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चार साल बाद भी खड़ा नहीं हो पाया बिजली कंपनियों का संगठनात्मक ढांचा, अफसरों और इंजीनियरों के पद नाम भी नहीं बदले

मई 2015 में पावर फाइनांस कॉरपोरेशन से तैयार की थी रिपोर्ट, इसी के आधार पर खड़ा करना था चारों कंपनियों का संगठनात्मक ढांचा

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Ranchi : बिजली बोर्ड के बंटवारे के  बाद बनी चारों कंपनियां झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा संचरण लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा उत्पादन लिमिटेड और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का संगठनात्मक ढ़ांचा चार साल बाद भी खड़ा नहीं हो पाया है. चारों कंपनियों के बेहतर संचालन के लिए पावर फाइनांश कॉरपोरेशन ने मई 2015 में रिपोर्ट तैयार की थी. इसके आधार पर चारों कंपनियों को अपना ढ़ांचा खड़ा करना था.  साथ ही अफसरों और इंजीनियरों के पदनाम भी बदले जाने थे. लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है. तीन कंपनियों वितरण निगम, संचरण निगम और उत्पादन निगम में निदेशक फाइनांस भी नहीं हैं.

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ऐसा होता अफसरों और इंजीनियरों का पदनाम

पीएफसी की रिपोर्ट के अनुसार इंजीनियर इन चीफ का पदनाम ईडी होता.  चीफ इंजीनियर व एडिशनल चीफ इंजीनियर जेनरल मैनेजर के नाम से जाने जाते. अधीक्षण अभियंता डीजीएम, कार्यपालक अभियंता सीनियर मैनेजर, सहायक अभियंता असिस्टेंट मैनेजर के नाम से जाने जाते.  वहीं जूनियर इंजीनियर का पदनाम जूनियर एक्जीक्यूटिव दिया गया था.  फोरमैन, लाइन मैनस ऑपरेटर, टेक्नीशियन, स्टोरकीपर असिस्टेंट के नाम से जाने जाते.  लेकिन अबतक इन अफसरों व कर्मियों का पदनाम नहीं बदल पाया है। पुराने पदनाम से ही व्यवस्था चल रही है.

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ऊर्जा विकास निगम के लिए ऐसी थी संरचना

ऊर्जा विकास निगम के लिए सीएमडी के बाद डायरेक्टर फाइनांश, चीफ विजिलेंस आफिसर, कंपनी सेक्रेट्री, डायरेक्टर एचआर, जीएम फाइनांस, जीएम टेक्निकल और जीएम एचआर व प्रशासन होता.  इसके अलावा निदेशक वित्त के साथ जीएम फाइनांस, डीजीएम इंटरनल ऑडिट, डीजीएम मास्टर ट्रस्ट, डीजीएम कोआर्डिनेशन, चीफ मैनेजर इंटरनल ऑडिट, चीफ मैनेजर रिर्सोस, चीफ मैनेजर एकाउंटिंग, चीफ मैनेजर कोऑर्डिनेशन, दो प्रबंधक इंटरनल ऑडिट के लिए, मैनेजर इंवेस्टमेंट, मैनेजर एकाउंटिंग, मैनेजर डिस्ब्रसमेंट के अलावा दो मैनेजर काम करते। यह ढ़ांचा भी तैयार नहीं हो पाया.

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ऊर्जा उत्पादन निगम का भी ढांचा खड़ा नहीं हो पाया

पीएफसी के रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा उत्पादन निगम का भी ढ़ांचा खड़ा नहीं हो पाया.  ऊर्जा उत्पादन निगम में एमडी के साथ सीएस, डायरेक्टर टेक्निकल, डायरेक्टर फाइनांस, ईडी, इडी आपरेशन एंड मेनटेनेंस, इडी एचआर, इडी  फाइनांस, जीएम प्रोजेक्ट, जीएम ऑपरेशन एंड मेनटेनेंस , जीएम पावर प्लांट और कोल ब्लॉक, जीएम सिविल, जीएम एचआर व एडमिनिस्ट्रेशन और जीएम फाइनांस होता.  वहीं निदेशक फाइनांस के साथ ईडी फाइनांस, जीएम फाइनांस, डीजीएम इंटरनल ऑडिट, डीजीएम फाइनांस, चीफ मैनेजर फाइनांस, चीफ मैनेजर स्टेबलिसमेंट, चीफ मैनेजर टैरिफ,  मैनेजर ऑडिट, मैनेजर प्लानिंग, मैनेजर प्रोजेक्ट, मैनेजर फाइनांस, मैनेजर बैंक व कैश, मैनेजर स्टेबलिसमेंट, मैनेजर एकाउंट, मैनेजर टैरिफ व स्टोर होता. यह भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी.

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ऊर्जा संरचण निगम का भी यही हाल

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ऊर्जा  संचरण निगम लिमिटेड का भी संगठनात्मक ढ़ांचा अब तक खड़ा नहीं हो पाया है.  इसमें एमडी के साथ डायरेक्टर आपरेशन, डायरेक्टर प्रोजेक्ट, जीएम एसएलडीसी,सीएस, डायरेक्टर फाइनांश, इडी आपरेशन एंड मेनटेनेंस, इडी प्रोजेक्ट, ईडी एचआर, इडी  फाइनांस, जीएम ऑपरेशन एंड मेनटेनेंस, पांच जीएम जोनल ऑफिस में, जीएम पीएंडपी, जीएम एचआर और जीएम फाइनांस होते. इसके अलावा डायरेक्टर फाइनांस के साथ ईडी फाइनांस, डीजीएम इंटरनल ऑडिट, डीजीएम फाइनांश,डीजीएम एकाउंट, चीफ मैनेजर ऑडिट, चीफ मैनेजर फाइनांस, चीफ मैनेजर स्टेबलिसमेंट, चीफ मैनेजर टैरिफ, मैनेजर ऑडिट, मैनेजर प्लानिंग,मैनेजर प्रोजेक्ट, मैनेजर फाइनांस, मैनेजर बैंक एंड कैश, मैनेजर स्टेबलिसमेंट, मैनेजर एकाउंट व मैनेजर टैरिफ होते.

बिजली वितरण निगम का भी खड़ा नहीं हो पाया ढांचा

बिजली वितरण निगम का ढांचा  भी खड़ा नहीं हो पाया. इसमें एमडी के साथ डायरेक्टर ऑपरेशन, डायरेक्टर प्रोजेक्ट,डायरेक्टर फाइनांश, सीएस, ईडी ऑपरेशन एंड मेनटेनेंश, ईडी प्रोजेक्ट, इडी एचआर,ईडी फाइनांश, तीन जीएम ऑपरेशन एंड मेनटेनेंत में, सात जीएम एरिया ऑफिस में, तीन जीएम आरएपीडीआरपी में, जीएम एचआर व जीएम फाइनांस होते.  इसके अलावा डायरेक्टर फाइनांत के साथ ईडी फाइनांत, डीजीएम इंटरनल ऑडिट, डीजीएम फाइनांस,डीजीएम एकाउंट, चीफ मैनेजर ऑडिट, चीफ मैनेजर फाइनांस, चीफ मैनेजर स्टेबलिसमेंट, चीफ मैनेजर टैरिफ, मैनेजर ऑडिट, मैनेजर प्लानिंग,मैनेजर प्रोजेक्ट, मैनेजर फाइनांस, मैनेजर बैंक एंड कैश, मैनेजर स्टेबलिसमेंट, मैनेजर एकाउंट व मैनेजर टैरिफ होते.

संगठनात्मक ढांचे के आधार पर ही होने थे ये काम

1.कंपनी का परफॉरमेंस व संसाधनों का उपयोग

2.मॉनिटिरिंग सहित अन्य गतिविधि

3.एकाउंटिबिलिटी के साथ काम

4.विभिन्न कार्यों में समन्वय

5.सोशल सैटिसफैक्शन

6.काम का बंटवारा

7.ट्रेनिंग, टेस्टिंग और आगे की योजनाएं बनाने का काम

 

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