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लगातार चार हार के बाद हेमलाल मुर्मू पर बीजेपी को क्या अब भी है भरोसा या होगी राजनीति से विदाई

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: 2014 का लोकसभा चुनाव हार जाना. 2014 में ही फिर बरहेट से विधानसभा चुनाव हार जाना. 2015 में लिट्टीपाड़ा से विधानसभा का उपचुनाव हारना और अब 2019 में राजमहल से दोबारा चुनाव हार कर लगातार चार बार हार का रिकॉर्ड बनाने वाले हेमलाल मुर्मू की राजनीतिक विदाई के चर्चे हो रहे हैं.

बात हो रही है कि क्या इतने हार के बाद बीजेपी फिर से हेमलाल पर भरोसा जताएगी या इनकी राजनीतिक करियर पर फुलस्टॉप लग गया.

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2019 के लोकसभा चुनाव में राजमहल सीट से जेएमएम के विजय हांसदा ने हेमलाल मुर्मू ठीक वैसे ही हराया है जैसे बीजेपी ने दूसरे लोकसभा क्षेत्र में अपने विरोधियों को.

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जीत का अंतर करीब एक लाख वोट रहा. आखिर क्या वजह थी, जिसने बीजेपी की आंधी को राजमहल में रोक दिया.

कमजोर रही बीजेपी की कैंपेनिंग

राजमहल लोकसभा के कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं को कहना है कि जेएमएम की तुलना में बीजेपी की कैंपेनिंग निश्चित तौर पर कमजोर रही. जहां हेमलाल मुर्मू एक बार भी नहीं पहुंच पाए, वहां उनके विरोधी लगातार दौरा करते रहे.

कमजोर कैंपेनिंग का नतीजा साफतौर से पाकुड़ विधानसभा में दिखता है. बीजेपी ने इस विधानसभा से करीब 20,000 वोट की लीड लेने का सोचा था. लेकिन नतीजा यह हुआ कि 50,000 वोटों से बीजेपी पीछे हो गयी.

हेमलाल मुर्मू के हार के पीछे यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी अपनी रणनीति पर यहां ठीक से काम नहीं कर पायी. ऐसा कहा जा रहा है कि हेमलाल मुर्मू ने कैंपेनिंग में पूरी तरह से अपनी चलायी. कार्यकर्ताओं की बातों को अनसुनी करते रहे.

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लिट्टीपाड़ा में किया फोकस तो महेशपुर में लगा जोर का झटका
हेमलाल मुर्मू ने शुरुआत से ही आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र पर फोकस किया. सबसे ज्यादा कैंपेनिंग लिट्टीपाड़ा में किया गया. जिस वजह से बाकी के विधानसभा क्षेत्र से नतीजे वैसे नहीं आए, जैसे आने चाहिए थे.

महेशपुर में बीजेपी को काफी जोर का झटका लगा. जहां से बीजेपी 20,000 वोट से लीड लेने का सोच रही थी, वहां से बीजेपी करीब 30,000 वोट से पीछे हो गयी. वहीं बोरियो विधानसभा में भीतरघात की भी बात सामने आ रही है.

बीजेपी के विधायक ताला मरांडी के क्षेत्र बोरियो से पार्टी को वैसे नतीजे नहीं मिले. जिसकी वो उम्मीद कर रही थी. बोरियो में भी जेएमएम ने 12,000 से लीड ली.

स्टार प्रचारक नहीं आये, टीएमसी भी फैक्टर

राजमहल लोकसभा क्षेत्र की बात की जाये तो वहां कोई बड़ा बीजेपी का स्टार प्रचारक नहीं पहुंचा.

हिरणपुर में अमित शाह ने सभा की, लेकिन उसका असर सीधे तौर पर नहीं दिखा. कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर यही सभा साहेबगंज इलाके में होती, तो इसका ज्यादा प्रभाव पड़ता.

अपनी चुनावी व्यस्तता की वजह से अर्जुन मुंडा को भी राजमहल का दौरा कैंसल करना पड़ा. स्टर प्रचारक नहीं आने की वजह से युवाओं में जोश की कमी साफ तौर से देखी गयी.

वहीं टीएमसी के उम्मीदवार मोनिका किस्कु के चुनावी मैदान में आने से सीधे तौर से बीजेपी को नुकसान हुआ. मोनिका को करीब 17,000 वोट आए. जो बीजेपी की झोली में आ सकते थे. मोनिका को ज्यादातर वोट बंगाल से सटे इलाकों से आये.

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