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आखिर रांची विश्वविद्यालय क्यों नहीं बताता, किस कंपनी को दिया गया है सीबीसीएस सॉफ्टवेयर निर्माण का जिम्मा

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  • दो साल से छात्रों को रिजल्ट के लिए परेशान कर रहा विश्वविद्यालय
  • कभी सही मार्क्स नहीं मिल रहा, तो कभी रोल नंबर भुला दे रहा विश्वविद्य़ालय

Ranchi: रांची विश्वविद्यालय की लचर व्यवस्था से छात्रों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है. अब विश्वविद्यालय की ओर से सही समय पर रिजल्ट तक नहीं निकाला जा रहा है. इसकी वजह रांची विवि का सॉफ्टवेयर है. साल 2017 में रांची विवि ने च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम सीबीसीएस लागू किया था.

इसी के साथ यूनिवर्सिटी संबद्ध कॉलेजों में सेमेस्टर वाइस रिजल्ट जारी किया जाना था. लेकिन सीबीसीएस की सही तैयारी नहीं होने पर रांची यूनिवर्सिटी छात्रों का रिजल्ट जारी नहीं कर पा रही. इस समस्या से रांची यूनिवसिर्टी के छात्र तो परेशान हैं ही. वहीं इससे संबद्ध अन्य कॉलेजों जैसे डोरंडा कॉलेज, योगदा सत्संग कॉलेज, करमचंद भगत कॉलेज बेड़ो के छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सत्र 2017-2020 के ग्रेजुएशन के पहले सेमेस्टर का सही रिजल्ट यूनिवर्सिटी अब तक नहीं निकाल पायी है. जबकि छात्रों को तारीख पर तारीख दी जा रही है. हालांकि मानव संसाधन विभाग की ओर से सीबीसीएस सिस्टम 2016 से राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया था. रांची यूनिवर्सिटी ने इसे साल 2017 से लागू किया था. इसके बावजूद रांची यूनिवर्सिटी की ओर से सही तैयारी नहीं की गई. यूनिवर्सिटी के वरीय अधिकारी किस कंपनी को सॉफ्टवेयर बनाने की जिम्मेवारी दी गयी है यह बताने से पल्ला झाड़ रहे हैं.

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सॉफ्टवेयर नहीं बना पाया है रांची विवि

रिजल्ट जारी नहीं करने का मुख्य कारण सॉफ्ट्वेयर का नहीं बन पाना है. यूजीसी के नियमों के अनुसार सीबीसीएस लागू होते ही यूनिवर्सिटी में सेमेस्टर वाइस रिजल्ट जारी किया जाना है. जिसमें इंटरनल मार्क्स, ग्रेस मार्क्स, इलेक्टिव विषयों के मार्क्स सभी को जोड़ कर नंबर देना था. वर्तमान में रांची यूनिवर्सिटी के सॉफ्टवेयर में जो मार्क्स डाले जा रहे हैं, वो अपलोड करते ही मिस मैच कर जाते हैं. विगत दिनों डोरंडा कॉलेज के छात्रों ने प्रो वीसी से मुलाकात की थी, जिसमें छात्रों को प्रो वीसी ने जानकारी दी थी कि सॉफटवेयर में खराबी के कारण मार्क्स जोड़ने में परेशानी हो रही है. साथ ही कहा गया था कि 25 मई तक छात्रों का रिजल्ट जारी कर दिया जायेगा. लेकिन अभी तक रांची यूनिवर्सिटी रिजल्ट जारी नहीं कर पायी है.

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मेकॉन को दिया गया था काम

सूत्रों से जानकारी मिली है कि साल 2017 में सीबीसीएस लागू होते ही रांची यूनिवसिर्टी ने मेकॉन को सॉफ्टवेयर निर्माण करने का काम दिया था. खुद प्रो वीसी ने कई बार छात्रों को मेकॉन से सॉफ्ट्वेयर बनाने की बात की थी. लेकिन साल 2019 में एकाएक विवि ने दूसरी कंपनी को सॉफ्टवेयर बनाने का काम दिया. क्योंकि मेकॉन की ओर से जो सॉफ्ट्वेयर बनाया गया था वो छात्रों के मार्क्स नहीं ले पा रहा था. जनसंर्पक पदाधिकारी पीके झा से जानकारी मिली कि पहले सॉफ्टवेयर निर्माण का काम मेकॉन को दिया गया था. लेकिन सॉफ्टवेयर नहीं बन पाने के कारण कंपनी बदल दी गयी.

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नहीं बताना चाहते किसे मिला है काम

परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार से जब इस संबध में बात की गयी तो उन्होंने बताया कि किस कंपनी को काम दिया गया है, ये नहीं बताया जा सकता. कुछ बातें कांफिडेशियल भी होती हैं. जब उनसे पूछा गया कि आप परीक्षा नियंत्रक हैं, तो जानकारी आपको होनी चाहिए. उन्होंने ये कहा कि परीक्षा नियंत्रक हैं इसलिए नहीं बता सकते. हर जानकारी नहीं दी जा सकती. वहीं प्रो वीसी डॉ कामिनी कुमार से भी इस संबध में जानकारी लेने की कोशिश की गयी, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय छुट्टी में हैं औऱ उनका मोबाइल स्वीच ऑफ था.

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रिजल्ट में हो चुकी है गड़बड़ी

सॉफ्टवेयर में खराबी के कारण छात्रों को अलग-अलग तरह से परेशानी हो रही है. डोरंडा कॉलेज के छात्रों से जानकारी मिली की कई छात्रों ने अंग्रेजी इलेक्टिव, हिंदी ए, बांग्ला और उर्दू विषय लिया है. इन विषयों की परीक्षा 50-50 मार्क्स की होती है. ऐसे में जिन छात्रों ने हिंदी-उर्दू और हिंदी-बांग्ला लिया है, उन्हें दोनों विषयों के अलग अलग अंक 50-50 अंक दिये गये हैं, लेकिन जिन छात्रों ने हिंदी और अंग्रेजी लिया है, उनमें से अधिकांश छात्रों को सिर्फ एक ही विषय का मार्क्स दिया गया है. जबकि हिंदी और अंग्रेजी लेनेवाले छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है. क्रॉस लिस्ट दिखाते हुए छात्रों ने बताया कि कैसे एक विषय का मार्क्स है और एक का नहीं. योगदा सत्संग कॉलेज के छात्रों का तो यूनिवर्सिटी की ओर से रोल नंबर तक गुम कर दिया गया. कॉलेज में जारी रिजल्ट में नाम किसी और छात्र का और रोल नंबर किसी और छात्र का दिखाया गया. यहां राजनीति शास्त्र के छात्रों को पहले सेमेस्टर जिसकी परीक्षा साल 2017 में हुई थी, इसके इंटरनल मार्क्स भी सही से नहीं मिल पाये हैं. जिन छात्रों ने 20, 22 या 23 अंक लाया, उन्हें 0, 2 और तीन अंक दिया गया.

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क्या है सीबीसीएस

मूल्यांकन सेमेस्टर के अनुसार किया जाता है. प्रत्येक सेमेस्टर में 15 से 18 सप्ताह शैक्षणिक कार्य होता है, जो 90 दिनों के बराबर होगा. यह पाठ्यक्रम सामग्री बनाने और पाठ्यक्रम की सामग्री और शिक्षण के समय में क्रेडिट आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करने में काफी आसान है. कोई छात्र एक सेमेस्टर में एक पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करता है, तो उसे बाद में उस पाठ्यक्रम को दोहराना नहीं पड़ता है, छात्र क्रेडिट प्राप्त कर सकते हैं. ग्रेडिंग यूजीसी ने 10 अंक ग्रेडिंग प्रणाली की शुरुआत की है.

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