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आखिर क्यों मंत्री लुईस मरांडी को कहना पड़ा, ‘दे दीजिए तीर-धनुष को अपना वोट?’

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Pravin Kumar

Ranchi: चुनाव का मौसम है. नेता को जनता की याद आयी है. वहीं जनता, नेता-मंत्री से पांच सालों के काम का हिसाब मांग रही है. जनता और नेता की बातचीत का एक वीडियो इनदिनों सोशल मीडिया पर वायरल है.

Sport House

मिली जानकारी के अनुसार, यह वीडियो वायरल दुमका विधानसभा क्षेत्र के मसलिया प्रखंड के जेरूवाडीह गांव का है. जहां शनिवार को भाजपा उम्मीदवार और रघुवर सरकार में मंत्री रहीं डा. लुईस मरांडी वोटर्स के सवाल से घिरी नजर आयी.

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जब लुईस मरांडी ने कहा- दे दिजीए तीर-धनुष को वोट

ग्रामीणों से वोट मांगने पहुंचीं मंत्री लुईस मरांडी वीडियो में साफतौर से ग्रामीणों के सवालों पर घिरती दिखीं. लोग पांच साल के काम का हिसाब देने लगे. गांववालों ने कहा- विकास नहीं हुआ, रोजगार के साधन नहीं सृजित हुए. आवास नहीं मिला.

Vision House 17/01/2020

 इन समस्याओं और शिकायतों को सुनकर बीजेपी प्रत्याशी मरांडी परेशान दिखीं. और सवालों से घिरीं मंत्री लुईस मारांडी ने खीझ कर ग्रामीणों से जवाब में कहा,  दे दिजीए वोट तीर-धनुष को, हम थोड़ी ना मना कर रहे हैं. दे दिजीए तीर-धनुष को फिर पता चल जायेगा.

वीडियो में महिलाओं ने भाजपा उम्मीदवार लुईस मरांडी के समक्ष कई समस्याओं को रखा. ग्रामीणो के शोरगुल के बीच लुईस मरांडी ने कहा- मेरा भी आवाज है.

SP Deoghar

आप लोग धीरे नहीं बोल सकते. बात करने आए हैं ना, हम बैठे हैं, हम भाग तो नहीं रहे, ऐसा लग रहा है हम लड़ाई लड़ने आए हैं, वोट नहीं देना है मत दीजिए, वोट आपका अधिकार है. हम मना करने नहीं आए हैं. दे दिजीए तीर-धनुष को फिर पता चल जायेगा

गौरतलब है कि संथाल के विकास का दावा भाजपा रघुवर सरकार करते रही है. लेकिन संथाल क्षेत्र के कई ऐसे गांव मौजूद है जहां लोगों को आज भी बुनियादी सुविधा तक सरकार उपल्बध करा नहीं सकी है.

सड़क जर्जर है पेयजल सकंट का भी सामना दुमका के सुदूर क्षेत्र के ग्रामीणों को करना पड़ता है. न्यूजविंग की पड़ताल में कुछ गांवों की हकीकत सामने आयी थी, जहां आज भी लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं.

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 गांव 1

जितपुर गांव तक नहीं पहुंची है सड़क

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जिला स्कूल में आयोजित इस प्रतियोगिता में झारखंड के 24 जिला स्तर पर चयनित विद्यार्थियों के मॉडल को प्रदर्शित किया गया था.

दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड स्थित पिपरा पंचायत के जितपुर गांव को सरकार सड़क से जोड़ नहीं पायी है. विकास की बयार बहाने के दावों की हकीकत गांव में पहुंचने पर नजर नहीं आयी.

जितपुर गांव की कुल जनसंख्या करीब 250 है. गांव के सड़क से नहीं जुड़े होने के कारण ग्रामीणों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

बच्चों को भी रोज स्कूल आने-जाने में बहुत कठिनाई होती है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मौजूद सरकारी विद्यालय पारा शिक्षक के भरोसे है, ऐसे में कुछ लोगों ने अपने बच्चों को नामांकन प्राइवेट स्कूल में कराया है.

 गांव 2

क्षतिग्रस्त पुल आने-जाने का जरिया

मसलिया प्रखंड की पंचायत रांगा अंतर्गत गोवासोल गांव में पुल के अत्यंत पुराने और क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. यह पुल इस गांव को तोसोरिया, मोहलबना, तुड़का, प्यालगड़ाह, मनोहरचक आदि दर्जनों गांवों को प्रखंड मुख्यालय व दुमका से जोड़ने का काम करता है.

इस पुल से कई छोटी गाड़ियां गुजरती है. इस गांव में राजकीय मध्य विधालय सह उत्क्रमिक उच्च विद्यालय होने के कारण कलिपाथर, लतावर, शिकारपुर के बच्चे पढ़ने आते हैं. क्षतिग्रस्त पुल बनवाने के लिए ग्रामीणों ने विधायक सह झारखंड सरकार की मंत्री लुईस मंराडी से फरियाद की थी, लेकिन निराश ही हाथ लगी.

गांव 3

तीन ओर से नदी से घिरा है कालीपाथर गांव

कालीपाथर गांव की जनसंख्या करीब 450 है. गांव को पक्की सड़क से जोड़ा नहीं गया है. कच्ची सड़क पर गाड़ी, मोटरसाइकिल, साइकिल तक चलाना मुश्किल है. बारिश के समय ग्रामीण इस कच्चे रास्ते की अपेक्षा खेतों की पगडंडियों पर चलना ठीक समझते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव नुनबिल नदी से तीन तरफ से घिरा हुआ है. एकमात्र कच्चा रास्ता ही एक गांव को जोड़ता है. इस गांव से सबसे नजदीक सड़क लताबर गांव में है. लताबर गांव से इस गांव के नदी घाट तक करीब 2.5 किलोमीटर कच्चा रास्ता है. पक्की सड़क नहीं होने के कारण विकास योजनाओं को लागू करने वाले सरकारी अधिकारी, कर्मचारी भी गांव नहीं आना चाहते. पंचायत कार्यालय ने तो इसे टापू की संज्ञा दे दी है.

गांव 4

नमोडीह गांव में पीने के पानी की किल्लत

गोपीकांदर प्रखंड के खरौनी पंचायत स्थित नमोडीह गांव का प्रधान टोला जिसकी जनसंख्या लगभग 280 है. यहां के ग्रामीणों को बारिश के दिनों में भी पीने के पानी के संकट से जूझना पड़ता है. इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. ग्रामीणों की मांग पर इस टोला में लगे एक मात्र चापाकल में सोलर टंकी लगायी गयी.

लेकिन वो सफल नहीं हुई. और ग्राम प्रधान और मुखिया को बिना सूचना दिए विभाग ने सोलर टंकी को हटा दिया.

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान टोला के लोग अंग्रेजों के ज़माने से ही डोभा और झरना का पानी पीने के लिये विवश है. कई सरकारें आयी और गयी, लेकिन साफ पानी नसीब नहीं हुआ.

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Mayfair 2-1-2020

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