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अधिवक्ताओं की पीड़ा : रोटी के भी लाले पड़े, कैसे मनेगा त्योहार

  • लॉकडाउन के बाद कोर्ट बंद होने और अभी भी फिजिकल हियरिंग नहीं होने से बढ़ीं दिक्कतें

Ranchi : हमलोग त्योहार और कपड़ों के बारे में नहीं सोच रहे हैं. कैसे बच्चों की फीस जमा हो, कैसे मकान मालिक का किराया भरें और कैसे दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करें, हमारी चिंता यह है. यह कहना है सिविल कोर्ट के अधिवक्ता मुकेश केसरी का.

अभी ऑनलाइन हो रही सुनवाई

यह पीड़ा सिर्फ मुकेश केसरी की ही नहीं, बल्कि राज्य के 90 फीसदी अधिवक्ताओं की है. कोरोना और लॉकडाउन की वजह से मार्च से ही कोर्ट बंद हैं. कुछ समय पहले से अदालतों में काम शुरू हुआ भी, तो सुनवाई ऑनलाइन चल रही है. बहुत कम मामलों में ही सुनवाई हो पा रही है. ज्यादातर अधिवक्ता ऑनलाइन काम करने में खुद को असहज पा रहे हैं. इन सबका असर वकीलों की कमाई पर पड़ा है.

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ऑनलाइन काम करने में परेशानी हो रही अधिवक्ताओं को

राज्यभर की अदालतों में लगभग 38000 वकील प्रैक्टिस करते हैं. इनमें लगभग तीन हजार अधिवक्ता रांची सिविल कोर्ट में कार्यरत हैं. अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होते ही जब अदालती कामकाज शुरू हुए, तो ज्यादातर वकीलों के लिए परिस्थितियां जटिल हो गयीं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हो रही है. बहुत कम वकील ही हैं, जो ऑनलाइन काम कर पा रहे हैं. ज्यादातर बेरोजागार हो गये हैं. जो ऑनलाइन काम कर भी रहे हैं, उनके लिए भी कई चुनौतियां हैं. नेटवर्क की समस्या, लिंक फेल होने जैसी समस्याओं से वे जूझ रहे हैं.

मकान का किराया देना हुआ मुश्किल

अधिवक्ताओं का कहना है कि चार-पांच महीने से आमदनी बंद है. काम पर भी असर पड़ा है. अब हालत यह है कि किसी तरह खींच रहे हैं. जो किराये के मकान पर रहते हैं, वे मकान मालिक से मुंह चुरा रहे हैं. राशन दुकानों में उधार बढ़ गया है और बस किसी तरह से खींच रहे हैं. कुछ ही दिनों में दुर्गापूजा और दशहरा, फिर दीपावली और छठ जैसे त्योहार हैं, लेकिन इस बार कोई भी इन त्योहारों की चर्चा नहीं कर रहा.

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फिजिकल कोर्ट की शुरुआत से ही सुधरेंगे हालात

अधिवक्ताओं ने कहा कि बार काउंसिल में अधिवक्ताओं की हालत पर चर्चा हुई है. उम्मीद है कि काउंसिल इस मामले को गंभीरता से उठायेगा. जब फिजिकल कोर्ट की शुरुआत होगी, तभी हालात सुधरेंगे.

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BCI या झारखंड बार काउंसिल की ट्रस्टी कमिटी से भी नहीं मिली उतनी मदद

झारखंड राज्य बार काउंसिल के सदस्य सह मीडिया प्रभारी संजय विद्रोही ने कहा- राज्य में 90 फीसदी अधिवक्ताओं की हालत बेहद खराब है. अभी दुर्गा पूजा का समय है, लेकिन अधिवक्ताओं के बीच कोई उत्साह नहीं है. न वे घर के सदस्यों के लिए नये कपड़े खरीद सकते हैं और न ही कोई सामान. अभी कितने वकील भूखे पेट सो रहे होंगे, यह भी कहना मुश्किल है. लॉकडाउन के समय में मैंने और जो सक्षम अधिवक्ता थे, अपने साथियों को मदद पहुंचायी, लेकिन जो मदद बार काउंसिल ऑफ इंडिया या झारखंड बार काउंसिल की ट्रस्टी कमिटी से मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली.

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