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भाजपा के शासनकाल में अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा आदिवासी समाज : सुबोधकांत

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Ranchi : आदिवासियों के हितों की अनदेखी की बात करते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि आदिवासियों के हितों को देख ही कांग्रेस पार्टी ने राज्य बनाने की पहल की थी. इसके विपरीत भाजपा शासनकाल में आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. वर्तमान में विधानसभा में आदिवासियों के 28 प्रतिनिधि हैं. अगर पार्टी के अंदर आदिवासी नेता एकजुट होते हैं, तभी इस निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंका जा सकेगा. सुबोधकांत सहाय ने उक्त बातें शनिवार को बिरसा चौक के समीप सभागार में आयोजित रांची जिला ग्रामीण आदिवासी कांग्रेस एवं महानगर कांग्रेस की आवश्यक बैठक में कहीं. बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सचिव एवं झारखंड कांग्रेस के प्रभारी उमंग सिंघार ने भी राज्य की रघुवर सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया.

आदिवासियों को एकजुट करना कांग्रेस का लक्ष्य

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि आज झारखंडियों को अपने अधिकार लेने के लिए भी लड़ाई करनी पड़ रही है. झारखंड में आदिवासियों को एकजुट करना हमारा लक्ष्य है. पार्टी के अंदर यदि आदिवासी समाज एकजुट होगा, तो इस निक्कमी सरकार को उखाड़ फेंका जा सकेगा.

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आदिवासी को हशिये पर पहुंचाने का काम किया भाजपा ने

सभा को संबोधित करते हुए प्रभारी उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से आदिवासी समाज के हित का काम किया है. कोलेबिरा चुनाव में आदिवासी नेता विक्सल कोंगाड़ी को पार्टी प्रत्याशी बनाया जाना इसी कड़ी का हिस्सा है. वहीं, भाजपा ने अपने चार साल के कार्यकाल में इस समाज के लोगों को हशिये पर पहुंचाने का काम किया. सीएनटी/एसपीटी एक्ट, जो आदिवासियों के अधिकार के सुरक्षा कवच हैं, को बदलकर सरकार ने इसकी शुरुआत की है. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भाजपा के केंद्र एवं राज्य सरकार के कामों का मूल्यांकन किया जाये कि वर्तमान रघुवर सरकार ने आदिवासियों के लिए क्या किया है.

कई नेता रहे उपस्थित

सभा को संबोधित करनेवालों में जोनल को-ऑर्डिनेटर अशोक चौधरी, रमा खलखो,  मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर,  मोर्चा संगठन प्रभारी रवींद्र सिंह,  प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव,  ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश बैठा, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष संजय पांडे सहित आदिवासी कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष एवं सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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