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बंध्याकरण और नसबंदी के पांच साल बाद दंपती को हुआ बच्चा, मुआवजे के लिए उपभोक्ता फोरम में दर्ज किया मुकदमा

Palamu/Garhwa : गढ़वा जिला में बंध्याकरण और नसबंदी ऑपरेशन का एक अजीबो-गरीब मामला प्रकाश में आया है. बंध्याकरण और नसबंदी के पांच वर्ष बाद एक दंपती को बच्चा हो गया, जबकि पति-पत्नी दोनों ने बच्चा नहीं होने के लिए ऑपरेशन कराया था. इस गरीब दंपती ने मुआवजे के लिए सरकार से गुहार लगायी थी. मुआवजा नहीं मिलने पर पीड़ित परिवार ने चिकित्सा पदाधिकारी और एसीएमओ के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दायर कर दिया है.

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बंध्याकरण हुआ असफल

यह मामला मेराल प्रखंड का है. मेराल निवासी सज्जाद अंसारी की पत्नी रशीदा का बंध्याकरण मेराल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 2013 में किया गया था. दो वर्ष बाद सज्जाद ने भी अपनी नसबंदी करा ली थी. पांच वर्ष बाद रशीदा गर्भवती हो गयी और सदर अस्पताल गढ़वा में उसने पुत्र को जन्म दिया. बंध्याकरण ऑपरेशन असफल होने के बाद सरकार की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान है. पीड़ित परिवार ने मुआवजे के लिए स्वास्थ्य विभाग में आवेदन दिया था. दो वर्ष गुजर जाने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला. इससे निराश पीड़ित परिवार ने अब उपभोक्ता फोरम में मेराल चिकित्सा पदाधिकारी और गढ़वा के एसीएमओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है.

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चिकित्सा पदाधिकारी ने की थी मुआवजा दिलाने की बात

रशीदा बीबी के पति सज्जाद अंसारी ने कहा कि चिकित्सा पदाधिकारी ने दो लाख रुपये मुआवजा दिलाने की बात कही थी, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिला. इसके लिए उपभोक्ता फोरम में मुकदमा किया हूं. अब मुआवजा के रूप में पांच लाख रुपये लेंगे.

मुआवजा के लिए प्रयास जारी है : प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

वहीं, मेराल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपक कुमार सिन्हा ने कहा कि मुआवजा के लिए आवश्यक दस्तावेज को रांची भेजा गया है. अभी तक मुआवजा की राशि प्राप्त नहीं हुई है. इसके लिए प्रयास जारी है.

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