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दामोदर के बाद झारखंड में वायु प्रदूषण को लेकर चलेगा अभियान, साल भर में राज्य को वायु प्रदूषण से मुक्त करना है मकसद : सरयू राय

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Ranchi : 14 सालों के अथक प्रयास के बाद जनसहयोग की मदद से दामोदर को आखिरकार प्रदूषणमुक्त के कगार पर लाकर खड़ा किया. जिस तरीके से दामोदर नदी को प्रदूषणमुक्त किया, उसी तरह से जरूरत है झारखंड के उन इलाकों को वायु प्रदूषण से मुक्त करने की, जहां खनन और परिवहन का काम हो रहा है. जिन इलाकों में ऐसा हो रहा है, वहां लोगों के बीच तरह-तरह की बीमारी फैल रही है. लोग प्रदूषण से त्रस्त हैं. वन एवं पर्यावरण विभाग की सुस्ती की वजह से ऐसा हो रहा है. ऐसे ही इलाकों को वायु प्रदूषण से मुक्त करने के लिए 10 अक्टूबर, यानी नवरात्र के पहले दिन से राज्य भर में एक अभियान चलाया जायेगा. यह अभियान नेचर फाउंडेशन के बैनर तले चलाया जायेगा. उक्त बातें राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने गुरुवार को अपने कार्यालय कक्ष में मीडिया को संबोधित करते हुए कहीं. उनहोंने कहा कि राज्य भर में एक साथ इस अभियान की शुरुआत होगी. जितने भी कार्यकर्ता इस अभियान से जुड़े हैं, वे अपने क्षेत्र से ही अभियान को शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि इसका मकसद सालभर में राज्य को वायु प्रदूषण से मुक्त करना है.

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वन विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक

सरयू राय ने मीडिया को बताया कि इस बाबत उन्होंने वन, पर्यावरण एवं जलवायु विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक की है. 28 सितंबर को वन, पर्यावरण एवं जलवायु विभाग के प्रधान सचिव, पीसीसीएफ, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष और सदस्य सचिव के साथ उन्होंने बैठक की. कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने राज्य में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति से अवगत कराया और राज्य को प्रदूषणमुक्त करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया. उन्होंने मीडिया के सामने आश्चर्य जताते हुए कहा कि वायु प्रदूषण की भयावहता को मापने के लिए आज तक कोई उपाय नहीं किया गया है. धनबाद और जमशेदपुर को छोड़कर कहीं भी प्रदूषण मापक यंत्र नहीं लगाया गया है. सरयू राय ने बताया कि उन्होंने निम्नलिखित बातें विभाग के सामने रखीं-

  • राज्य के सभी खनन क्षेत्रों में, राज्य के रेलवे साइडिंग क्षेत्र में और राज्य के प्रमुख शहरों में प्रदूषण मापक यंत्र स्थापित करायें, ताकि इनसे ऑनलाइन रियल टाइम डाटा प्राप्त किया जा सके.
  • खनन कंपनियों को पट्टा देते वक्त जिन शर्तों पर कंपनियों से मंजूरी ली गयी थी, उन सभी शर्तों का अनुपालन हो.
  • खनन कंपनियों के योजना दस्तावेजों की समीक्षा करें और यदि ये दस्तावेज घटिया स्तर के पाये गये हैं, तो इनके तैयार करनेवाले परामर्शी के विरुद्ध कार्रवाई हो.
  • खनिजों के वाहनों को पूरी तरह से ढंककर चलाया जाये और ओवरलोडिंग पर पूरी तरह से रोक लगे. रेलवे साइडिंग की जगहों की जांच करायें और इसके लिए पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य बनायें.
  • अवैध खनन पर अंकुश लगे.

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प्रदूषण की जानकारी हेल्पलाइन नंबर पर दे सकेंगे लोग

सरयू राय ने कहा कि झारखंड को वायु प्रदूषण से मुक्त करने के लिए आरंभ अभियान के अंतर्गत एक हेल्पलाइन कॉल सेंटर की स्थापना इसी महीने में कर ली जायेगी. झारखंड के किसी भी कोने में रहनेवाले को अगर लगेगा कि यहां प्रदूषण फैलाया जा रहा है, तो वह दिये गये नंबर पर कॉल कर जानकारी दे सकता है. सूचना मिलते ही उससे संबंधित विभाग को प्रदूषण की जानकारी दी जायेगी और उचित कार्रवाई के लिए कहा जायेगा. दिसंबर के तीसरे रविवार को तीन दिवसीय पर्यावरण पाठशाला का आयोजन रांची में किया जायेगा, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से 100 लोगों को पर्यावरण संरक्षण का प्रशिक्षण दिया जायेगा.

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तीन समितियां होनी हैं बहाल

सरयू राय ने कहा कि 1986 में बने पर्यावरण कानून के मुताबिक राज्य में तीन समितियां होनी चाहिए. पहली समिति राज्यपाल की अध्यक्षता में, दूसरी समिति मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव की अध्यक्षता में और तीसरी समिति जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में होनी चाहिए. फिलहाल झारखंड में समितियां मौजूद नहीं हैं. प्रदूषण को खत्म करने के लिए इन तीनों समितियों का होना काफी जरूरी है.

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