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आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप एलियंस के बारे में खुलासा करते-करते क्यों रुक गये?

पृथ्वी से अलग भी है एक दुनिया

Uday Chandra

क्या धरती से इतर भी कोई दुनिया है? इस्राइल के पूर्व अंतरिक्ष रक्षा प्रमुख हैम इशेद और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोनॉमी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अवी लोएब की बातों पर भरोसा किया जाये, तो इसका जवाब है, हां.

इस्राइल के पूर्व अंतरिक्ष रक्षा प्रमुख हैम इशेद ने हाल में यह दावा कर सनसनी फैला दी है कि एलियंस हकीकत में हैं और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी इसकी जानकारी है. उन्होंने यह कह कर दुनिया को चौंका दिया कि एलियन अमेरिका और इस्राइल के संपर्क में हैं. एलियन नहीं चाहते कि उनके बारे में मानवता जाने क्योंकि इंसान अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं. इशेद की मानें को एलियन और अमेरिकी सरकार के बीच एक समझौता हुआ है.

हैम इशेद की इन बातों को हल्के में इसलिए नहीं लिया जा सकता क्योंकि वे करीब तीन दशक तक अंतरिक्ष सुरक्षा कार्यक्रम के प्रमुख रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि एक ‘गैलेक्टिक फेडरेशन’ बनाया गया है.

एलियन और अमेरिकी सरकार के बीच जो समझौता हुआ है उसके अनुसार, एलियन अमेरिका की मदद से ब्रह्मांड को समझना चाहते हैं. वह इस पर रिसर्च कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि साझा अभियान के तहत मंगल ग्रह पर एक सीक्रेट अंडरग्राउंड बेस भी तैयार किया गया है.

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उनकी बातों पर भरोसा किया जाये तो एक समय, डोनाल्ड ट्रंप इस बारे में बड़ा खुलासा कर दुनिया को चौंकानेवाले थे लेकिन एलियन ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. इशेद का मानना है कि एलियन तब तक लोगों के सामने नहीं आयेंगे, जब तक मानवता विकसित होकर उस स्तकर तक पहुंच नहीं जाती, जब तक कि वह अंतरिक्ष और अंतरिक्षयानों और इसके रहस्यों को लेकर अपनी समझ और विकसित न कर ले.

दुनिया के वैत्रानिक अभी हैम इशेद की बातों को समझने की कोशिश कर ही रहे हैं कि इस बीच हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोनॉमी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अवी लोएब ने यह कह कर दुनिया को चौंका दिया है कि अंतरिक्ष से धरती की तरफ आनेवाले चमकते हुए पत्थर (उल्कापिंड) इस बात का प्रमाण हैं कि धरती के अलावा भी जीवन है. ये पत्थर एलियंस या अंतरिक्ष में मौजूद दूसरी सभ्यता की ओर से फेंका गया कचरा है. यह कचरा अब पूरे अंतरिक्ष में फैला हुआ है.

दरअसल अक्सर हमें ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं कि अंतरिक्ष से एक बड़ा सा पत्थर, एस्टेरॉयड या उल्कापिंड धरती की ओर आ रहा है. धरती को खतरा है. इसी को आधार बना कर अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने यह दावा किया है कि ये पत्थर, एस्टेरॉयड या उल्कापिंड एलियंस की ओर से धरती की तरफ फेंका गया कचरा है. इसे प्रोफेसर अंतरिक्ष का कचरा कह रहे हैं. यानी स्पेस गार्बेज.

प्रोफेसर अवी लोएब का दावा है कि साल 2017 में भी एलियंस ने एक अंतरिक्ष का कचरा फेंका था. उन्होंने इस बात का जिक्र अपनी किताब एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियलः द फर्स्ट साइन ऑफ इंटेलिजेंट लाइफ बेयॉन्ड अर्थ (Extraterrestrial: The First Sign of Intelligent Life Beyond Earth) में किया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरिक्ष के इस कचरे ने हमारे सौर मंडल की यात्रा की, जबकि हम उसे एक चमकनेवाला पत्थर समझ रहे थे.

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प्रोफेसर अवी लोएब ने कहा कि 6 सितंबर 2017 को एक वस्तु स्टार वेगा से निकला. ये तारा धरती से 25 प्रकाश वर्ष दूर है. यह हमारे सौर मंडल में घुसा और 9 सितंबर को सूरज के नजदीक से निकला. यही वस्तु शुक्र ग्रह के पास से 94790 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरा. इसके बाद यह पेगासस नक्षत्र की ओर जाते हुए अंधरे में गायब हो गया. 7 अक्टूबर को यह वापस धरती का चक्कर लगा कर गायब हो गया.

प्रोफेसर अवी लोएब इसके पीछे बड़ा अच्छा तर्क देते हैं. वे कहते हैं कि अगर गुफा में रहनेवाले इंसान को सेलफोन दिखा दिया जाये तो जरा सोचिए उसकी क्या प्रतिक्रिया होगी. मैंने पूरी जिंदगी अंतरिक्ष से आनेवाले पत्थरों का अध्ययन किया है.

लेकिन इस चमकते हुए पत्थर को देख कर लगता है कि यह साधारण पत्थर से कहीं ज्यादा कुछ और है. प्रोफेसर लोएब ने लिखा है कि यह बेहद दुर्लभ स्थिति है. हमने आजतक के इतिहास में जितने भी एस्टेरॉयड या अंतरिक्ष के पत्थर देखे हैं, ये एकदम वैसा नहीं है.

इन दोनों में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की बातों में इसलिए भी दम नजर आता है क्योंकि एलियन को लेकर समय समय पर कोई न कोई जानकारी सामने आती रहती है. अमेरिका के ही एक पूर्व एयर फोर्स अधिकारी ने 1978 में एक अमेरिकी मिलिट्री बेस के पास अंतरिक्ष से आये एलियन को मार गिराये जाने का दावा किया था. उसे गोली मारी गयी थी.

इस अधिकारी की ओर से बतायी गयी इस घटना पर जिक्र एक अवॉर्ड विनर खोजी पत्रकार की किताब में भी है. पत्रकार ने इस पूर्व अमेरिकी एयर फोर्स अधिकारी का इंटरव्यू लिया था, जिसमें वायु सेना के ऑफिसर ने एलियन से रूबरू होने की घटना बतायी थी.

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अमेरिका के इस पूर्व वायु सेना अधिकारी का नाम है मेजर जॉर्ज फिलर (Major George Filler). जिस पत्रकार ने यह इंटरव्यू लिया उसका नाम है जॉन एल गुऐरा (John L. Guerra). पत्रकार की किताब का नाम है ‘स्ट्रेंज क्राफ्टः द ट्रू स्टोरी ऑफ ऐन एयर फोर्स इंटेलिजेंस ऑफिसर्स लाइफ विद यूएफओ’ (Strange Craft: The True Story of an Air Force Intelligence Officer’s Life with UFOs). इस इंटरव्यू में पत्रकार जॉन ने बताया कि जब मेजर जॉर्ज वायुसेना में सीनियर ऑफिसर थे, उस समय चार साल तक अक्सर एलियन की घटनाएं होती रहीं.

विदेशों में ही नहीं बल्कि भारतीय जमीन पर भी दूसरों ग्रहों से आये इन प्राणियों की चहल-कदमी के निशान पाये गये हैं. नर्मदा घाटी के प्रागैतिहासिक (पाषाण काल) शैलचित्रों के शोध में जुटे एक वैज्ञानिक दल ने रायसेन से करीब 70 किलोमीटर दूर घने जंगलों के गुफाओं समेत पत्थरों से बने ग्रहों में मिले प्राचीन शैलचित्रों के आधार पर अनुमान जताया है कि प्रदेश के इस हिस्से में दूसरे ग्रहों के प्राणी एलियन आये होंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि आदि मानव ने इन शैलचित्रों में उड़नतश्तरी की तस्वीर भी उकेरी हैं. अर्थात वह इस यूएफओ से भी वाकिफ थे या उन्होंने इसे देखा होगा.

भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की यूनिटों ने सन् 2010 में जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में उड़ने वाली अनजान वस्तुओं (यूएफओ) के देखे जाने की खबर दी थी.

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