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आखिर किसके प्रभाव से 18 माह से अश्वनि मिश्रा की कंपनी को चाईबासा में मिल रहा करोड़ों का काम

Ranchi: चाईबासा में कई कंपनियां ऐसी हैं, जो सरकारी योजनाओं का काम ठेका पर लेकर करती हैं. पर, 8-9 माह पहले कुछ ऐसा हुआ कि सभी ठेकेदार सड़क पर आ गये. अश्वनि कुमार मिश्रा और हजारीबाग के कुछ लोग चाईबासा पहुंचते हैं. तब अधिकांश काम उन्हीं लोगों को मिलना शुरु हो जाता है.

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अश्वनि मिश्रा की कंपनी त्रिनेत्र और तिरूपति इंटरप्राइजेज ने चाईबासा में करीब 40-50 करोड़ रुपये से अधिक का काम किया है. यह काम कई सालों में नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ 18 महीने में ही काम को पूरा कर दिया गया.

इसके अलावा हजारीबाग की ही एक और कंपनी को भी कई काम दिये गये. आरोप है कि काम देने में नियमों को भी दरकिनार कर दिया गया. जिसमें बड़े पैमाने पर कमीशन का खेल हुआ है.

वहीं अश्वनि मिश्रा की कंपनी ने को जो काम किये गये हैं, उसमें से ज्यादातर का भुगतान डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड) फंड से किया गया है.

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करीब 500 आंगनबाड़ी केंद्र का काम

आरोप है कि चाईबासा जिला में समाज कल्याण विभाग की ओर से करीब 600 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में करोड़ों रुपये का काम कराया गया है. इसमें से तकरीबन 400 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम अश्वनि मिश्रा की कंपनी को ही दिया गया है.

आश्चर्यजनक की बात ये भी है कि सभी काम पिछले 19 महीने में ही आवंटित किये गये. बताया जाता है कि अगर सही तरीके से जांच हो, तो काम देने से लेकर उसके क्रियान्वयन तक में कई अनियमितता सामने आयेगी.

आरोप ये भी है कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड से ही चाईबासा के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की तरफ से जलमिनार का काम कराया गया है. स्वास्थ्य विभाग में भी करोड़ों रुपये की लागत से कई काम किये गये हैं. इनमें से कई काम अश्वनि मिश्रा की कंपनियों और हजारीबाग से आये लोगों को दिये गये.

गौरतलब है कि इससे संबंधित झारखंड मुक्ति मोर्चा की पश्चिमी सिंहभूम जिला कमेटी की तरफ से सीएम हेमंत सोरेन को दो पत्र भी लिखे गये हैं. जिसमें कई तरह के आरोप लगाये गये हैं. आरोप चाईबासा में पदस्थापित अफसरों पर भी हैं.

हालांकि अफसर अश्वनि मिश्रा या हजारीबाग से आये किसी कांट्रैक्टर से किसी भी तरह के संपर्क होने की बात से इंकार करते हैं. बावजूद इसके यह सवाल तो उठता ही है कि आखिर किसी खास अफसर के जिला में आते ही किसी खास कंपनी या व्यक्ति को कैसे सारे काम मिलने लगते हैं.

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5 Comments

  1. बिल्कुल सही कदम है कुछ ऐसा ही मामला गिरिडीह जिले में जो भू अर्जन पदाधिकारी हैं उनका है और उनका सांठगांठ यहां पर काम कर रहे गोकुल कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ है जो अभी यहां वर्तमान में पांचवा जम्मू आश्रम रोड चौड़ीकरण का काम कर रही है पहले यही कंपनी गोविंदपुर टू जामताड़ा रोड को बना रही थी और उस समय भी इस भू अर्जन पदाधिकारी को हम पदस्थापित किया गया था नतीजा यह है कि वर्जन पदाधिकारी ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के सारे नियमों को ताक ताक पर रखकर और ज्यादातर मामलों को विवादित घोषित कर दिया है बिना तथ्यों के आधार पर और उसको एयरपोर्ट में भेज दिया और जबरन सड़क निर्माण का कार्य कंपनी से करवा रही है इतना ही नहीं पेड़ का जो परमिशन है जहां किसी प्लॉट पर या यूं मानिए कि खुद मेरे ही प्लॉट पर मात्र 23 पेड़ काटने का आदेश वन विभाग के द्वारा प्राप्त है और लगभग 200 से ऊपर पेड़ काटे गए इस तरह का मामला पूरे रोड में और अर्जन पदाधिकारी और उसके योर ऑफिस में बैठने वाले लोग हैं खासतौर से जमीन है और एशियन डेवलपमेंट बैंक तथा उसकी तरफ से जो रोड का डीजीएम हैं सारे लोग मिलकर के सारा खेल खेलते हैं और करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है अगर इसको हाथ में लिया जाए तो मैं संपादक महोदय से आग्रह करूंगा कि अगर आपको समय है अगर आपको लगता है कि इस मामले को अपने मीडिया में उठाए तो हम आग्रह करेंगे कि आप इस मामले को एक बार जरूर देखें धन्यवाद। मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता की हूं मैं ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड का राज्य महासचिव मैं सामाजिक अंकेक्षण इकाई में जो अभी भी कमेटी है उसका सदस्य हूं वर्तमान में कोर्ट में एनजीओ कोआर्डिनेशन कमेटी जो बनी है उसका भी सदस्य हूं और मैं इस रोड में बन रहे इस रोड में जितने रैयत या अधिक होगी लोग हैं उन पीड़ितों में से एक हूं बाकी लोगों के साथ इन लोगों ने जो व्यवहार किया उन्हें कानून का भय दिखाया सरकारी काम में बाधा डालने का भय दिखाया जिसके डर से लोग सामने नहीं आ रहे हैं और लोगों को नियम का जानकारी भी नहीं मैं चाहता हूं कि उनकी आंखों का प्रदत्त बटेगा जब यह मामला थोड़ा सा है लाइट होगा हम ने उपायुक्त को भी आवेदन दिया है उपायुक्त ने भी जो रोड बनाने का आदेश पारित किया है वह नियम से हटकर है और तथ्य हीन है बेबुनियाद है उपायुक्त की भी संलिप्तता को साबित किया देश के माध्यम से साफ झलकती है, यह मामला गिरिडीह जिले का है चंबा जमुआ स्वर्ण पथ चौड़ीकरण का है और प्रभावित रयत ओं की संख्या सैकड़ों में कुछ भवन के जो भुगतान किए गए वह हम इनकी मिलीभगत से करोड़ों में किया गया जबकि ग्रामीण क्षेत्र में करोड़ों के भवन पर आया नहीं होते हैं उसका क्षेत्रफल भी देखा जा सकता है उसका आकार भी देखा जा सकता है यह मामला अगर उजागर हो बहुत बड़े घोटाले से पर्दा उठेगा।

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