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अफ्रीका : सशस्त्र संघर्षों के कारण 20 साल में लगभग 50 लाख बच्चे मारे गये  

अफ्रीका फिर से खबरों में हैं. एक अध्ययन के अनुसार सशस्त्र संघर्षों के कारण 20 साल में लगभग 50 लाख बच्चे मारे गये हैं.  अफ्रीका में 1995 से 2015 के बीच हुए सशस्त्र संघर्षों पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आयी है.

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Pretoria : अफ्रीका फिर से खबरों में हैं. एक अध्ययन के अनुसार सशस्त्र संघर्षों के कारण 20 साल में लगभग 50 लाख बच्चे मारे गये हैं.  अफ्रीका में 1995 से 2015 के बीच हुए सशस्त्र संघर्षों पर हुए अध्ययन में यह बात सामने आयी है. भाषा के अनुसार अध्ययन में कहा गया है कि सशस्त्र संघर्षों के कारण फैली भुखमरी, चोट और बीमारियों से लगभग 50 लाख बच्चों की मौत हुई,  जिनमें करीब 30 लाख नवजात हैं. इन शिशुओं की आयु एक वर्ष या उससे कम थी. शोधकर्ताओं के अनुसार पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा और भयंकर सशस्त्र संघर्ष अफ्रीकी महाद्वीप में ही हुए हैं.

अध्ययन में यह निष्कर्ष आया है कि सशस्त्र संघर्षों के दुष्परिणाम सिर्फ लड़ाकों का घायल होना या उनका मारा जाना नहीं है. बल्कि इसने बच्चों की मौत के खतरे को भी बढ़ा दिया है .इन मौतों का मुख्य कारण गर्भवती महिलाओं को आवश्यक चिकित्सीय उपचार नहीं मिलना, स्वच्छता में कमी होने, स्वच्छ जल की कमी और भोजन की कमी से उत्पन्न कुपोषण इत्यादि हैं.

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पश्चिमी अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में 60 लाख लोग भूखे हैं

पश्चिमी अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में छह मिलियन (करीब 60 लाख) लोग भूखे हैं या फिर भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अफ्रीकी देशों को लेकर पूरी दुनिया को चौंकाने वाली यह रिपोर्ट UN ने जारी की है. रिपोर्ट कहती है कि साहेल इलाके में 1.6 मिलियन (16 लाख) बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. रिपोर्ट जारी करने के क्रम में  मार्क लोकॉक ने बताया कि 2012 में आये संकट के बाद ऐसा कभी नहीं देखा गया. कहा कि पिछले कुछ महीनों से यहां पर भुखमरी बढ़ गयी है. मार्क ने कहा कि बुर्किना फासो, चाड, माली, मॉरिटानिया, नाइजर और सेनेगल में भी बच्चों को तुरंत भोजन उपलब्ध कराने की जरुरत है. संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार साहेल समेत कई क्षेत्रों में बारिश उम्मीद से कम हुई है. इस वजह से फसलों की पैदावार बहुत कम हुई. बारिश कम होने के कारण इन क्षेत्रों में जल स्तर काफी नीचे चला गया.

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माली में कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या में 120 प्रतिशत का  इजाफा

मार्क लोकॉक ने कहा कि आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे परिवारों में इसकी वजह से खाने-पीने की परेशानी बढ़ गयी. गरीबी में जीवन यापन कर रहे परिवार के बच्चे इसी वजह से कुपोषण के शिकार भी हो गये. बताया कि पूरी दुनिया में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए कार्य करने वाले यूनीसेफ को इन लोगों तक भोजन पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है.  लोकॉक ने कहा कि बुर्किना फासो में, खाद्य असुरक्षा का सामना करने वाले लोगों की संख्या पिछले साल से तीन गुना अधिक हो गयी है. जबकि माली में कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या में 120 प्रतिशत का  इजाफा हुआ है. UN की रिपोर्ट के अनुसार मॉरिटानिया में कुपोषण दर 2008 के बाद से सबसे ज्यादा बढ़ी है.

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