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झारखंड में इंजीनियरिंग, पोलिटेक्निक व मैनेजमेंट संस्थानों के लिए संबद्धता आसान नहीं

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  • उच्च, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास विभाग का फरमान, हर साल संबद्धता जरूरी
  • डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए संबद्धता लेनी जरूरी नहीं
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Deepak

Ranchi: झारखंड में इंजीनियरिंग कॉलेज, पोलिटेक्निक, मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट संस्थानों के लिए राज्य सरकार से संबद्धता लेना आसान नहीं है. इसके लिए सभी संस्थानों को कई दौर से गुजरना पड़ता है. संबद्धता लेने में विशेष भूमिका संबंधित विश्वविद्यालयों की होती है. उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति को पत्र लिख कर संबद्धता प्रदान करने की अर्हता पूरा करने का आदेश देते हैं. इसके बाद ही सारा खेल शुरू होता है. संबद्धता लेने की त्रिस्तरीय प्रणाली में विभागीय सचिव, विभागीय निदेशक, विश्वविद्यालय के कुलपति और अंत में विभागीय मंत्री भी साझेदार होते हैं. सबके पास से संचिका गुजरती है.

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विश्वविद्यालयों की टीम आधारभूत संरचना से लेकर स्टूडेंट-फैकल्टी रेशियो तक की करती है जांच

संबद्धता प्रदान करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों की टीम इंजीनियरिंग कॉलेज, पोलिटेक्निक, मैनेजमेंट संस्थानों तथा अन्य संस्थानों का भ्रमण करती है. टीम की तरफ से अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से कोर्स की मान्यता होने का सर्टिफिकेट, कोर्स चलाने के लिए आधारभूत संरचना, प्रयोगशाला, शिक्षक-छात्र रेशियो, लाइब्रेरी और अन्य गैर शिक्षकेतर कर्मियों की संख्या का आकलन किया जाता है. इस टीम की रिपोर्ट पर ही सभी संस्थानों की संबद्धता निर्भर करती है. रिपोर्ट की प्रति कुलसचिव के माध्यम से राज्य सरकार के उच्च शिक्षा निदेशक को भेजी जाती है. जिसके बाद ही संस्थान की अस्थायी संबद्धता और संबद्धता दिये जाने का कार्यालय आदेश जारी किया जाता है. प्रक्रिया पूरी होने में छह से आठ महीने तक लगते हैं. यदि कागजात की कमी और तय राशि नहीं दी गयी, तो इसमें और समय लगता है.

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संबद्धता की अनिवार्यता क्यों

संबद्धता लेने की अनिवार्यता केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से दिये गये दिशा-निर्देश के आलोक में की जाती है. इसमें यह कहा गया है कि बगैर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की मान्यता (वर्षवार) और राज्य सरकार के तकनीकी विश्वविद्यालय अथवा राज्य तकनीकी शिक्षा पर्षद की संबद्धता के कोई भी संस्थान किसी भी तरह की पाठ्यक्रम का संचालन नहीं कर सकते हैं. इसका सख्ती से अनुपालन किया जाना जरूरी है. अब सभी सरकारों को संबद्धता का प्रोसेस ऑनलाइन करने को कहा गया है. इसमें सभी संस्थानों को संस्थान से संबंधित सभी दस्तावेज देना जरूरी होता है. दस्तावेज में कॉलेज के शासी निकाय की जानकारी, शासी निकाय के सभी सदस्यों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, आयकर रिटर्न और संस्थान के वार्षिक लेखा (अंकेक्षित) की साफ्टकॉपी और हार्ड कॉपी दोनों देना जरूरी है. सभी तरह के पाठ्यक्रमों का ब्योरा और स्टूडेंट के एडमिशन लेने की सीटवार जानकारी भी संलग्न करना जरूरी होता है.

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कैसे होता है गोरखधंधा

कई संस्थान सिर्फ एआइसीटीइ अथवा डीम्ड यूनिवर्सिटी के नाम पर ही अपने पाठ्यक्रमों को संचालित कर एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं. स्टूडेंट्स से कहा जाता है कि राज्य सरकार के पास संबद्धता के लिए आवेदन दिया गया है. इसी आवेदन के नाम पर जुलाई तक नामांकन की सारी प्रक्रिया संस्थानों द्वारा पूरी कर ली जाती है. जब सेमेस्टर परीक्षा अथवा इंजीनियरिंग अथवा पोलिटेक्निक पाठ्यक्रमों की वार्षिक परीक्षा की बारी आती है, तो राज्य सरकारों के तकनीकी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के फार्म ही स्वीकार नहीं करते हैं. इसमें ही संस्थान की संबद्धता की मांग की जाती है. जिसे देना अनिवार्य है.

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