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राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था से जूझ रहे हैं आदिवासी, आदिम जनजातियों की साक्षरता दर 30 प्रतिशत के करीब

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  • आदिम जनजातियों के विकास के लिए राज्य को मिले 2015-16 में 1627.37 लाख, 2016 -17 में 3120 लाख और 2017-18 में 2043.75 लाख

Ranchi : राज्य की रघुवर सरकार के समक्ष राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती की तरह है, जिस पर पिछले चार के कार्यकाल में कोई खास ध्यान नहीं दिया गया. सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लगभाग पांच हजार स्कूलों को बंद कर पास के स्कूलों में विलय करने का कार्य किया गया है, जिसका विरोध ग्रामीणों के साथ-साथ सत्ताधारी दल के नेता भी करते रहे हैं. वहीं, राज्य की साक्षरता दर के आंकड़े को देखें, तो जनजातीय समुदाय में साक्षरता दर सामान्य से 9.31% कम है और आदिम जनजातियों की औसत साक्षरता दर 30 प्रतिशत के करीब ही है.

राज्य की साक्षरता दर से 9.31 प्रतिशत कम है आदिवासियों की साक्षरता दर

राज्य सरकार की ओर से राज्य में जनजातीय समूह की साक्षरता दर में वृद्धि के लिए कोई ठोस कार्ययोजना पर अमल पिछले चार साल में नहीं किया गया. इससे जनजातीय क्षेत्र में साक्षरता दर में वृद्धि के संकेत नहीं दिख रहे हैं. जनजातीय समाज में साक्षरता दर राज्य की औसत दर से 9.31 प्रतिशत कम रही है, जो जानजातीय इलाके में शिक्षा की बदहली को उजागर करती है. 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार राज्य में साक्षरता का प्रतिशत 66.41 था. इसमें महिलाओं में साक्षरता दर 52.04% , जबकि पुरुष साक्षरता दर 76.84% थी. लेकिन, इसी बीच जनजातीय समाज की साक्षरता दर को देखें, तो वह काफी कम है. 2011 के आंकड़े के अनुसार अनुसूचित जनजातियों की साक्षरता दर 57.1% है, जो राज्य की कुल साक्षरता दर से 9.31% कम है. वहीं, अगर राज्य में पुरुषों की साक्षरता दर की बात करें, तो यह आंकड़ा 75.8% है, जबकि अनुसूचित जनजाति के पुरुषों में साक्षरता दर 68.2%, जो झारखंड की साक्षरता दर से 8.6% कम है. वहीं, महिलाओं में साक्षरता दर को देखें, तो राज्य में 55.4% साक्षरता दर है, जबकि अनुसूचित जनजाति की महिलाओं में साक्षरता दर 40.2% है, जो राज्य की साक्षरता दर से 9.31% कम है.

छह जिलों में जनजातीय महिला साक्षरता दर कम

आंकड़े बताते हैं कि कोडरमा, साहेबगंज, गोड्डा, पाकुड़, गिरिडीह और देवघर जिला में जनजातीय समाज की महिलाओं की साक्षरता दर काफी कम है. महिलाओं की साक्षरता दर कोडरमा में 28.33% , साहेबगंज में 31.2%, गोड्डा में 32.3%, पाकुड़ में 32.3%, गिरिडीह में 33.3% और देवघर में 34.4% है, जो जनजातीय समाज की कमजोर आर्थिक अवस्था को भी उजागर करता है.

जनजातीय समाज के 144262 लोग हैं स्नातक, इनमें से 0.5 प्रतिशत ने की है चिकित्सा की पढ़ाई

जनजातीय समाज में स्नातक की शिक्षा प्राप्त करनेवालों की संख्या 144262 रही है. वहीं, तकनीकी डिग्री के अलावा स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त करनेवालों की संख्या मात्र 12.76% ही है. इंजीनियरिंग तथा प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्राप्त करनेवालों की संख्या 2.62% है. वहीं, चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त करनेवाले लोगों की संख्या 0.5% है. पशु चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त करनॉवालों की संख्या 0.06% ही है. वहीं, शिक्षण कार्य में जुड़े जनजातीय समूह के लोगों की संख्या मात्र 3.90 है.

प्रिमिटिव ट्राइब में साक्षरता दर राज्य में सबसे कम

जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार की 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में आदिम जनजातियों की साक्षरता दर सबसे कम है. जबकि, केंद्र सरकार की ओर से विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह पीवीटीजी के विकास के लिए झारखंड सरकार को 2015 -16 में 1627. 37 लाख, 2016-17 में 3120 लाख और 2017-18 में 2043.75 लाख रुपये झारखंड सरकार को मिले. रिपोर्ट में पीवीटीजी समूह के आदिम जनजाति पहाड़िया में साक्षरता दर 25.6%, बिरहोर में 26.4%, सबर में 26.9%, बैगा में 29%, कोरबा में 29.4%  ही साक्षरता दर है.

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