैं कि रिटायरमेंट के बाद क्या कीजिएगा?
चढ़ती जवानी में जो किया जाता है, वही करूंगा.
मतलब?

मतलब मैं ब्‍याह करूंगा
मटुकनाथ आगे लिखते हैं- मतलब मैं ब्‍याह करूंगा

मतलब यह कि मैं ब्याह करूंगा. बरतुहार बहुत तंग कर रहे हैं. उनकी आवाजाही बढ़ गई है. लेकिन, मैं एक अनुशासित, शर्मीला और प्रेमी लरिका हूं. इसलिए खुद बरतुहार से बात नहीं करता हूं। उन्हें गार्जियन के पास भेज देता हूं. मेरे विद्यार्थी ही मेरे गार्जियन हैं. वे जो तय कर देंगे, आंख मूंदकर मानूँगा. उनसे बड़ा हितैषी मेरा कोई नहीं हो सकता. हंसी-मजाक छोड़िए। बताइये कि रिटायरमेंट के बाद क्या योजना है? क्योंकि आप जो योजना बनाते हैं, उसे पूरा करके ही दम मारते हैं.

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अब योजना नहीं बनाते हैं लव गुरु मटुकनाथ

विदा हुआ वह मटुकनाथ जो योजना बनाता था और उसे पूरा करने में लहू सुखाता था. अब हम केवल मस्ती करेगा. सबसे पहले हम ब्याह करेगा. इसलिए आपलोगों का दायित्व है कि एक सुटेबल कन्या से मेरा ब्याह कराइये, फिर मेरी चाल देखिये. विवाह के पहले कुछ नहीं करने का. कुछ नहीं सोचने का. आज मेरा रिटायरमेंट डे है. वास्तव में यह मेरा स्वाधीनता दिवस है. व्यर्थ के कार्यों से मुक्ति मिलने का आनंद मेरी रगों में दौड़ रहा है. विश्वविद्यालय के क्लास बकवास हैं. विद्यार्थियों की प्रतिभा कुंद करने के सिवा वहां कोई रचनात्मक काम संभव नहीं. खुशी इस बात की है कि इस हिंसात्मक शिक्षा में जुटे रहने की बाध्यता से मुक्ति मिल रही है. अब मैं जिस दिशा में कदम रखूंगा, वह वास्तविक शिक्षा होगी. किंतु, मैं कोई योजना बनाकर उसे पूरा करने के तनाव में नहीं पड़ूंगा. मन की तरंग पर सवार होकर उड़ूंगा. अस्तित्व जो करवाना चाहेगा, उसी की इच्छा में अपनी इच्छा को लय करूंगा.
आत्म-सुख मेरी प्राथमिकता होगी. मेरी समझ है कि केवल सुखी व्यक्ति दूसरों को सुख पहुंचाने में सहायक हो सकता है. समाज, देश और दुनिया को बदलने का नारा विशुद्ध धोखा है.

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मटुकनाथ ने जूली को मुक्‍त कर दिया

प्रोफेसर मटुकनाथ के साथ लिव इन में रहीं प्रेमिका जूली अब उन्‍हें छोड़कर चली गयी हैं, लेकिन मटुकनाथ का कहना है कि जूली उनसे दूर नहीं गयीं, उनके दिल में ही रहती हैं. बीएचयू और जेएनयू जैसी प्रतिष्ठित संस्‍थानों में पढ़ चुकी जूली को मटुकनाथ के के साथ एक वक्‍त तक रहने के बाद अध्यात्म की ओर मुड़ गयीं. जूली ने पुड्डुचेरी, ऋषिकेश, पुणे के ओशो आश्रम में समय बिताना शुरू कर दिया. मटुकनाथ बताते हैं कि जूली जब-जब वह पटना आतीं तो कुछ दिन के लिए उनके पास ही रहतीं. फिर वह फुलटाइम अध्यात्म की शरण में चली गयीं. मटुकनाथ ने बताया कि वह शांति की खोज के लिए जूली को मुक्त करना चाहते थे.

मटुकनाथ की नजर में प्‍यार की परिभाषा

मटुकनाथ मानते हैं कि प्रेम का संबंध टिकाऊपन से बिल्कुल नहीं है. प्रेम का संबंध संवेदनशीलता से है. प्रेम तीन तल में रहता है. पहला- शरीर का तल है, जिसमें विवाह हो जाता है और वह टिकाऊ हो सकता है, लेकिन वास्तव में प्रेम नहीं है. दूसरा मन के तल का प्रेम है, मन चंचल है, ऐसे में प्रेम का भरोसा नहीं. तीसरा- प्रेम हार्दिक होता है, जिसका संबंध करुणा से होता है. यह प्रेम कभी खत्‍म नहीं होता.

 

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