Crime NewsJharkhandLead NewsOpinionRanchi

बैजनाथ के बाद अब राहुल, झारखंड में नहीं रुक रहे पत्रकारों पर हमले

Chandan Singh

Ranchi : राजधानी रांची में एक बार फिर युवा पत्रकार पर जानलेवा हमला हुआ है. कर्तव्य पथ पर निकले दैनिक अखबर सन्मार्ग के पत्रकार राहुल पांडेय पर अवैध शराब माफ़िया संतोष पाठक ने जान लेने की नीयत से हमला किया. इस हमले में राहुल को गंभीर चोट आई है. माफिया ने न सिर्फ उसके साथ मारपीट की बल्कि मोबाइल फोन भी लूट लिया. डॉक्टरों की देखरेख में राहुल का इलाज चल रहा है. इससे पहले 11 सितंबर को सीनियर जर्नलिस्ट बैजनाथ महतो पर जानलेवा हमला हुआ था. जिसमें बैजनाथ गंभीर रुप से जख्मी हो गए थे. उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है. अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.

इसे भी पढ़ें : गैंगस्टर अमन साहू गिरोह का एक अपराधी गिरफ्तार

advt

खतरे में पत्रकारिता और मीडियाकर्मी

झारखंड में पत्रकारिता करना सबके बूते की बात नहीं. आए दिन पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं. फिर भी चौथा खंभा मजबूति से खड़ा. किसी और पेशे में ऐसी घटना हो रही होती तो वो सहम जाते. लेकिन पत्रकारों की हिम्मत ही है कि वो ना तो डरा है ना रुका है. ऐसे समय में जब उच्च गुणवत्ता वाली, स्वतंत्र पत्रकारिता पहले से कहीं अधिक आवश्यक है फिर भी इस पेशे को कई अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

बुरे वक्त पर आती है पत्रकारों की याद

जब कभी समाज में किसी को परेशानी होती है तब उस वक्त उनके जुबान पर सबसे पहला नाम जो आता है वो है मीडिया का. स्कूल ज्याद फीस ले रहा हो या फिर दबंगों की दबंगई से कोई परेशान है तो बस मीडिया को बुलाओ पत्रकार को बुलाओ. लेकिन यही पत्रकार उनके गुनहों का खुलासा करते हैं तब उनके अंदर का जानवर जाग जाता है. वो पत्रकार पर ऐसे टूट पड़ते हैं जैसे कि उनके साथ वर्षों से जमीन विवाद चल रहा हो.

खतरों से भरा प्रोफेशन

बाहर से देखने वाले को इस पेशे में बड़ा ग्लैमर दिखता है. लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि वर्तमान समय में पत्रकारिता करना जोखिम भरा काम है. पत्रकार और पत्रकारिता स्वयं सेंसरशिप, राजनीतिक और आर्थिक दबाव, धमकी, नौकरी की असुरक्षा और पत्रकारों के स्रोतों की सुरक्षा पर हमले जैसे अन्य खतरों का सामना पहले से कर रहे हैं लेकिन अब शारीरिक खतरे भी बढ़ गए हैं. आए दिन पत्रकारों पर जानलेवा हमले होते रहते हैं. कर्म पथ पर कई पत्रकारों को जान गवांनी भी पड़ी है.

हाशिये पर पत्रकार, मजे ले रही सरकार

पत्रकारों की माली हालत काफी दयनीय है. बावजूद वो पूरी ईमानदारी से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार को उनकी बिल्कुल परवाह नहीं. पिछली सरकार ने झारखंड में पत्रकारों के लिए बीमा योजना को मंजूरी दी थी. जो हाथी दांत के सिवा कुछ भी नहीं. योजना में सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सुविधा देने की बात थी. राज्य में हेमंत सरकार जबसे आई है तब से अबतक एक भी पत्रकार को मान्यता नहीं मिली है. ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा तो दूर उनका इलाज हो जाए यही बड़ी बात है.

समाज सेवा से जुड़ा प्रोफेशन

झारखंड जैसे राज्य में एक पत्रकार को कई मुश्किलों को सामना करना पड़ता है. समाज सेवा से जुड़े इस पेशे में नेता, माफिया, गैंगस्टर से टकराहट आम बात है. लेकिन सरकार भी मूक दर्शक बनकर पत्रकारों के कौतूहल का आनंद लेती रहती है. उन्हें फर्क नहीं पड़ता जो उनके काम काज को जनतक पहुंचाने का काम कर रहा है उनपर लगातार हमले हो रहे हैं. ऐसे में उनकी चुप्पी समाज के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है.

 

 

 

 

 

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: