न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

18 वर्षों में भी नहीं बन पायी नयी राजधानी, कल झारखंड मनायेगा अपनी स्थापना की 18वीं वर्षगांठ

छत्तीसगढ़ में न्यू रायपुर 2012 में ही बनकर तैयार, 2002 में तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने किया था ग्रेटर रांची का शिलान्यास

694

Ranchi: बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बने 18 साल हो गये. गुरुवार को सरकार झारखंड का 18वां स्थापना दिवस मनायेगी. इन 18 वर्षों में झारखंड सरकार नयी राजधानी नहीं बनवा सकी. 2002 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने ग्रेटर रांची का शिलान्यास रांची के सुकुरहुट्टू में काफी तामझाम के साथ किया था. उस समय सुकुरहुट्टू और पिठौरिया के 30 हजार एकड़ जमीन पर नयी राजधानी बनाने का सपना पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने देखा था. उन्होंने इसके लिए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मलेशिया का दौरा किया था और मलेशिया की कंपनी को आगे की कार्रवाई करने का आदेश दिया था.

इसे भी पढ़ेंः सात समंदर पार अमेरिका में भी बिहार-झारखंड के लोगों ने मनाया छठ

योजना के लिए उनके बाद की सरकारों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखलायी. हालांकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ग्रेटर रांची डेवलपमेंट अथोरिटी नामक एक एजेंसी भी गठित की गयी. नयी राजधानी को लेकर इसी एजेंसी को नोडल एजेंसी बनाया गया था. इसकी जमा पूंजी 25 करोड़ भी सरकार ने तय की. कई बार ग्रेटर रांची डेवलपमेंट ऑथोरिटी की बैठकें भी हुई. अब राज्य सरकार एचइसी की दो हजार एकड़ जमीन पर कोर कैपिटल एरिया विकसित कर रही है. यहां पर विधानसभा, हाईकोर्ट बन रहे हैं.

hosp3

इसे भी पढ़ेंः18 साल में 18 घोटालों से राज्य की छवि दागदार, कई गये सलाखों के…

छत्तीसगढ़ में बन गया नया रायपुर

झारखंड के साथ ही अलग राज्य बने छत्तीसगढ़ की अपनी नयी राजधानी बन गयी है. न्यू रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार ने नयी राजधानी बनायी है. 2012 से नयी राजधानी को शुरू कर दिया गया है. लेकिन झारखंड में अलग-अलग सरकारों ने नयी राजधानी बनाने की दिशा में कोई खास पहल नहीं की.

एचइसी के भवनों में ही चल रहे मंत्रालय और विधानसभा

झारखंड का विधानसभा और प्रोजेक्ट भवन मंत्रालय समेत अन्य प्रमुख सचिवालय भवन एचइसी के पुराने भवन पर ही चल रहे हैं. प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव समेत डेढ़ दर्जन से अधिक विभाग चलते हैं. एचइसी के 100 बिल्डिंग में पर्यटन, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, परिवहन और ग्रामीण कार्य विभाग चल रहे हैं. वहीं एचइसी के एमडीआइ भवन में मानव संसाधन विभाग और भू राजस्व विभाग का कुछ हिस्सा चल रहा है. एचइसी के ही कैंपस में पुलिस मुख्यालय, झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, इंजीनियर्स हॉस्टल में निगरानी विभाग, समाज कल्याण निदेशालय, नि:शक्तता आयुक्त कार्यालय, जैप आइटी, महिला आयोग, झारखंड राज्य सूचना आयोग भी चल रहा है. एचइसी परिसर के रसियन हॉस्टल को झारखंड विधानसभा बनाया गया है. यहीं पर विधायक आवास भी है. सरकार की ओर से 25-25 लाख की लागत से यहां भव्य गेट बनाये गये हैं.

इसे भी पढ़ेंःस्थापना दिवस पर आंदोलनकारियों ने गड़बड़ी की तो सख्ती से निपटेगी…

अब एचइसी परिसर में बन रही स्मार्ट सिटी

सरकार की ओर से एचइसी परिसर में स्मार्ट सिटी का निर्माण कराया जा रहा है. काफी ताम-झाम के साथ इसी वर्ष स्मार्ट सिटी का शिलान्यास किया गया था. एचइसी मुख्यालय के बगल में बन रहे स्मार्ट सिटी में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आधुनिकतम सुविधाएं और आइटी की आधारभूत संरचना मुहैया करायी जायेगी.

क्यों ली गयी एचइसी की जमीन

झारखंड सरकार ने एचइसी की 28 सौ एकड़ से अधिक भूमि निगम के बकाये के विरुद्ध अधिगृहित कर ली. एचइसी की तरफ से झारखंड सरकार को बकाया बिजली बिल, वाटर टैक्स, लगान, बिक्री कर और अन्य का भुगतान करना था. सरकार की तरफ से बकाये का आकलन 15 सौ करोड़ से अधिक का किया गया था. चुंकि एचइसी प्रबंधन बकाये का भुगतान करने में असमर्थ थी, इसी एवज में सरकार की ओर से एचइसी के अनुपयोगी जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया.

इसे भी पढ़ेंःसरकार का दावा 2019 से 24 घंटे बिजली, पर कहां से आयेगी बिजली, पावर…

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: