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आधुनिकता के प्रभाव में ना आए आदिवासी समाज : मुकुंद नायक

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Ranchi : आदिवासी समाज, सभ्यता और संस्कृति को बचाना है तो बच्चों को बाल्यावस्था से ही इसकी जानकारी दें. तभी भविष्य में आदिवासी समाज और संस्कृति बचेगी. जंगलों पर मूलवासी निर्भर रहते हैं, यही इनका आश्रय है. यदि इन जंगलों को ही काट दिया जाये तो इस समूह के साथ क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. उक्त बातें पद्मश्री मुकुंद नायक ने झारखंड जंगल बचाओं आंदोलन के 15वें वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को कहा. कार्यक्रम का आयोजन गोस्सनर थियोलॉजी हॉल में किया गया. मुकुंद नायक ने कहा कि झारखंड राज्य की पहचान ही जंगलों से है. राज्य का नाम भी इसी आधार पर रखा गया है. लेकिन अब जंगलों पर खतरा है. गाने के माध्यम से उन्होंने जल, जंगल, जमीन से आदिवासी समाज का लगाव बताया.

परंपरा भूल रहे लोग

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नायक ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिकता के प्रभाव में आकर युवा अपनी परंपरा और सभ्यता भूल रहे हैं. अब सांस्कृतिक गाने और रीति रिवाज युवाओं को पसंद नहीं आते. आधुनिक गाने कपड़े इनको पसंद आ रहे हैं. ऐसे में सोचा जा सकता है परंपरा कैसे आगे बढ़ेगी. आदिवासी परंपरा को बचाने के लिये जरूरी है कि युवाओं को संस्कृति के प्रति जागरूक किया जायें, तभी भविष्य भी जागरूक होगा.

सरकार दे रही धोखा

समाज सेविका दयामनी बारला ने कहा कि सरकार विकास के नाम पर आदिवासियों के साथ धोखा कर रही है. विकास के नाम पर आदिवासियों के जमीन हड़प रही है. जबकि पुर्नवास के नाम पर इनको कुछ मिलता नहीं. उपजाऊ जमीन का भी अधिग्रहण किया जा रहा है. वहीं आंदोलन करने वाले नेताओं को सरकार हिरासत में ले रही है. सरकार को समझना चाहिये की किसी भी हाल में वो जनता की आवाज को नहीं दबा सकती.

सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के दौरान राज्य भर में जंगल बचाने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया. जिसमें दस लोगों को सम्मानित किया गया. इस दौरान झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन की वार्षिक रिर्पोट भी पेश की गयी.

ये रहे उपस्थित

मौके पर जेवियर कुजूर, वीएस रॉय डेविड, सूर्यमनी भगत, सिप्रियन समद, अलेक्सियुस टोप्पो समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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