NEWS

अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम करेगी प्रवासियों की आवास समस्या का समाधान : पोद्दार

Ranchi :  यदि सबकुछ ठीक रहा और राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों और सुझावों पर अमल किया तो महानगरों में प्रवासी श्रमिकों के समक्ष आवास की समस्या नहीं रहेगी. और कोरोना जैसी आपात स्थिति में उनके सामने अपने गांव लौटने की मजबूरी नहीं होगी. छोटे शहरों में रह रहे गरीब भी अब सस्ते किराए के मकान हासिल कर पायेंगे. झुग्गियों के विस्तार जैसी समस्याओं से ऐसे शहरों को निजात मिल सकेगी.

शहरी प्रवासियों/गरीबों को किफायती दर पर आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 31 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के अन्तर्गत शुरू की गयी. अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्पलेक्स (एआरएचसी) उप-योजना इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर शुरू की गयी है. राज्यसभा में सांसद महेश पोद्दार के एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए आवासन और शहरी कार्य राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री हरदीप सिंह पुरी ने यह जानकारी दी.

इसे भी पढ़ेंः JPSC और JSSC की परीक्षा आगे विवादित नहीं हो, इसे ध्यान में रख सरकार जल्द निकालेगी विज्ञापन : हेमंत सोरेन

advt

मेमोरंडम ऑफ़ एग्रीमेंट सर्कुलेट किया गया

मंत्री श्री पुरी ने बताया कि सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को मेमोरंडम ऑफ़ एग्रीमेंट सर्कुलेट किया गया है. ताकि वे आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के साथ करार कर सकें. इस योजना पर अमल के लिए निकायों को एक निश्चित रियायत दी जायेगी और ऐसे निकायों/ रियायतग्राही का चयन करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ मॉडल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) साझा की गयी है.

ताकि सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर रिपेयर/रेट्रोफिट, डेवेलप, ऑपरेट एंड ट्रान्सफर (आरडीओटी) के तहत 25 वर्ष की अवधि के लिए सरकार द्वारा वित्तपोषित खाली पड़े मौजूदा आवासों को एआरएचसी के रूप में विकसित किया जा सके. राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/यूएलबी अभिरूचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के माध्यम से सार्वजनिक/निजी निकायों को अपनी खुद की खाली पड़ी भूमि पर एआरएचसी के निर्माण के लिए उन्हें सूचीबद्ध करते हैं.

इसे भी पढ़ेंः भीड़तंत्र का हिंसक चेहरा, अपराधी और उग्रवादी भी हो रहे शिकार

लाभार्थियों की मैपिंग और पहचान की जिम्मेदारी निकायों की

एआरएचसी योजना दिशा-निर्दशों के अनुसार, लाभार्थियों की मैपिंग और पहचान की जिम्मेदारी चुनिंदा रियायतग्राही/निकायों की है. रियायतग्राही/निकाय ब्लॉक में आवास उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय उद्योगों/विनिर्माण/सेवा प्रदाता/शिक्षा/स्वास्थ्य संस्थाएं/बाजार एसोसिएशन/ रोजगार करने वाले अन्य शहरी प्रवासी/गरीब से संपर्क कर सकते हैं. और जैसा उन्हें उचित लगे, वे अपने वेतन/फीस/किसी प्रकार के पारिश्रमिक से सीधे किराए का भुगतान कर सकते हैं.

adv

राज्य/संघ राज्य क्षेत्र/यूएलबी/पैरास्टेटल फैक्ट्रियों, उद्योंगों/संस्थाओं में काम करने वाले प्रवासियों को किराये पर आवास दिलाने के लिए निकाय/रियायतग्राही और सार्वजनिक/निजी निकायों के बीच तालमेल स्थापित करने में मदद करेंगे. जिससे आजीविका और निरंतर राजस्व सुनिश्चित हो सके.

इसे भी पढ़ें – हां, मैंने भी गांजा सेवन किया है !

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button