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एक साल में जहरीली शराब से 30 मौत के बाद क्या मुट्ठी भर पुलिस से उतर जाएगा उत्पाद विभाग का हैंगओवर !

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Ranchi: 2017 सिंतबर महीने में पुलिस अवैध शराब कारोबारी प्रह्लाद सिंघानिया को तलाश रही थी. क्योंकि सिंघानिया के बनाए हुए शराब से रांची के आस-पास इलाकों में 17 लोगों की मौत हो गयी थी. शराब को लेकर झारखंड की राजनीति काफी गर्म थी. भले ही पुलिस को प्रह्लाद सिंघानिया को पकड़ने में कामयाबी मिल गयी हो. लेकिन ठीक एक साल के बाद जैसे मौत अपनी ही बरसी मना रही हो. मौत का बहाना कुछ और नहीं बल्कि इस बार भी जहरीली शराब ही है.

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इस बार मौत का आंकड़ा 17 तो नहीं पहुंचा है. लेकिन रोज जिस तरह से जहरीली शराब से मौत की खबर आ रही है, ऐसा लग रहा है कि आंकड़ा 17 के आस-पास पहुंच कर ही दम लेगा. पिछले साल 17 मौत के बाद सरकार की तरफ से आ रहे बयानों से ऐसा लग रहा था कि सरकार जहरीली शराब पर पूरी तरह से नकेल लगाकर ही दम लेगी. साल भर चले मंथन के बाद सरकार को लगा कि सुरक्षा बल और संसाधनों की कमी की वजह से उत्पाद विभाग अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा है. एक साल लग गए इस नतीजे पर पहुंचने में कि उत्पाद विभाग को पुलिस बल से 200 फोर्स दिए जाए. लेकिन उससे पहले फिर से एक बार रांची में जहरीली शराब से मौत का सिलसिला चल पड़ा है.

जानें जहरीली शराब से मौत की असली वजह

सूबे में अगर शराब नीति की बात करें तो वो पूरी तरह से फ्लॉप है. ना ही सरकार को राजस्व आया और ना ही अवैध शराब के कारोबार पर विभाग नकेल लगा सका. विभाग ने देश के कई राज्यों का दौरा किया. लेकिन एक माकूल व्यवस्था कैसे लागू की जा सके. इसपर काम नहीं हो पाया. ना ही विभाग राज्य में मिथाइल और इथाइल अल्कोहल की खुली बिक्री पर रोक लगा सकी. जहरीली शराब से हो रही मौत के पीछे सबसे बड़ी वजह मिथाइल और इथाइल अल्कोहल की खुलेआम बिक्री है.

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स्प्रीट अल्कोहल के रूप दो तरह के होते हैं. मिथाइल और इथाइल. लेकिन बहुत कम लोगों को यह समझ है कि मिथाइल अल्कोहल जिसे इंड्सट्रीयल अल्कोहल भी कहते हैं उसका काम सिर्फ और सिर्फ कारखाने में होता है. मिथाइल अल्कोहल से पेंट आदि बनाए जाने का काम होता है. वहीं स्प्रीट जब बनता है तो उसके प्यूरीफिकेशन का एक प्रॉसेस होता है. प्रॉसेस के बाद इथाइल अल्कोहल बनाते हैं. इथाइल अल्कोहल से ही सभी शराब बनायी जाती है. चाहे वो देसी हो, व्हिस्की हो, रम हो या जिन.

लोकल लेवल पर जो शराब बनायी जाती है, बनाने वालों को अल्कोहल के बारे में उतनी जानकारी नहीं होती है. खास कर नकली देसी शराब बनाने में इथाइल अल्कोहल को बजाए मिथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है. जिसे पीकर लोग मारे जा रहे हैं. हाल में ही रांची में हुई शराब से मौत की वजह भी यही है. पुलिस को मौके से भारी मात्रा में नकली शराब मिली है. जो जहरीली है.

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हरियाणा और मिलिट्री की स्टीकर वाले शराब से सावधान !

ऐसी धारणा बन गयी है कि हरियाणा और मिलिट्री की शराब सस्ती और अच्छी होती है. झारखंड में इस बात का फायदा अवैध शराब कारोबारी खूब उठा रहे हैं. राज्य भर में खुलेआम सड़क किनारे होटलों में ये शराब बेची जा रही है. सस्ती होने के पीछे तर्क ये दिया जाता है कि हरियाणा और मिलिट्री में ड्यूटी कम लगती है. इस वजह से शराब सस्ती है. जबकि ये शराब शुद्ध रूप से झारखंड में ही बनायी जा रही है. स्प्रीट में रंग मिलाने के बाद इसे बोतल में पैक किया जा रहा है.

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पैक बोतल में हरियाणा या मिलिट्री का स्टीकर चिपका दिया जा रहा है. 2017 सिंतबर में रांची और आस-पास सिंघानिया की शराब पीकर जिन लोगों की मौत हुई थी. वो शराब भी मिलिट्री की स्टीकर लगी हुई थी. इस शराब को तैयार करने वालों की लोकल प्रशासन से काफी अच्छी साठगांठ है. पकड़े जाने पर भी पुलिस ऐसे सप्लायरों पर कार्रवाई नहीं कर रही है. जिससे हर वक्त शराब पीकर मौत का डर बना हुआ है.

200 पुलिस बल से क्या स्वस्थ हो जाएगा उत्पाद विभाग

सरकार की तरफ से दो दिन पहले ही एक नोटिफिकेशन जारी हुआ है. सरकार उत्पाद विभाग को 200 पुलिस बल देने जा रही है. कहा जा रहा है कि इन पुलिस बल की मदद से उत्पाद विभाग का हाल सुधारने की कोशिश की जाएगी. लेकिन सवाल है कि क्या संसाधन विहीन इस विभाग का इलाज 200 पुलिस कर्मी हैं ? इन 200 पुलिस कर्मियों का इस्तेमाल करने के लिए क्या विभाग के पास उतने वाहन हैं. क्या विभाग ने पेट्रोलिंग करने के लिए किसी मद से राशि डीजल और ड्राइवर के लिए व्यवस्था की है. ऐसे तमाम तरह के सवाल हैं जो यह साबित करता है कि सिर्फ 200 पुलिस बल उत्पाद विभाग को देने से हालात नहीं सुधरने वाले.

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