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एफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम को लेकर नहीं मिल रही हैं कंपनियां

झारखंड राज्य आवास बोर्ड और सुडा बार-बार कर रहे शर्तों में परिवर्तन

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Ranchi: झारखंड सरकार ने 2022 तक राज्य के सभी प्रमुख शहरों में एफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने की महात्वाकांक्षी योजना बनायी है. इसके अंतर्गत सिंगल बेडरूम, डबल बेडरूम और ट्रिपल बेडरूम के आवास किफायती दरों में लोगों को उपलब्ध कराया जाना है.

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इन आवास की कीमत 11 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक के बीच तय की गयी है. हाउसिंग फॉर ऑल के तहत इस योजना में केंद्र प्रायोजित योजनाओं को छोड़ कर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर भी कंपनियों की तलाश जारी है. सरकार एक लाख आवास बनाना चाहती है.

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नहीं आ रहीं कंपनियां

एफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (सुडा) और नगर विकास विभाग की एजेंसी की तरफ से इसके लिए अब तक दो बार आवेदन भी निविदादाताओं से मंगाये गये हैं. सरकार की शर्तों की वजह से इस दिशा में कोई रीयल इस्टेट डेवलपमेंट से जुड़ी कंपनियां नहीं आ रही हैं.

पहले सरकार की तरफ से 65:35 के आधार पर आवेदन मंगाये गये थे, जिसमें कंपनियों को 65 प्रतिशत कनवर्सन पर जमीन देकर उसे विकसित करने की शर्त रखी गयी थी. इसमें कोई भी कंपनी नहीं आयी. इसके बाद सरकार ने इस कनवर्सन दर को 50:50 कर दिया है. इसमें भी कंपनियां झिझक रही हैं.

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क्रेडाई के प्रतिनिधियों से सरकार ने की है कई दौर की बातचीत

राष्ट्रीय स्तर पर गठित कंफेडरेशन ऑफ रीयल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के प्रतिनिधिमंडल से सुडा के प्रबंध निदेशक आशीष सिंहमार ने कई दौर की बैठकें भी की हैं. इसमें डेवलपर्स से कहा गया है कि वे सरकार की परियोजना पर काम करें. सरकार की तरफ से शर्तों को और शिथिल किया जायेगा. पीपीपी मोड पर काम करनेवाली एजेंसियों को सरकार की तरफ से अनुदान भी दिया जायेगा. सरकार रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, लोहरदगा, हजारीबाग, देवघर, दुमका, सरायकेला-खरसांवां, चास, मिहिजाम, गुमला, गिरिडीह, चतरा, गुमला, पलामू में एफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत घर बनवाना चाहती है.

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पूर्व से चल रही हैं तीन योजनाएं

सभी को आवास के तहत राज्य में समेकित हाउसिंग स्कीम एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम (आइएचएसडीपी), बेसिक सर्विसेज टू अरबन पूअर (बीएसयूपी) और राजीव आवास योजनाएं चल रही हैं. केंद्र प्रायोजित इन योजनाओं में 14,500 से अधिक आवास शहरी गरीबों के लिए बनाये जाने हैं. 2015 में शुरू हुई इन योजनाओं के तहत 584.65 करोड़ रुपये से अधिक रुपये भी खर्च किये जा चुके हैं. इनमें से आठ हजार से अधिक आवास बनाये जा चुके हैं.

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